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नौका पर सवार होकर आज पधार रहीं मां दुर्गा, शारदीय नवरात्र प्रारंभ

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घरों, मंदिरों व पूजा पंडालों में होगी कलश स्थापना

कलश स्थापना को लेकर तैयारी पूरी, भक्तों में उल्लास

आरा। मां दुर्गा बुधवार की सुबह घरों, मंदिरों व पूजा पंडालों में विराजेंगी। इस बार माता रानी नाव (नौका) पर सवार होकर पधार रहीं हैं। कलश स्थापित कर माता रानी की आराधना की जायेगी। पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जायेगी। इसके साथ नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो जायेगा। कलश स्थापन को लेकर शहर व ग्रामीण इलाके के भक्तों में काफी उल्लास देखा जा रही है। मंगलवार को ही तैयारी पूरी कर ली गयी है। घरों व मंदिरों की भव्य सजावट की जा रही है। पूजा पंडालों में भी कलश स्थापना की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। पूजा सामग्रियों की खरीदारी तेज हो गयी है। शहर से लेकर हाट-बाजार तक मिट्टी से निर्मित कलश, दीया, चूनरी व फूल-माला एवं पूजन साम्रगी की दुकानें सज गयी हैं। इन दुकानों पर भक्तों की भीड़ जुट रही है। इससे बाजारों में चहल-पहल भी बढ़ गयी है।

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दोपहर 11. 36 से 12. 24 बजे तक होगी कलश स्थापना

कलश स्थापना इस बार बुधवार को दिन के साढ़े ग्यारह से साढ़े बारह बजे तक किया जायेगा। नव दुर्गा मंदिर के पुजारी सुमन बाबा के अनुसार 11.36 से 12.24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है। इस दौरान कलश स्थापना करना शुभ होता है। सुबह 7 बजकर 56 तक प्रतिपदा है। उस समय भी कलश स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नवमी के दिन सूर्योदय से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक हवन किया जा सकता है।

हाथी पर विदा होंगी माता रानी

माता रानी इस बार पर नौका पर सवार होकर आयेंगी और हाथी पर सवार विदा होंगी। यह काफी शुभ माना जाता है। रिटायर शिक्षक पंडित उपेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि नौका पर आगमन व हाथी पर गमन शुभ है। इससे आम जनता की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी।

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शांति व समृद्धि बढ़ेगी।

मंगलवार को खुलेगा माता रानी का पट

इस बार किसी तिथि की हानि नहीं है 16 अक्टूबर मंगलवार को सप्तमी व गुरुवार को नवमी मनायी जायेगी। सप्तमी को ही मां दुर्गा का पट खुल जायेगा।

नौ दिनों तक उपवास रख भक्त करेंगे मां की आराधना
आरा। ‘लिप पोत के घरवा-अंगना कर दिहनी तैयार, ए जी सुनी ना कलशा किने चली बाजार’। सचमूच मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा था। कलश स्थापना को ले अधिकतर घरों की महिलाएं सुबह से ही साफ-सफाई में जुट गयी थी। दोपहर होते-होते महिलाएं काम संपन्न कर पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए निकल पड़ी। कलश स्थापना व दुर्गा पाठ अधिकतर घरों में किया जाता है। इसमें महिलाओं की भागीदारी अधिक होती है। इस दौरान कुछ भक्त नौ दिन उपवास रख आराधना करते हैं। कुछ भक्तों द्वारा घरों, तो कुछ मंदिरों में कलश स्थापना व पाठ करते हैं। इसे लेकर भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।






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