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ढाई साल बाद पुलिस की गिरफ्त में आया मोस्टवांटेड ब्रजेश

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फरार रहने की स्थिति में ब्रजेश व हरेश मिश्र पर रखा गया था इनाम

बिहार से लेकर बंगाल तक की गयी थी ब्रजेश की तलाश

आरा। मोस्टवांटेड व पचास हजार इनामी ब्रजेश मिश्र भाजपा नेता की हत्या के करीब ढाई साल बाद पुलिस की गिरफ्त में आ सका है। गिरफ्तारी के लिए ब्रजेश ने पुलिस को खूब छकाया है। पुलिस उसकी खोज में बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल, यूपी व दिल्ली तक खाक छान चुकी थी। इसके बावजूद वह पकड़ में नहीं आ रहा था। गवाह की हत्या के बाद वह भोजपुर पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड बन गया था। उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनती जा रही थी। हाल के दिनों में विशेश्वर ओझा हत्याकांड के गवाह कमल किशोर मिश्र की हत्या के बाद पुलिस पर अंगूली भी उठने लगी थी। गौरतलब हो कि 12 फरवरी 2016 की शाम करनामेपुर ओपी के सोनवर्षा बाजार के समीप भाजपा नेता विशेश्वर ओझा को गोलियों से भून दिया गया था। भाजपा के कद्दावर नेता व तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष की हत्या को ले तब खूब बवाल मचा था। उस मामले में ब्रजेश मिश्र व हरेश मिश्र सहित सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। पुलिस ने घटना की रात ही एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में कुर्की के डर से चार अन्य आरोपितों ने सरेंडर कर दिया था। हालांकि ब्रजेश व हरेश फरार चल रहे थे। इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय द्वारा दोनों भाइयों के खिलाफ पचास हजार का इनाम रखा गया था। करीब साल भर के बाद हरेश मिश्र को पुलिस गिरफ्तार कर लिया था। जबकि ब्रजेश फरार चल रहा था।

गांव आने के चक्कर में पुलिस की चक्रव्यूह में फंसा ब्रजेश

आरा। मोबाइल से हमेशा दूरी बनाकर रहने वाला सोनवर्षा गांव ब्रजेश मिश्र हाल के दिनों में गांव व आसपास के इलाकों में ही अपना ठिकाना बना रखा है। कुछ दिनों से वह अक्सर अपने गांव सोनवर्षा आने लगा था। उसके गांव आने की सूचना पर पुलिस द्वारा कई बार छापेमारी भी की गयी थी। लेकिन हर बार वह पुलिस को चकमा देने में सफल हो जाता था। सूत्रों का कहना है कि बार-बार गांव आने के चक्कर में ही वह पुलिस की चक्रव्यूह में फंस गया। बताया जाता है कि भाजपा नेता की हत्या के बाद दूसरे राज्यों में ठिकाना बनाया था। वह मोबाइल व फेसबुक से भी दूर रहता था। इसके कारण पुलिस को उसका लोकेशन नहीं मिल पा रहा था। हालांकि हरेश मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद वह अक्सर गांव आने लगा। इससे पुलिस ने उसके गांव की निगरानी बढ़ा दी थी। इसी क्रम में शनिवार को वह पुलिस के हाथ आ गया।

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सादे लिबास में मंडरा रही थी पुलिस

आरा। इनामी ब्रजेश मिश्र के गांव आने की पक्की सूचना पुलिस को सुबह में ही मिल गयी थी। इस आधार पर एएसपी (ऑपरेशन) नितिन कुमार के नेतृत्व में पुलिस सोनवर्षां गांव के ओर चारों ओर मंडराने लगी थी। पुलिस सादे लिबास में थी, जिससे किसी को भनक नहीं लग सकी। इस बीच दोपहर में गांव के बीच में एक दालान पर ब्रजेश के होने की सटीक सूचना मिली। इसके बाद पूरे गांव की घेराबंदी कर पुलिस पहुंच गयी। उस समय ब्रजेश मिश्र दालान में लगी मच्छरदानी में सोया था। हालांकि पुलिस की भनक लगते ही वह भागने का प्रयास किया। तब तक पुलिस उस तक पहुंच गयी और उस पर हथियार तान दिया। पुलिस से घिरा देख ब्रजेश ने हाथ उठा दिया, लेकिन उसका साथी फायरिंग कर भाग निकला। दालान अंदर से बंद था।

पिता समेत तीन भाई जेल में, अब किशुन की तलाश

आरा। करनामेपुर ओपी क्षेत्र के सोनवर्षा गांव निवासी ब्रजेश मिश्र के पिता व दो भाई पहले से ही जेल में है। अब पुलिस उसके छोटे भाई किशुन मिश्र की तलाश चल रही है। किशुन मिश्र भी भाजपा नेता हत्याकांड के गवाह की हत्या में भी आरोपित है। जानकारी के अनुसार शिवाजीत मिश्र अपने ही गांव के माको ओझा व मुन्ना मिश्र हत्याकांड में काफी दिनों से जेल में बंद हैं। एक मामले में उनको सजा भी हो गयी है। बड़ा बेटा धनंजय मिश्र भी माको ओझा की हत्या में जेल में है। करीब डेढ साल पहले हरेश मिश्र भी विशेश्वर ओझा की हत्या में जेल जा चुका है। अब ब्रजेश भी पुलिस की पकड़ में आ गया है।

ब्रजेश की गिरफ्तारी के बाद अब कार्बाइन की हो रही खोज

आरा। मोस्ट वांटेड व इनामी ब्रजेश मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कार्बाइन की तलाश कर रही है। इसके लिए ब्रजेश की निशानदेही पर छापेमारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि माको ओझा, विशेश्वर ओझा व कमल किशोर मिश्रा की हत्या में कार्बाइन का इस्तेमाल करने की बात सामने आ चुकी है। हालांकि अब तक पुलिस को कार्बाइन नहीं मिल सका है। भाजपा नेता भुअर ओझा व पूर्व विधायक मुन्नी देवी द्वारा भी इन हत्याओं में कार्बाइन की इस्तेमाल की बात कहते हुए बरामद की मांग की जा चुकी है। ऐसे में ब्रजेश की गिरफ्तारी से कार्बाइन मिलने की उम्मीद बढ़ गयी है।

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गवाह हत्याकांड के बाद फिर से चर्चा में आ गया था ब्रजेश

आरा। भाजपा नेता विशेश्वर ओझा की हत्या के बाल सुर्खियों में ब्रजेश मिश्र गवाह हत्याकांड के बाद फिर से चर्चा में आ गया था। सोनवर्षा गांव निवासी गवाह कमल किशोर मिश्र की हत्या की गूंज सरकार तक पहुंची थी। हत्या के बाद डीजीपी द्वारा पूर्व एसपी अवकाश कुमार से ब्रजेश के बारे में जानकारी की मांग की गयी थी। वहीं हाईकोर्ट द्वारा भी गवाह की हत्या पर नाराजगी प्रकट की थी। साथ ही कोर्ट ने अन्य गवाहों की सुरक्षा व ब्रजेश की गिरफ्तारी के लिए डीजीपी को समीक्षा करने व शपथ दायर करने का आदेश दिया था। बता दें कि 28 सितंबर की सुबह सोनवर्षा गांव में भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड के गवाह कमल किशोर मिश्रा को कार्बाइन से भून दिया गया था। तब अंधाधुंध की गयी फायरिंग में सोनवर्षा के अमर मिश्र भी जख्मी हो गये थे। इस मामले में ब्रजेश मिश्र व उसके भाई किशुन मिश्र सहित पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। इसमें दो को पुलिस ने उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। जबकि एक अन्य आरोपित ने सरेंडर कर दिया था। ब्रजेश की गिरफ्तारी के बाद अब सिर्फ किशुन मिश्र को पकड़ना बकी है।

भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड में चल रहा ट्रायल

आरा। चर्चित भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड में ट्रायल चल रहा है। फिलहाल गवाही चल रही है। दो गवाहों का बयान भी दर्ज कराया जा चुका है। गवाही के लिए कोर्ट जाने के दौरान ही कमल किशोर मिश्र को धमकी दी गयी थी। गवाही के बाद हत्या कर दी गयी थी। बता दें कि पुलिस ने भाजपा नेता हत्याकांड में साल भर की भीतर ही पुलिस ने चार्जशीट सौंप दी थी। ब्रजेश को फरार दिखाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

हथियार के तलाश में छापेमारी जारी

आरा। भोजपुर पुलिस की टीम गिरफ्तार ब्रजेश मिश्र को लेकर फिलहाल दियारा क्षेत्र में कई स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं। ताकि उसके गिरोह में मौजूद अत्याधुनिक हथियारों को बरामद कर किया जा सके। बता दें कि ब्रजेश मिश्र घटना को अंजाम देने के बाद दियारे में छिप जाता था तथा अपने सहयोगियों के पास हथियार छुपा कर रख देता था।






error: Content is protected !! खबरें आपकी,डॉ कृष्णा जी,दिलीप ओझा,रवि।
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