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सावधानी व संयम से डायबिटीज पर पाया जा सकता है काबू- डॉ. केएन सिन्हा

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  • जीवनशैली में बदलाव से बढ़ रहे डायबिटीज के मरीज-डॉ. सागर आनंद

  • गुजरात के अहमदाबाद में गत 22 से 25 नवंबर तक आयोजित हुआ था कॉन्फ्रेंस

आरा। राष्ट्रीय डायबिटीज कॉन्फ्रेंस (आरएसएसडीआई- 2018) के वार्षिक सेमिनार का आयोजन अहमदाबाद के गुजरात यूनिवर्सिटी कन्वेंशन सेंटर में हुआ। गत 22 से 25 नवंबर तक चले इस कनवेंशन में देश- विदेश के हजारों फिजीशियन एवं डायबीटीशियन भाग लिए।

बिहार प्रतिनिधि दल में आरा के फिजीशियन डॉ. केएन सिन्हा एवं एम्स के चिकित्सक डॉ. सागर आनंद भाग लिए। सेमिनार में डायबिटीज के विभिन्न पहलुओं पर आधुनिक वैज्ञानिक विचारों का आदान-प्रदान व विचार-विमर्श हुआ तथा कई पेपर प्रदर्शित किए गए। गहन मंथन में डायबिटीज के कई नए जांच व इलाज तथा कंप्लीकेशन-रोकथाम के उपाय निकले।

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डाॅ. केएन सिन्हा ने सुदूर छोटे शहरों एवं ग्रामीण इलाकों में डायबिटीज की स्थिति के बारे में बताया कि डायबिटीज यहां भी तेजी से पांव फैला रहा है। इसका प्रमुख कारण ग्रामीण क्षेत्र में भी जीवनशैली में बदलाव, प्रदूषण ल तनाव है। कंप्यूटर, टीवी व मोबाइल से जीवनशैली बदला है। शारीरिक श्रम का अभाव से डायबिटीज तेजी से फैल रहा है।

डॉ. सागर आनंद ने बताया कि अन्न की अपेक्षा हमें ताजे फल, हरी सब्जी, सलाद ज्यादा सेवन कर नित्य एक घंटा योगा, व्यायाम व टहलने समय लगाना है। तभी हम डायबिटीज ही नहीं ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी के साथ अन्य कई रोगों से अपने को बचा सकते हैं। ठंडा से बचते हुए आने वाले जाड़े के मौसम में आलस त्यागकर शारीरिक श्रम करें। तेल-मसाला का सेवन कम करें। गर्म पानी बार-बार ज्यादा पिए। खाना अपने शारीरिक श्रम के अनुसार अनुपात में ही खाएं। डायबिटीज के रोगी अपने पूरे शरीर के साथ पैर का ध्यान रखें। डायबिटीज रोग ही नही बल्कि रोगों का एक समूह है। इससे डरने की जरूरत नहीं है। थोड़ी सावधानी व थोड़ा संयम रहकर डायबिटीज पर काबू पाया जा सकता है। फिर भी मस्त रहें, व्यस्त रहें।

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