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जबांज पुलिस अफसर शम्भू भगत- आत्मसंयम-व्यवहार-अनुशासन से बनाई अपनी अलग पहचान

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शम्भू भगत ऐसे शख्स जिन्होंने खाकी में रहकर प्यार और दुलार की नई परिभाषा लिखी।

वर्दी की आन-बान-शान के लिए हमेशा समर्पित रहने वाले अफसर

आत्मसंयम-व्यवहार-अनुशासन से बनाई अपनी अलग पहचान

छुट्टियां भी कुर्बान जन सुरक्षा में…

चंद घंटों में खोल देते हैं झूठी कहानी की परतें

प्रभावी और मजबूत है इनका खुफिया तंत्र

ड्रग्स माफियों को स्कैन कर लेती हैं इनकी तेजतर्रार नजरें

आरा:-ये कहानी है शम्भू भगत की..यह कोई फिल्म स्टार नहीं वल्कि बिहार पुलिस के खाकी में इंसान के संदर्भ में कुछ बाते है जिनके निस्वार्थ सोच को सिवानवासी इन्हें अपना गर्व मानते है गरीब बच्चों को शिक्षा के लिये अपने वेतन से निस्वार्थ सेवा को समर्पित,जिनकी बदौलत कुछ तो अच्छे पदों पर सरकारी सेवा में है इनके साथियों ने भी इनके गरीबों के प्रति समर्पण को देखते इनके साथ मिलकर अपने वेतन से प्रत्येक महीना सौ रुपया इनके कमिटी में जमा करते है और इन पैसों का इस्तेमाल गरीब बच्चों की पढ़ाई और गरीबो की शादी बैगरह मे मदद की जाती है इसके अलावा खाकी की शान को बनाये रखने में इनके कार्यो पर एक नजर….

शम्भू भगत बतौर थाना अध्यक्ष जिनकी सातों दिन चौबीस घंटे की सजगता से हम सुकून की सांस लेते हैं, उस शम्भू भगत के जज्बे, जुनून, बहादुरी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, अन्वेषी सोच और नजर के बूते जहां भी जाते है वहा शांति अमन बढ़ जाता है।

शम्भू भगत शांतिभंग के मामले से लेकर बड़े से बड़े अपराध की परतें खोलने में जो भूमिका निभाते हैं, वह पीडि़त को अदालत से न्याय दिलाने में अहम कड़ी है। उनका अन्वेषण और पारखी नजर भी अपराध जगत से जुड़े कारिंदों में खौफ भर देती है, जिससे समाज में सुरक्षा का भरोसा बनता है। ‘पुलिस’ एक शब्द है भरोसे, पर्याय है हौसले का।

छुट्टियां भी कुर्बान जन सुरक्षा में…

जहाँ भी शम्भू भगत जाते अपने क्षेत्र में शांति बनाए रखने एवं आमजन में सुरक्षा की भावना को सशक्त करने में अहम योगदान निभाते है। जनसेवा के आगे छुट्टियों और सुविधाओं का त्याग कर, त्यौहार पर जब आमजन खुशियां मनाता है तब उनकी सुरक्षा व्यवस्था में जनसेवा समझ कार्य में तत्पर रहते हैं इनके जज्बे देख आम जन ही नहीं इस विभाग के हर सिपाही को गर्व से भर देती हैं। इन्होंने खाकी में रहकर प्यार और दुलार की नई परिभाषा लिखी।

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चंद घंटों में खोल देते हैं झूठी कहानी की परतें

अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के साथ ही फर्जी फरियादों की पहचान कर लेना शम्भू भगत की खासियत है।
पूछताछ के दौरान इनके द्वारा पूछे गए सवालों के फेर में फर्जी फरियादियों की हकीकत सामने आ जाती है।
पुलिस का पेशा ही अपराध और अपराधी की पहचान का है, लेकिन शम्भू भगत की नजर औरों से जुदा है, वे अपराधियों को तो पहचान ही लेते हैं और निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश करने वालों की कारगुजारी भी भांप लेते हैं। चतुराई से पूछे गए मनोवैज्ञानिक सवालों के फेर में झूठ बोलने वाला फंस ही जाता है। उत्कृष्ट विवेचनाओं की कड़ी में भोजपुर जिले के शाहपुर थाना की घटना महत्वपूर्ण है।

प्रभावी और मजबूत है इनका खुफिया तंत्र

अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाए रखने के लिए मुखबिर तंत्र की अहमियत सबसे अधिक है।जहाँ भी जाते है मुखबिर तंत्र को सशक्त बनाए रखने में महारत हासिल है शम्भू भगत को। इसके जरिये उन्होंने अपराधियों को अंजाम तक पहुंचाया। सिवान जिले के रहनेवाले बिहार के अन्य जिलों में बतौर थाना प्रभारी रहे शम्भू भगत के मुखबिर तंत्र की कहानी किसी से छिपी नहीं है। SIT प्रभारी एवं विभिन्न थानों में पदस्थापना के दौरान ऐसे कई अपराधियों को पकड़ा, जिनकी वजह से लोगों का जीना दुश्वार था।

ड्रग्स माफियों को स्कैन कर लेती हैं इनकी तेजतर्रार नजरें

तस्करी के लिए उपयोग में लाई जाने वाली तमाम चालों को बेनकाब कर अपराधियों पर लगाम लगाने में भी शम्भू भगत को महारत हासिल है। उन्होंने कार्रवाई कर तस्करों को उनके अंजाम तक पहुंचाया है। तस्कर ऐसे तरीके ढूंढते हैं कि अकसर सुरक्षा एजेंसियां गच्चा खा जाती हैं, लेकिन शम्भू भगत के काम करने का अलग अंदाज है। शम्भू भगत की कार्रवाई का नतीजा है कि तस्करों के मन में पुलिस का खौफ है।

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कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में महारत हर चुनौती का करते हैं डटकर मुकाबला शम्भू भगत अपने हौसले से मुश्किल में फंसे कई लोगों की मदद करते है सेवा उनकी पहली प्राथमिकता में रहती है। वरिष्ठ अधिकारियों से मिले निर्देश समय पर पूरा हो सकें इसके लिये ईमानदारी से काम करते है

वर्दी की आन-बान-शान के लिए हमेशा समर्पित रहने वाले अफसर साधारण फैमिली से ताल्लुक रखने वाले शम्भू भगत ने बचपन में ही तय कर लिया था कि चाहे सेना हो या पुलिस, वर्दी पहनकर सेवा करना है।

तकनीक कितनी भी बेहतर हो जाए, अनुशासन जरूरी’

अधीनस्थों से बेहतर संवाद और बेहतर रिश्ते हों तो साथी भी इस विश्वास को कायम रखने में जी-जान लगा देते हैं। ये कहना है शम्भू भगत का। उन्होंने कहा कि ऐसा मौका नहीं आया, जब साथियों ने काम से बचने के लिए झूठ बोला हो। परिवहन और संचार के साधन तकनीकी अपडेट हुए हैं। इनमें जितनी तेजी आई है, लोगों में काम को टालने की प्रवृत्ति उतनी ही बढ़ती जा रही है, लेकिन तकनीक कितनी भी बढ़ जाए अनुशासन का विकल्प नहीं हो सकती। वर्दी की पहली जरूरत अनुशासन है, इसी ध्येय वाक्य के साथ शम्भू भगत कई जिलों में थानों का प्रभार कुशलतापूर्वक संभालते आ रहे हैं।

आत्मसंयम-व्यवहार-अनुशासन से बनाई अपनी अलग पहचान

जब तक वह अपना काम पूरा नहीं कर लेते हैं, तब तक घर का रास्ता नहीं देखते हैं।भोजपुर जिला बल से क्राइम कन्ट्रोल हेतु सुपरकॉप 20 के तहत चयनितों में पटना जिला बल में गये शम्भू भगत के बारे में विभाग के अधिकारी कर्मचारी कुछ इस तरह की राय रखते हैं। उनके अनुशासन, व्यवहार के कायल सभी हैं। शम्भू भगत के आत्मसंयम, व्यवहार और अनुशासन की विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तारीफ करते नहीं थकते। शम्भू भगत के बारे में कहा जाता कि जब तक वह अपना काम पूरा नहीं कर लेते, घर का रास्ता नहीं देखते।
फिर क्या कारण है शम्भू भगत को जनता से दूर रखने का..?


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