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एक टीका करेगा दो गंभीर रोगों से बचाव, मिजिल्स व रूबेला दोनों से बचाएगा एमआर वैक्सीन

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15 जनवरी से शुरु होगा टीकाकरण अभियान

9 माह से 15 साल तक के बच्चों को किया जायेगा प्रतिरक्षित

नियमित प्रतिरक्षण में शामिल होगा एम आर वैक्सीन

 

आरा:-रिपोर्ट:-डॉ के कुमार:-बच्चों में होने वाले खसरे एवं रुबेला से बचाव के लिए सरकार द्वारा एमआर (मीजल्स रुबेला) वैक्सीन देने के अभियान की शुरुआत आगामी 15 जनवरी से की जा रही है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रभावी रूप से तैयारी में जुटा है। इसके प्रभावी व सफल क्रियान्वयन के लिए लिए स्कूल एवं सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

खतरनाक है रूबेला वायरस

आरा। रूबेला वायरस से फैलने वाला एक गंभीर रोग है, जिसे जर्मन मिजिल्स के नाम से भी जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 95 प्रतिशत रूबेला का वायरस 15 साल तक के बच्चों के माध्यम से वायुमंडल में फैलता रहता है। यह वायरस गर्भवती माता के माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चों पर
गंभीर रूप से असर डालता है, इससे बच्चो में अंधापन, गुंगापन, हृदय रोग, गुर्दा रोग एवं इसके साथ ही अपंग पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। इस वायरस से होने वाली विभिन्न समस्याओं को कोनजीमैटल रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) के भी नाम से जाना जाता है।

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क्या कहते हैं आंकड़े?

आरा। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार दुनिया भर में 2014 में 1.15 लाख बच्चे खसरे से मरे थे और लगभग एक लाख बच्चे सीआरएस से ग्रसित थे। भारत में 2005 में सीआरएस से ग्रसित केवल 238 बच्चे थे। जो 2014 में बढ़कर 4416 हुए। इन बढ़ते हुए आंकड़ों को देखते हुए सरकार ने मीजल्स रूबेला के टीके को टीकाकरण अभियान में शामिल करने का फैसला किया। वर्ष 2015 में पूरे विश्व में मिजिल्स के कारण 134, 200 मौतें हुईं। 49,200 मौतें जो कि इससे होने वाले मृत्यु का तकरीबन 36 प्रतिशत अकेले भारत में हुई है। भोजपुर जिले में इस अभियान के तहत करीब 10,000,00 बच्चों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। नोडल अधिकारी डॉ. इरफान के अनुसार टीकाकरण ही रूबेला से बचाव का एकमात्र उपाय है।

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खसरा (मिजिल्स) टीका एमआर में होगा तब्दील

आरा। बच्चों को दी जाने वाली खसरे के टीके की जगह अब खसरा एवं रूबेला दोनों रोगों से संयुक्त बचाव के लिए एमआर वैक्सीन को नियमित प्रतिरक्षण में शामिल किया जाएगा। इस नए टीके का डोज खसरे के पुराने डोज की ही तरह रहेगा। नियमित प्रतिरक्षण के तहत 9 महीने के बच्चे को पहला डोज एवं 16 से 24 महीने के बच्चे को दूसरा डोज दिया जाएगा। आगामी 15 जनवरी से इस टीके की शुरुआत की जाएगी, जिसमें 9 महीने से 15 साल तक के सभी बच्चे एवं किशोरों को यह टीका लगाया जाएगा।

 






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