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संस्कृति व संस्कार को पीढी दर पीढी आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है संभावना स्कूल-डॉ. कन्हैया बहादुर

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अनुशासन, कार्यशैली व शिक्षा में विद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान- सीताराम सिंह

बसंतोत्सव संस्कार व संस्कृति से परिचय कराने का एक अभियान-डॉ. अर्चना सिंह

सांस्कृतिक आयोजन से बच्चों में बनता है संस्कार-डॉ. कुमार द्विजेन्द्र

संभावना पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मना मां सरस्वती पूजा

वार्षिक उत्सव बसंतोत्सव-2019 का हुआ भव्य आयोजन

आरा(डॉ. के कुमार/दिलीप ओझा)। शहर के मौलाबाग स्थित ‘शारदा स्मृति’ संभावना पब्लिक स्कूल में बसंत पंचमी के अवसर पर विद्या की अधिष्ठात्री देवी ‘मां सरस्वती का पूजनोत्सव’ तथा बसंतोत्सव-2019 का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन दो सत्रों में हुआ। प्रथम सत्र में पूरे विधि विधान से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई। समारोह के द्वितीय सत्र में विद्यालय का वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव बसंतोत्सव-2019 का शुभारंभ हुआ। जिसका उद्घाटन प्रो. डाॅ. कन्हैया बहादुर सिन्हा (अध्यक्ष फुटाब), मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य सीताराम सिंह, विशिष्ट अतिथि जद(यू) नेता भाई बरमेश्वर, प्रबंध निदेशक सह कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. कुमार द्विजेंद्र तथा प्रशाशिका डॉ. अर्चना सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

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उद्घाटनकर्ता डॉ. कन्हैया बहादुर सिन्हा ने कहा कि आज के दौर में मैंने पहली बार किसी विद्यालय में इतनी श्रद्धा व विश्वास के साथ मां सरस्वती का पूजन देखा है। यह हमारी संस्कृति व संस्कार है। यह विद्यालय हमारी संस्कृति तथा संस्कारो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। पूर्व प्राचार्य सीताराम सिंह ने कहा कि विद्यालय के अनुशासन, कार्यशैली व शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को देखकर मैं काफी प्रभावित रहा हूं। यह विद्यालय भोजपुर में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भाई बरमेश्वर ने भी छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को अपनी शुभकामनाएं दी।

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स्वागत करते हुए विद्यालय की प्रसाशिका डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं है। बल्कि यह आने वाली पीढ़ी को अपने संस्कार व संस्कृति से परिचय कराने का एक व्यापक अभियान है। बसंतोत्सव की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ. कुमार द्विजेंद्र ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति हावी न हो। इसके लिए हमें अपनी संस्कृति व संस्कार से जुड़े गीत, संगीत और मूल्यों को आगे बढ़ाना होगा। इस तरह के आयोजन से बच्चों में संस्कार बनता है।


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