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शाहपुर में संत शिरोमणि की 642वीं जयंती की धूम

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पंडाल में भगवान श्रीराम के मूर्ति के साथ बाली सुग्रीव युद्ध की सचित्र वर्णन आकर्षक आकर्षण का केंद्र

संत शिरोमणि रविदास प्रभु आध्यात्मिक बुद्धिमता के प्रतीक थे और समानता में विश्वास रखते थे:-रमेश

भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में घर-घर में संत रविदास की अनमोल तेजस्वी वाणी मन चंगा तो कठौती में गंगा प्रचलित है:-त्रिलोकीनाथ

आरा/शाहपुर :- संत शिरोमणि गुरु रविदासजी की 642 वीं जयंती धूमधाम से आज मंगलवार को शहर के वार्ड 10 एवं वार्ड 4 में मनाई जा रही है। इसे लेकर भब्य पंडाल का निर्माण किया गया है। नेशनल हाइवे 84 के किनारे वार्ड 10 स्थित भब्य पंडाल में भगवान श्रीराम के मूर्ति के साथ बाली सुग्रीव युद्ध की सचित्र वर्णन आकर्षक आकर्षण का केंद्र है

जयंती समारोह का शुभारंभ कमिटी सदस्यों ने संयुक्त रूप से किया।कमिटी के सदस्य समाजसेवी त्रिलोकी राम ने कहा कि भारत में संत तो अनेक हुए लेकिन संत रविदास जैसा नहीं। भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में घर-घर में संत रविदास की अनमोल तेजस्वी वाणी मन चंगा तो कठौती में गंगा प्रचलित है। समाजसेवी सुशील राम ने रविदास जी की जीवन चरित पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक चर्मकार परिवार में जन्म लेकर राजा-महाराजा का गुरु बनना महान कर्म की पराकष्ठा है।

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समाजसेवी ललन राम ने कहा कि भक्तिकाल के महान संत रविदास अपने प्रखर क्रांतिकारी विचारों से समाज में फैले अंधविश्वास, जाति-पात, असमानता को समूल नष्ट करने का समाप्त करने का प्रयास किया। रविदास जी के सन्मार्गो पर चलने का आह्वान किया।समाजसेवी प्रेमशंकर ने अपने सम्बोधन में कहा कि संत कुल भूषण कवि संत शिरोमणी रविदास उन महान संतो में अग्रणी थे।जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज मे ब्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान किया।

वही पूर्व वार्ड पार्षद शिव कैलाश राम ने कहा कि संत रविदास जी ने ऊंच नीच की भावना तथा ईश्वर भक्ति के नाम पर किये जाने वाले विवाद को सार हीन तथा निर्थक बताया और सबको परस्पर मिलजुल कर प्रेम पूर्वक रहने का उपदेश दिया।वे स्वयं मधुर तथा भक्तिमय भजनों की रचना करते थे। उन्होंने कहा कि संत किसी एक समाज का नहीं होता। संतों ने अपनी उच्च सोच से समाज उत्थान में बेहतर योगदान दिया है। जिसमें संत शिरोमणि रविदास महाराज भी एक हैं। उन्होंने कहा कि संतों ने समाज को नई दिशा नई सोच देने का काम किया है। एक प्रेरणा स्त्रोत के रूप में उनके जीवन रूपी सार को अपने जीवन में ढालना चाहिए।

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पूजा समिति के सदस्य पंडाल निर्माण में सहयोगी संतोष राम ने कहा कि संत रविदास किसी एक वर्ग के गुरू नही थे। बल्कि गुरु तो किसी एक का ना होकर संत महात्मा सारी सृष्टि के होते हैं। संत रविदास ने समाज को जो शिक्षा दी उससे समाज ने बहुत कुछ सीखा है। साफ मन से की गई भक्ति से ही ईश्वर अपनी दया भाव की दृष्टि हमारी ओर करता है। रविदास एक महान मानवतावादी और धर्म सुधारक संत थे। उन्होंने अपना जीवन जातिविहीन और भेदभाव रहित समाज के निर्माण में लगाया।

वही वार्ड 4 स्थित पूजा पंडाल के उद्घाटनकर्ता वार्ड पार्षद रमेश राम ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास प्रभु आध्यात्मिक बुद्धिमता के प्रतीक थे और समानता में विश्वास रखते थे। हमें गुरु रविदास जी के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए और विश्व बंधुत्व तथा समानता पर आधारित समाज का लक्ष्य हासिल करने के लिए मजबूत प्रयास करने चाहिए।इस अवसर पर पूजा कमिटी के सदस्यों में लालजी राम,उपेंद्र राम,सुनील राम,किसान राम,छठु राम,राजकिशोर राम,सहित अन्य आदि थे।






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