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फौज से भागने के बाद जरायम की दुनिया में आ गया था शंकर दयाल सिंह

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पुलिस से बचने के लिए फौजी ने दियारे इलाके को बना लिया था अपना ठिकाना

बालू को लेकर फौजी व मनेर के सिपाही गूट के बीच चल रही थी वर्चस्व की लड़ाई

जमीन पर कब्जे को ले भी फौजी का चल रहा था विवाद

खबरें आपकी,आरा। भोजपुर जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र के फरना गांव के रहने वाले शंकर दयाल सिंह उर्फ फौजी की लंबी कहानी है। फौज से भागने के बाद वह जरायम की दुनिया में आ गया। उसने पुलिस से बचने के लिए दियारे को अपना ठिकाना बना लिया था। उसकी अंत भी दियारे इलाके में ही हो गयी। जानकारी के अनुसार शंकर दयाल सिंह फौज में नौकरी करता था। तब वह असम में तैनात था। करीब दो दशक पहले वह एके 47 लेकर फौज से भाग गया। कुछ दिनों तक वह पुलिस की आंख में धूल झोंककर एके 47 लेकर इलाके में घूमता रहा। फौज से भागने में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और उसे जेल जाना पड़ा। जेल से आने के बाद तो वह पूरी तरह अपराध की दुनिया में रम गया। कुछ साल पहले वह पटना पुलिस को चकमा देकर भागने में भी सफल रहा था।

पटना के तत्कालीन एसएसपी मनु महाराज की टीम ने घेराबंदी की थी। तब फायरिंग भी हुई थी, लेकिन फौजी भाग निकला था। जानकारी के अनुसार साल 2000 में अपहरण करने से उसकी अपराध की कहानी शुरू हुई। इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह हत्या, रंगदारी, डकैती व हत्या के प्रयास जैसी घटनाओं को ताबड़तोड़ अंजाम देने लगा है। इससे वह पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया। उसके खिलाफ भोजपुर व पटना में अब तक आठ मामले दर्ज होने की बात सामने आ चुकी है। पहला मामला साल 2000 में बड़हरा थाने में हत्या के प्रयास करने का दर्ज किया गया। उसके बाद उसी साल अपहरण के एक मामले में भी उसका नाम आया। उसमें उसको अप्राथमिकी आरोपित किया गया था। 2001 में कृष्णागढ़ थाने में डकैती, उसी साल बड़हरा में आर्म्स एक्ट, 2013 में बड़हरा व 2014 में धोबहां में आर्म्स एक्ट, 2016 में पटना के बिहटा में हत्या और 2017 में बड़हरा में आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज किये गये।

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कुछ सफेदपोशों के साथ भी फौजी का था गहरा संबंध

आरा। फौजी का सूबे के कुछ सफेदपोश के साथ भी गहरा संबंध था। इनमें कुछ पूर्व के माननीय भी शामिल थे। बताया जाया है कि फौज से वह एके 47 लेकर भागा था। उसी एके 47 की लालच में कुछ सफेदपोश उसके संपर्क में आये थे। इसे लेकर पूर्व के दो माननीय के बीच विवाद भी हुआ था। एक बार पुलिस के हत्थे चढ़े फौजी ने ही इस बात को स्वीकार किया था। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

परिजन बोले-उच्चस्तीय जांच से होगा हत्या का खुलासा

आरा। फरना गांव निवासी शंकर दयाल सिंह का ननिहाल नेकनाम टोला गांव में है। वह ननिहाल के ही रिश्तेदारों की जमीन मनी पर लेकर खेती करता था। इस साल उसने नेकनाम टोला दियारे के ही डेढ़ सौ बीघा से अधिक खेती योग्य भूमि को मनी पर लेकर खेती शुरू की थी। इस बार पैदावार भी काफी हुई थी। परिवार वालों की मानें तो नेकनाम टोला के सैकड़ों बीघा जमीन पर दबंग टाइप के लोग मनमानी तरीके से खेती करते थे। मालगुजारी की रकम भी जमीन मालिक को नहीं देते थे। पिछले वर्ष से शंकर दयाल सिंह ने अपने ननिहाल के ही लोगों की जमीन को मनी पर ली व समय पर मालगुजारी की रकम भी देने लगा। इसी से कई लोग उससे खार खाए हुए थे। परिजनों ने बताया कि बड़े भाई की हत्या में बालू माफियाओं व सफेदपोशों की भी मिलीभगत हो सकती है। अगर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाये, तो इसका खुलासा भी हो सकता है।

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इलाके में फौजी ने बना ली थी रॉबिनहुड की छवि

आरा। फौजी भले ही पुलिस की नजर में दियारे इलाके का आतंक था, लेकिन उसने इलाके में अपनी छवि रॉबिनहुड की बना ली थी। इलाके के लोगों खासकर किसी लड़की की शादी में काफी मदद करता था। इससे इलाके में उसकी काफी चर्चा होती थी। इलाके में उसका काफी दबदबा भी था। इसी के बल पर उसने एक बार अपनी पत्नी को पंचायत चुनाव जिताने में सफल भी रहा था। बताया जाता है कि उसकी पत्नी 2011 में फरना मध्य से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ी थी। इसमें उन्हें जीत हासिल हुई थी। पिछले पंचायत चुनाव में फौजी ने भी फरना पंचायत से मुखिया के पद पर खड़ा होकर अपना किस्मत आजमाया था। हालांकि उसे हार का सामना करना पड़ा था।

तीन बच्चों के सिर से उठा बाप का साया

आरा। फरना गांव निवासी शंकर दयाल सिंह उर्फ फौजी की हत्या के बाद उसके घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक शंकर दयाल सिंह दो भाइयों में बड़ा था। छोटा भाई कृष्ण दयाल सिंह गांव पर ही रहकर खेती गृहस्ती करते हैं। मृतक के परिवार में उनकी पत्नी विजान्ती देवी, पुत्र नीरज कुमार सिंह, अभिमन्यु कुमार सिंह व पुत्री रानी कुमारी है। तीनों बच्चों में किसी की शादी नहीं हुई है।

फौजी के भाई व बेटों को भी जाना पड़ा था जेल

आरा। फरना निवासी शंकर दयाल सिंह उर्फ फौजी के भाई व बेटों को भी जेल जाना पड़ा था। तीनों को पटना पुलिस ने आर्म्स एक्ट में जेल भेजा था। बात 2016 की है। जानकारी के अनुसार 2016 में पटना के बिहटा इलाके में फौजी व सिपाही गिरोह के बीच फायरिंग हुई थी। उसमें एक व्यक्ति की हत्या कर दी गयी थी। उसके बाद पटना की बिहटा पुलिस द्वारा फौजी की तलाश में उसके घर पर छापेमारी की गयी थी। उस दौरान फौजी के छोटे भाई कृष्ण दयाल सिंह, पुत्र नीरज सिंह व अभिमन्यु सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। इस संबंध में फौजी के छोटे ने पटना पुलिस पर ज्यादती करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि पुलिस उनलोगों को बिना किसी साक्ष्य व हथियार के जबरन उठा ले गयी थी।

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परिजनों की मांग व जाम के कारण आरा में कराया गया पोस्टमार्टम

आरा। फौजी की हत्या के बाद परिजनों की मांग व जाम को देखते हुए आरा सदर अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार घटनास्थल से छपरा जाने वाले रास्ते पर काफी जाम लगा हुआ था। इससे जाने में काफी परेशानी होती। मृतक के परिजन भी शव आरा ले जाने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए शव को आरा सदर अस्पताल लाया गया।

मेडिकल बोर्ड ने किया शव का पोस्टमार्टम

आरा। फरना गांव निवासी शंकर दयाल सिंह उर्फ फौजी के शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों की तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने किया। पोस्टमार्टम के पूर्व सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार सिन्हा के निर्देश पर एक बोर्ड का गठन किया गया। बोर्ड में शामिल डॉ.बीबी शर्मा, डॉ. प्रभात प्रकाश तथा डॉ. आरके मंडल द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया गया।






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