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भोजपुर: पखावज सम्राट स्व. शत्रुंजय प्रसाद सिंह जी की पुण्यतिथि मनी

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पुण्यतिथि पर “ताल तरंग सुर के संग” कार्यक्रम का हुआ आयोजन

खबरें आपकी,आरा। स्थानीय महाजन टोली स्थित आश्रम परिसर में संगीत शिरोमणि बाबू ललन जी के नाम से विख्यात महान पखावज सम्राट स्व. शत्रुंजय प्रसाद सिंह जी के पुण्यतिथि पर “ताल तरंग सुर के संग” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार रंजीत बहादुर माथुर ने दीप प्रज्वलित कर की। मौके पर श्री माथुर ने कहा कि आरा में बाबू ललन जी ने संगीत के स्वर्णिम युग की स्थापना की। इनका योगदान कभी भुलाया नही जा सकता। कथक गुरु बक्शी विकास ने कहा कि ताल शास्त्र के प्रकाण्ड विद्वान बाबू ललन जी की सृजनभूमि आरा संगीतज्ञ के तीर्थ के रुप में जाना गया। लेकिन ऐसी महान शख्सियत के प्रति सरकार व समाज का रवैया हमेशा से उदासीन रहा है। कार्यक्रम में जगदीशपुर से पधारे तबला वादक राणा प्रताप सिन्हा व तबलावादक विनय सिंह की तबला युगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वही शास्त्रीय गायिका बिमला देवी ने राग मियां मल्हार में बंदिश “बरसों घन मोरे पिया घर आये…” ठुमरी “कटे नाहि रतिया तुम बिन बालम… ” व दादरा “अब मान जाओ सैंया…” प्रस्तुत कर समा बांधा। वही कथक नृत्यांगना सुश्री सोनम कुमारी व शुभांशी जैन ने गणेश वंदना, तीन ताल में शुद्ध कथक व ठुमरी प्रस्तुत कर लोगो की वाहवाही लूटी। संचालन रविशंकर व धन्यवाद ज्ञापन अमित कुमार ने किया। हारमोनियम पर संगत रौशन कुमार व गौरव विशाल सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. जया जैन, अरुण सहाय, जयप्रकाश शर्मा, अमित उपाध्याय समेत कई संगीत प्रेमी व संगीत प्रशिक्षु उपस्थित थे।

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