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भगवान वरदराज के उत्सव में कांची पहुंचे पूज्य संत जीयर स्वामी जी महाराज

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चालीस वर्ष बाद तालाब से निकाला गया भगवान की विशाल प्रतिमा जो लकड़ी की बनी हुई है

मंदिर प्रबंधन के अनुसार चालीस वर्ष में एक बार उत्सव मनाया जाता है।

जिसे देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्से से लोग यहां आते हैं।

खबरें आपकी,:- तामिलनाडु के कांची में हिंदी भाषी लोगों का गांव बस गया है। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित विभिन्न राज्य के लगभग 1000 लोग यहां पहुंचे हैं। इस वजह से यहां एक अलग ही नजारा दिख रहा है। भगवा वस्त्र धारण किए इन लोगों की टोली वरदराज भगवान के उत्सव में शामिल होने पहुंची है।

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यहां के प्रमुख मंदिर में वरदाज भगवान का उत्सव चल रहा है। भगवान की विशाल प्रतिमा जो लकड़ी की बनी हुई है। उसे चालीस वर्ष बाद तालाब से निकाला गया हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार चालीस वर्ष में एक बार एक उत्सव मनाया जाता है। जिसे देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्से से लोग यहां आते हैं। भगवान वरदराज के उत्सव में शामिल होने के लिए बिहार से चलककर यहां पूज्य संत जीयर स्वामी जी महाराज पहुंचे हैं। उनके साथ बिहार और उत्तर प्रदेश से लगभग 50 की संख्या में संत महात्मा और एक हजार लोग पहुंचे हैं। इस वजह से यहां एक हिंदी भाषी लोगों का एक अलग गांव ही बस गया है।

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स्वामी जी के शिष्य व चरित्रवन त्रिदण्डी देव समाधी स्थल के महंत अयोध्या नाथ स्वामी ने बताया कि ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी से ही यात्रा प्रारंभ हुई है। रामानुज संप्रदाय से जुड़े धर्मावलबियों का बहुत बड़ा जत्था यहां आया है। जो दक्षिण भारत के विभिन्न तिर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए यहां आया है। यह टीम दस जुलाई के उपरांत उत्सव समाप्ति के बाद पुन: अपने प्रदेश को लौट जायगी।

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