दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा, मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढेगा…

दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा, मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढेगा…

मो.रफी की याद में “तुम मुझे यूं भुला न पाओगे… कार्यक्रम आयोजित

छोटे-बड़े लगभग 20 कलाकारों ने मो.रफी, लता मंगेशकर, आशा भोसले, शमशाद बेगम व साधना सरगम के गीतों को गाया

खबरें आपकी,आरा। नागरी प्रचारिणी सभागार में रविवार की शाम मशहूर पार्श्व गायक मो. रफी की याद में फिल्म संगीत का कार्यक्रम “तुम मुझे यूं भुला न पाओगे…”आयोजित किया गया। व्यू प्वाइंट के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 20 कलाकारों ने सर्वाधिक मो. रफी के अलावा लता मंगेशकर, आशा भोसले, शमशाद बेगम व साधना सरगम के गीतों को प्रस्तुत किया। इसमें बड़ी संख्या रफी साहब के प्रशंसक व श्रोता शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन नवोदित नन्हीं गायिकाएं श्रेया कुमारी, ऋषिका शर्मा व पीहू शर्मा ने संयुक्त रुप से दीप जलाकर किया। वहीं गायक धर्मेन्द्र सिंह, संगीत शिक्षक निजामुद्दीन खां, सुशील सिंह व संगीत प्रेमी इकबाल इल्मी ने मो. रफी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ निजामुद्दीन खां ने तुम मुझे यूं भुला न पाओगे…गीत गाकर किया। तदोपरांत ऋषिशंकर सिंह ने तुम जो मिल गए हो…, हरिआेम ने न फंकार तुझसा तेरे बाद आया…, मो. मनव्वर ने गम उठाने के लिए मैं तो जिए…, प्रत्युष पांडेय ने एक बंजारा गाए…, रीतेश रौशन ने क्या हुआ तेरा वादा…, राजाराम शर्मा ने ओ दुनिया के रखवाले…, श्याम कुमा ने अहसान तेरा होगा मुझपर…, राजा बसंत बहार ने आया रे खिलौने वाला खेल…, कान्हा ओझा ने दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा…, मो. सलाहुद्दीन ने तुझको पुकारे में प्यार…, मो. फैजान ने कोई नजराना लेके आया…, मो. फैज ने हुई शाम उनका ख्याल आ गया…, रमेश कुमार ने मुझे दर्दे दिल का पता…, कैलाश राज ने मैंने पूछा चांद से देखा है कहीं…, प्रियंका तेजस्वी ने बइयां न धरो…, सुनीता पांडेय ने मिले न तुम तो हम घबराए…, श्रेया कुमारी तेरी पनाह में…, जागृति सिंह ने तुझसे नाराज नहीं जिन्दगी…, शफक नायाब ने मिलती है जिन्दगी में मोहब्बत कभी-कभी…, अंजली भारद्वाज ने एक राधा एक मीरा…व तेरे मेरे बीच में कैसा है…, रजनी शाक्या ने छाप तिलक सब छिनी रे तोहसे नैना…, दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए…गाया। धर्मेन्द्र सिंह व अंजली भारद्वाज ने काहे को बुलाया मुझे साजना…, धर्मेन्द्र सिंह व प्रियंका तेजस्वी ने छुप गए सारे नजारे ओय…, जागृति सिंह व धर्मेन्द्र सिंह ने तेरी बिंदिया रे…, रजनी शाक्या व धर्मेन्द्र सिंह ने ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं…, ऋषिका शर्मा व पीहू शर्मा ने कजरा मोहब्बत वाला…, धर्मेन्द्र व शमशाद ने मेरे देश प्रेमियों आपस में….प्रस्तुत किया। वहीं किशोर कुमार की जयंती के अवसर पर मो. लाहुद्दीन व मो. फिरोज ने बने चाहे दुश्मन जमाना… गाना गाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच संचालन के क्रम में कार्यक्रम के संयोजक शमशाद प्रेम ने कहा कि मो. रफी न सिर्फ एक अच्छे गायक थे, बल्कि वे एक अच्छे इंसान भी थे। पद्मश्री समेत अन्य पुरस्कारों से सम्मानित होने के बावजूद उनको कोई घमंड नहीं था। सादगीपूर्ण जीवन गुजारी। हिन्दी, भोजपुरी समेत अन्य भाषाओं में भी लगभग 26 हजार गीत गाए। फिल्म संगीत में उनके योगदान को भुलया नहीं जा सकता। आयोजन को सफल बनाने में इकबाल इल्मी, धर्मेन्द्र सिंह, मो. फैजान, मो. मनव्वर, रमेश कुमार, रीतेश रौशन आदि का सहयोग सराहनीय रहा।



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