सब इंस्पेक्टर मिथिलेश की बहादुरी ही बन गयी उनकी जान की दुश्मन

सब इंस्पेक्टर मिथिलेश की बहादुरी ही बन गयी उनकी जान की दुश्मन

बहादुरी व कार्यशैली को देख दारोगा मिथिलेश को दी गयी एसआईटी की जिम्मेदारी

तबादले के बावजूद मिथिलेश को सारण से नहीं किया जा रहा था विरमित

परिजनों का आरोप: जानबूझ कर नहीं किया जा रहा था विरमित

खबरें आपकी,आरा। भोजपुर के जांबाज दारोगा मिथिलेश की बहादुरी ही उनकी जान की दुश्मन बन गयी। बहादुरी के साथ अपने कर्तव्य को पूरा करने में उसने अपनी जान की बाजी लगा दी। उनकी बहादुरी काम के प्रति ईमानदारी पर भोजपुर को गर्व है। पुरा जिला मिथिलेश को सलामी दे रहा है। नागोपुर गांव के रहने वाले मिथिलेश ने 2009 में सब इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन की थी। उनकी पहली पोस्टिंग सारण के तरैया थाने में हुई थी। वहां वह तीन साल तक रहे। इसके बाद मशरख थाने में बतौर थानाध्यक्ष तीन साल तक काम किया। उसके बाद एकमा और बनियापुर में भी डेढ़ साल थानाध्यक्ष रहे। फिलवक्त छपरा एसआईटी टीम के इंचार्ज थे। जानकारी के अनुसार अपनी करीब दस साल की नौकरी में मिथिलेश कुमार आधिकतर समय सारण में ही रहे। इस दौरान उनकी बहादुरी व कार्यशैली के पुलिस विभाग के सभी सीनियर अफसर कायल थे। अपराधी व बदमाश भी मिथिलेश से खौफ खाते थे। आम पब्लिक के बीच उनकी छवि अच्छी व लोकप्रिय थी। शायद यही कारण था कि तबादले के बाद भी सारण एसपी द्वारा उन्हें विरमित नहीं किया जा रहा था। बताया जाता है कि दारोगा मिथिलेश कुमार का ट्रांसफर समस्तीपुर हो गया था। बावजूद इसके उन्हें सारण में रखा गया था। शहीद मिथिलेश कुमार की प्रारंभिक शिक्षा पिरौंटा सर्वोदय प्लस टू विद्यालय से हुई। मैट्रिक की परीक्षा पिरौंटा हाई स्कूल से पास की थी। इंटर व स्नातक आरा महाराजा कॉलेज से किया। इधर, परिजनों का आरोप है कि मिथिलेश को जान बुझकर विरमित नहीं किया जा रहा था। परिजनों की मानें तो ट्रांसफर कर दिया गया होता, तो यह घटना नहीं होती।

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परिवार के अधिकांश सदस्य पुलिस सेवा में, बड़े भाई की ड्यूटी के दौरान हुई थी मौत

आरा। जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नागोपुर गांव निवासी मिथिलेश कुमार पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे। उनका परिवार वर्ष 2004 से मझौंवा बांध स्थित देवनगर मोहल्ले में रहता है। जानकारी के अनुसार मिथिलेश के परिवार के अधिकतर सदस्य पुलिस सेवा में हैं। पिता दहरथ साह आर्मी से रिटायर होने के बाद आरपीएफ में सब इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन कर ली थी। वर्ष 2009 में आरपीएफ की सेवा से भी रिटायर हो गये थे। शहीद मिथिलेश के बड़े भाई प्रदीप कुमार साह बिहार पुलिस में नौकरी करते थे। वर्ष 2004 में उनकी मौत ड्‌यूटी के दौरान हो गई थी। मांझिल भाई उपेंद्र कुमार भी बीएमपी मुजफ्फरपुर में हैं। तीसरा भाई धर्मेंद्र कुमार साह शिक्षक है, जबकि छोटा भाई संजय कुमार गुप्ता भी बिहार पुलिस का जवान है। वर्तमान में वह कैमूर एसपी अॉफिस में पोस्टेड है। चाचा सरोज कुमार भी बीएमपी में नौकरी करते हैं।

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गोद भरने से पहले ही उजड गया प्रियंका का सुहाग

आरा। नागोपुर गांव निवासी दारोगा मिथिलेश कुमार की शादी 2014 में कोईलवर थाना क्षेत्र के पचैना गांव की प्रियंका के साथ हुई थी। हालांकि अब तक उनको कोई संतान नहीं हुआ था। ऐसे में मातृत्व सुख मिलने से पहले ही प्रियंका का सुहाग भी उजड़ गया। पति की शहादत की खबर से उसकी भी हालत खराब है। शहीद दारोगा की तीन बहन हैं। इनमें बबीता देवी, अनीता देवी व संगिता देवी है। तीनों बहनों की शादी हो चुकी है।

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