संगीत शिरोमणि शत्रुंजय प्रसाद सिंह के आवाज का दुर्लभ रिकॉर्डिंग का हुआ लोकार्पण

संगीत शिरोमणि शत्रुंजय प्रसाद सिंह के आवाज का दुर्लभ रिकॉर्डिंग का हुआ लोकार्पण

शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एण्ड म्यूजिक के तत्वाधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम

खबरें आपकी,आरा। स्थानीय शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एण्ड म्यूजिक के तत्वाधान में “वाद्य-वादन” संगोष्ठी आयोजित कर 20वीं सदी के महान पखावज वादक बाबू ललन जी के नाम से विख्यात संगीत शिरोमणि शत्रुंजय प्रसाद सिंह के आवाज का अति दुर्लभ रिकॉर्डिंग का लोकार्पण किया गया। इस संगोष्ठी का उद्घाटन साहित्यकार रंजीत बहादुर माथुर ने किया। संगोष्ठी में कथक नृत्यांगना ने मुख्य अतिथि रंजीत बहादुर माथुर समेत अन्य अतिथियों का अभिनंदन पौधा देकर किया। श्री माथुर ने कहा कि बाबू ललन जी का निधन सन 1960 में हुआ। तब से लेकर आजतक ललन जी के सांगीतिक जीवन के विषय में कुछ खास संग्रह भोजपुर में नही होना चिन्तनीय है। कथक गुरु विकास के शोध कार्यों की बदौलत आज की पीढ़ी में बाबू ललन जी की लोकप्रियता बढ़ी है। वहीं आचार्य चंदन ठाकुर ने कहा कि बाबू ललन जी का वादन शैली ओजपूर्ण रहा है। वे तालशास्त्र के प्रकाण्ड विद्वान थे। गुरु बक्शी विकास ने कहा कि बाबू ललन जी आरा के गौरव हैं। ललन जी संगीत के पाठ्यक्रमों में उल्लेखनीय है। इस अवसर पर आचार्य चंदन ठाकुर ने स्वतंत्र तबला वादन में बाबू ललन जी की कई रचनाओं को सुनाकर तालियां बटोरी। संचालन सुश्री शुभांशी जैन व धन्यवाद ज्ञापन सूरज कान्त पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर पंडित राधेश्याम तिवारी, कथक नर्तक अमित कुमार, हर्षिता विक्रम, रोहित कुमार व अन्य उपस्थित थे।






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