गायन वादन व नृत्य के संगम की बही सांगीतिक धारा

गायन वादन व नृत्य के संगम की बही सांगीतिक धारा

विश्व संगीत दिवस पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन

खबरें आपकी,आरा(डॉ. के कुमार)। सांस्कृतिक संस्था ‘आश्रम’ और राष्ट्रीय सेवा योजना, एसबी कॉलेज के तत्वाधान में विश्व संगीत दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानाचार्य डॉ. ओपी अग्रवाल, शास्त्रीय संगीत गायिका बिमला देवी, संयोजक अमित कुमार और सुधांशु मिश्रा ने संयुक्त रुप से किया। इस अवसर पर डॉ. अग्रवाल ने कहा की संगीत मानव जीवन में संस्कार को निर्मित करता है।

कथक नर्तक बक्शी विकास ने कहा कि संगीत आत्मसाक्षात्कार का सशक्त मार्ग है। संगीत, साधना और उपासना का प्रतिबिंब है। इस अवसर पर बिमला देवी ने राग भैरवी में झपताल की बंदिश “भवानी दयानी महावा की वाणी” तीनताल की बंदिश “कैसी ये भलाई रे कन्हाई पनिया भरत मोरी गगरी गिरायी” दादरा “कोई कह दें सांवरियां से आया करे” को प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वही सूरजकान्त पाण्डेय और अनुभव रंजन ने तबले की युगलबंदी में उठान, कायदा, ठेके की बढ़त, टुकड़ा, परन, तिहाई, रेला इत्यादि प्रस्तुत कर समा बांधा। गुरु बक्शी विकास की यशस्वी शिष्या कथक नृत्यांगना सुश्री शालिनी ने ताल पंचम सवारी में शुद्ध कथक प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। युवा गायक रोहित कुमार ने प्रचलित ठुमरी “याद पिया की आये ये दुख सहा न जायें” व ग़ज़ल प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। हारमोनियम पर रौशन कुमार ने बखूबी संगत किया। संचालन बक्शी विकास व धन्यवाद कथक नर्तक राजा कुमार ने किया।


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