Bhojpuri Piria painting: भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग भोजपुर अंचल की पारंपरिक लोक चित्रकला है, जिसका आधार भोजपुरी संस्कृति का पीड़िया पर्व है।
- हाइलाइट: Bhojpuri Piria painting
- नेशनल हैंडलूम डे 2026 पर भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग, बावनबूटी एवं पत्थरकट्टी कला को जीआई प्रमाण-पत्र प्रदान
आरा। नेशनल हैंडलूम डे 2026 के अवसर पर बिहार की समृद्ध लोककला एवं पारंपरिक शिल्प विरासत को सम्मानित करते हुए आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में हाल ही में जीआई टैग प्राप्त तीन पारंपरिक कलाओं के प्रमाणपत्र संबंधित संस्थाओं को प्रदान किए गए। सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग के लिए सर्जना न्यास, नालंदा की बावनबूटी के लिए बासवान बिगहा प्राइमरी वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी तथा गया की पत्थरकट्टी पाषाण कला के लिए आशीर्वाद स्टोन हैंडीक्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को जीआई प्रमाणपत्र प्रदान किया।
Bhojpuri Piria painting : पीड़िया पेंटिंग भोजपुर क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बनी
भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग भोजपुर अंचल की पारंपरिक लोक चित्रकला है, जिसका आधार भोजपुरी संस्कृति का पीड़िया पर्व है। भाई-बहन के स्नेह, मंगलकामना और दीर्घायु से जुड़े इस लोकपर्व में कुंवारी कन्याएँ दीपावली एवं गोवर्धन पूजा के बाद सवा महीने तक घरों की दीवारों पर गोबर, धान, चावल तथा प्राकृतिक रंगों से पारंपरिक चित्रांकन करती हैं। इसी लोक परंपरा से विकसित पीड़िया पेंटिंग आज भोजपुर क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।
इसी प्रकार नालंदा की बावनबूटी बिहार की प्राचीन हथकरघा बुनाई कला है, जिसमें सूती एवं रेशमी वस्त्रों पर हाथ से 52 प्रकार की पारंपरिक बूटियों का कलात्मक संयोजन बुना जाता है। वहीं गया की पत्थरकट्टी पाषाण कला लगभग 300 वर्ष पुरानी शिल्प परंपरा है, जो स्थानीय काले ग्रेनाइट पत्थरों पर उत्कृष्ट नक्काशी और मूर्तिकला के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
पटना के मौर्यलोक परिसर में तीन दिवसीय हैंडलूम प्रदर्शनी
इस अवसर पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा पटना के मौर्यलोक परिसर में तीन दिवसीय हैंडलूम प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी के.वी. ने किया। प्रदर्शनी में हाल ही में जीआई टैग प्राप्त तीनों संस्थाओं को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनके उत्पादों के प्रदर्शन एवं विपणन के लिए स्टॉल उपलब्ध कराए गए।
प्रदर्शनी में सर्जना न्यास, बासवान बिगहा प्राइमरी वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी, आशीर्वाद स्टोन हैंडीक्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के अलावा ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया, रंग शिल्पी हैंडीक्राफ्ट (दरभंगा), जय माता दी जीविका स्वयं सहायता समूह (समस्तीपुर), केजीएन सिल्क (बांका), रेपो (भागलपुर), रंतो हैंडीक्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (मधुबनी), मुन्ना टसर सिल्क(नवादा) तथा भोजपुरिया क्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (भोजपुर) समेत 11 संस्थाओं एवं शिल्पकारों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया।
उत्पादों का अवलोकन:
प्रदर्शनी में लोककलाओं एवं हस्तशिल्प से जुड़े विविध उत्पाद-भोजपुरी पीड़िया पेंटिंग, बावनबूटी वस्त्र, पत्थर की कलात्मक मूर्तियाँ, मधुबनी पेंटिंग, हस्तनिर्मित खिलौने, साड़ियाँ, चादरें, दुपट्टे, बैग एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पाद-आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बड़ी संख्या में आगंतुक स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन कर रहे हैं।
नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम बिहार की पारंपरिक लोककलाओं, हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प को राष्ट्रीय पहचान प्रदान करने तथा स्थानीय शिल्पकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जीआई टैग प्राप्त इन कलाओं को प्रोत्साहन मिलने से न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय कलाकारों एवं बुनकरों के लिए नए बाजार और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

