Professor Kanhaiya Bahadur: आरा। समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि प्रोफेसर कन्हैया बहादुर आरा शहर के सार्वजनिक जीवन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। शहर में कोई भी कार्यक्रम या समारोह होता, तो उन्हें आदर के साथ आमंत्रित किया जाता था। उनका घर भी एक तरह से उनके सार्वजनिक जीवन का ही विस्तार था। वहाँ अलग-अलग विचारधाराओं के लोग जुटते थे। गर्मागर्म चाय के साथ गर्मागर्म बहसें होती थीं। उनके धैर्य और उनके परिवार की सहनशीलता का एक उदाहरण मुझे हमेशा याद रहेगा।
जब बशिष्ठ नारायण सिंह आरा से चुनाव लड़ रहे थे, तब कन्हैया बहादुर (Professor Kanhaiya Bahadur) का घर ही उनका चुनाव कार्यालय बन गया था। चुनाव कार्यालय का मतलब लगातार लोगों का आना-जाना, भागदौड़ और आपाधापी। ऐसे माहौल को अपने पारिवारिक घर में सहजता से स्वीकार करना और पूरे परिवार का उसे निभा लेना कोई साधारण बात नहीं थी। यह कन्हैया जी और उनके परिवार के बड़े दिल का परिचय था।
प्रो. कन्हैया बहादुर के निधन पर मैं उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और शोक की इस घड़ी में उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ।
इधर, आरा सिविल कोर्ट के वरीय अधिवक्ता विद्या निवास सिंह उर्फ दीपक सिंह ने कहा कि गुरुदेव प्रो. कन्हैया बहादुर सिन्हा अब इस दुनिया में नहीं रहें। उनके निधन से हम-सब मर्माहत है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। छात्र जीवन से लेकर अधिवक्ता जीवन तक उनकी राय मेरे लिए सर्वोपरि रहा हैं। हर संकट में उन्होंने ने हमें हिम्मत व ज्ञान से परिपूर्ण किये, उनकी ख्याति कभी भी कम नहीं रहेगा।

