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डूबने लगा डायवर्सन: फिर संकट में शाहपुर-बनाही स्टेशन रोड

Shahpur-Banahi Station Road: जीवनरेखा पर संकट का साया: शाहपुर-बनाही मार्ग पर उफनती छेर नदी ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें

  • हाइलाइट: Shahpur-Banahi Station Road
  • फिर डूबने लगा डायवर्सन, शाहपुर-बनाही स्टेशन रोड, शाम तक पूरी तरह कट सकता है संपर्क
  • तीन राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाला अहम मार्ग संकट में, डायवर्सन पर उफनाई छेर नदी
  • वर्षा ने बढ़ाई मुश्किलें, रुद्रनगर डायवर्सन पर चढ़ा पानी, छात्रों व ग्रामीणों की सांसें अटकी
  • 12 दिन बाद बहाल हुई सड़क फिर संकट में, छेर नदी के बढ़ते जलस्तर से आवागमन पर खतरा

आरा। भोजपुर जिले में छेर नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण शाहपुर-बनाही स्टेशन रोड एक बार फिर बंद होने के मुहाने पर खड़ा है। तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों—एनएच-922, एनएच-84 और एनएच-30—को आपस में जोड़ने वाली यह सड़क क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक धुरी मानी जाती है। किंतु, वर्तमान में यह मार्ग छेर नदी की उफनती जलधारा के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहा है। रुद्रनगर गांव के समीप निर्मित अस्थायी डायवर्सन पर पानी का बढ़ता दबाव न केवल यातायात के लिए खतरा बन गया है, बल्कि स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन को भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

Shahpur-Banahi Station Road : शाम तक पैदल आवाजाही भी पूर्णतः बंद हो जाएगी

गुरुवार को स्थिति उस समय और अधिक भयावह हो गई, जब नदी का जलस्तर बढ़ने से डायवर्सन के ऊपर करीब दो फीट पानी बहने लगा। पानी का यह तेज बहाव न केवल वाहनों के लिए खतरनाक है, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि टेंपो समेत अन्य छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो चुका है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्कूली बच्चे अपनी शिक्षा को जारी रखने के लिए जान जोखिम में डालकर इस पानी से भरी सड़क को पार करने को मजबूर हैं। यदि नदी के जलस्तर में वृद्धि की यही गति बनी रही, तो आशंका है कि शाम तक पैदल आवाजाही भी पूर्णतः बंद हो जाएगी।

एक सप्ताह पूर्व करीब 12 दिनों तक आवागमन बाधित था

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस मार्ग ने अपना अस्तित्व खोया है। महज एक सप्ताह पूर्व भी छेर नदी के रौद्र रूप ने इसी डायवर्सन को पूरी तरह बहा दिया था। उस समय स्थानीय लोगों के सहयोग और ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा भारी मशक्कत करते हुए कई ट्रॉली ईंट के टुकड़े, रोड़े और ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी तौर पर रास्ता बहाल किया गया था। विदित रहे की इस दौरान करीब 12 दिनों तक आवागमन बाधित रहा था, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को भारी आर्थिक नुकसान और असुविधा का सामना करना पड़ा था। अब पुनः वही हलात दोहराए जाने का भय क्षेत्रवासियों को सता रहा है।

इस मार्ग का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि यह शाहपुर को बनाही रेलवे स्टेशन के माध्यम से प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ता है। इस संपर्क मार्ग के बाधित होने से केवल आवागमन ही प्रभावित नहीं हो रहा है, बल्कि क्षेत्र के किसानों का कृषि कार्य, मरीजों का समय पर अस्पताल पहुंचना और छात्रों का स्कूल जाना भी दुष्कर हो गया है। कृष्णाकांत सिंह और मुन्ना तिवारी जैसे जागरूक ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि अब इस सड़क से गुजरना किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है। अस्थायी व्यवस्थाएं बार-बार विफल साबित हो रही हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थायी पुल के निर्माण होने तक पीपा पुल बनाने की मांग

क्षेत्रीय निवासियों का एक बड़ा वर्ग अब प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहा है। बार-बार बह जाने वाले मिट्टी और ईंट के डायवर्सन के स्थान पर एक मजबूत और स्थायी पीपा पुल का निर्माण ही इस समस्या का एकमात्र दीर्घकालिक उपाय है। ग्रामीणों का तर्क है कि जब तक स्थायी पुल नहीं बनता, तब तक पीपा पुल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

फिलहाल, छेर नदी की बढ़ती जलधारा और डायवर्सन पर पड़ता अत्यधिक दबाव चिंता का विषय है। छेर नदी का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे अगले कुछ घंटों में इस मार्ग का संपर्क पूरी तरह टूटने की आशंका गहरा गई है।

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