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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता बोले भरत तिवारी की हत्या सोची-समझी साजिश

Advocate Sanjeev Kumar: सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस पूरे मामले की परतें खोली हैं।

  • हाइलाइट: Advocate Sanjeev Kumar
  • साक्ष्यों और कानूनी कार्यवाही का विस्तृत विवरण

आरा। बिहार के चर्चित भरत तिवारी हत्याकांड ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस पूरे मामले की परतें खोली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी की हत्या मात्र एक अपराध नहीं, बल्कि 1400 करोड़ रुपये के उस महाघोटाले को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है, जिसका पर्दाफाश स्वयं भरत तिवारी कर रहे थे।

अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि वे इस मामले को शुरुआत से ही कानूनी रूप से देख रहे हैं। एफआईआर संख्या 178/2026 के दर्ज होने के बावजूद, लंबे समय तक केवल एक आरोपी अक्षय कुमार की गिरफ्तारी ही हो पाई है। मैंने जब राष्ट्रपति कार्यालय का दरवाजा खटखटाया, तब मुख्य सचिव और पुलिस मुख्यालय के आदेश पर पटना के डिविजनल कमिश्नर द्वारा आंतरिक जांच कराई गई। इस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे अत्यंत चौंकाने वाले हैं।

Advocate Sanjeev Kumar : 15 मिनट बाद गाड़ी में ले जाकर दो अन्य गोलियां दागी गईं

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 17 जून को की गई भरत तिवारी की हत्या पूरी तरह से सुनियोजित थी। इसमें पुलिस के उच्चाधिकारियों से लेकर स्थानीय स्तर के आपराधिक प्रवृत्ति के नेताओं और एसडीएम तक की संलिप्तता के ठोस सबूत मिले हैं। अधिवक्ता ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बैलिस्टिक टेस्ट ने इस साजिश को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। बैलिस्टिक रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई है कि घटनास्थल पर मौजूद सभी लोगों के हथियारों से फायरिंग की गई थी। इसके अतिरिक्त, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि भरत तिवारी को पहले तीन गोलियां मारी गईं, और जब वे जीवित थे, तो साक्ष्य मिटाने और हत्या सुनिश्चित करने के लिए 15 मिनट बाद गाड़ी में ले जाकर दो अन्य गोलियां दागी गईं। यह क्रूरता स्पष्ट रूप से इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी में खड़ा करती है।

हत्याकांड के पीछे का मुख्य कारण 1400 करोड़ रुपये का घोटाला

अधिवक्ता ने बताया की इस हत्याकांड के पीछे का मुख्य कारण 1400 करोड़ रुपये का घोटाला है, जो जवइनिया गांव के विस्थापितों के कल्याण के लिए आवंटित धन था। भरत तिवारी ने जब इस घोटाले को सार्वजनिक करने का साहस दिखाया, तो घोटालेबाजों ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करते हुए एक षड्यंत्र रचा। यहां तक कि घटना के एक दिन पूर्व 16 तारीख से ही इसकी प्लानिंग शुरू कर दी गई थी। अधिकारियों द्वारा पटना एसटीएफ को गलत रिपोर्ट भेजकर गुमराह करना उनकी मिलीभगत का एक और बड़ा सबूत है।

घोटाले और हत्या के मुख्य सूत्रधार

कानूनी कार्यवाही के संदर्भ में, अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि आरा कोर्ट में प्रक्रिया तेज कर दी गई है। नामित अपराधियों के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही, वे सभी अधिकारी और साजिशकर्ता, जिनके नाम एफआईआर में नहीं हैं, लेकिन जो इस घोटाले और हत्या के मुख्य सूत्रधार हैं, उनकी गिरफ्तारी और उन्हें सेवा से बर्खास्त कराने के लिए भी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।

अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी के परिवार का दुख अपूरणीय है और कुछ तत्व मीडिया में भ्रामक जानकारियां फैलाकर इस मामले को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और दोषियों को फांसी की सजा तक पहुंचाना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य है। कानूनी दृष्टांतों जैसे बच्चन सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ पंजाब है, चोपड़ा चिल्ड्रन मर्डर केस है, रणवीर सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ उत्तराखंड है, कहर सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ पंजाब है, करतार सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ राजस्थान है, धनंजय चटर्जी केस वर्सेस स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल है, जो कि रेअरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में आता है और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो ट्रस्ट वाला पर्सन होता है जैसे कि पुलिस वाले ट्रस्ट पर्सन होते हैं। पुलिस का काम है रक्षा करना। अधिवक्ता ने कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की मांग और भी गंभीर हो जाती है।

सत्ता और भ्रष्टाचार के संरक्षण में किया गया जघन्य अपराध

अधिवक्ता ने कहा की वर्तमान में, मुख्य सचिव और डिविजनल कमिश्नर के कार्यालयों में जमा किए गए दस्तावेजी साक्ष्य, डिजिटल सबूत और सीडीआर रिपोर्ट इस केस की नींव हैं। ये साक्ष्य इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि सत्ता और भ्रष्टाचार के संरक्षण में किया गया एक जघन्य अपराध है। अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक कि शहीद भरत तिवारी के हत्यारे फांसी के फंदे तक न पहुंच जाएं और घोटाले का पूरा सच देश के सामने न आ जाए।

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