Bhojpur new DM Action: भोजपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और जनहित के कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मनेश कुमार मीणा ने सख्त और अनुकरणीय कदम उठाया है।
हाइलाइट: Bhojpur new DM Action
भोजपुर डीएम का बड़ा एक्शन, नगर आयुक्त, DAO, DSO समेत 13 अधिकारियों का वेतन रोका
आरा। सरकारी दायित्वों के प्रति उदासीनता और ड्यूटी से नदारद रहने वाले अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी मनेश कुमार मीणा ने 13 प्रमुख अधिकारियों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस अप्रत्याशित कार्रवाई ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जिलाधिकारी ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कामकाज में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Bhojpur new DM Action: राशन कार्ड और फार्मर रजिस्ट्री में जिले की स्थिति बेहद खराब
विगत दिनों विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठकों के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति अत्यंत निराशाजनक है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। कृषि विभाग के फार्मर रजिस्ट्री कार्यों की समीक्षा के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नीरज कुमार द्वारा तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफलता दर्ज की गई। उनकी इस लापरवाही का परिणाम यह हुआ कि फार्मर रजिस्ट्री के मामले में भोजपुर जिला राज्य स्तर पर पिछड़ गया है। इसी प्रकार, आपूर्ति विभाग की समीक्षा में डीएसओ विनय कुमार की उपस्थिति में जो तथ्य सामने आए, वे और भी चिंताजनक थे। 11,503 नए राशन कार्ड आवेदनों के सापेक्ष मात्र 58 राशन कार्डों का निर्गमन होना विभागीय कार्यकुशलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
बिना छुट्टी लिए ही जिला मुख्यालय से गयब
प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि महत्वपूर्ण निबंधन कार्यों की समीक्षा के लिए जब जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तलब किया, तो आरा के जिला सहायक निबंधन पदाधिकारी संजय कुमार, पीरो की अवर निबंधक महजवी और जगदीशपुर के अवर निबंधक सादाब आजम कार्यालय से अनुपस्थित पाए गए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ये सभी अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के मुख्यालय से गायब थे। इन पांच वरीय पदाधिकारियों की घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने उनका वेतन आगामी आदेश तक बंद कर दिया है और उनसे दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, उन्हें चेतावनी दी गई है कि क्यों न उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा उच्चाधिकारियों से की जाए।
पर्व के दिन जिला नियंत्रण कक्ष बंद रहा
इस प्रशासनिक औचक निरीक्षण का सबसे स्तब्ध कर देने वाला पहलू ईद के दिन जिला नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण रहा। पर्व के अवसर पर जिला नियंत्रण कक्ष का सक्रिय रहना अनिवार्य था, परंतु जिलाधिकारी के निरीक्षण में नियंत्रण कक्ष पूरी तरह से बंद पाया गया। नगर आयुक्त अंजू कुमारी सहित तैनाती पर लगे अधिकांश पदाधिकारी अपने कर्तव्य स्थल से गायब थे। इस सूची में कार्यपालक दंडाधिकारी कलावती कुमारी, अवर सांख्यिकी पदाधिकारी मनेंद्र कुमार, आरा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी तनुजा पाठक, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी विकास कुमार व रजनीश कुमार, खान निरीक्षक राज गौरव और आरा शहरी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रंजन सिंह का नाम शामिल है। इन सभी से 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया गया है और अगले आदेश तक वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
बेलगाम हो चुके थे अधिकारी
भोजपुर जिले में वर्षों से चली आ रही ढुलमुल प्रशासनिक संस्कृति में यह कार्रवाई एक बड़े बदलाव का संकेत है। पूर्व के वर्षों में औचक निरीक्षण और कठोर समीक्षाओं के अभाव में अधिकारी बेलगाम हो चुके थे, जिससे आम नागरिकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। कई अधिकारी जिला या प्रखंड मुख्यालय में उपस्थित रहने के बजाय राज्य मुख्यालय या अपने निजी आवासों से ही दायित्वों का निर्वहन करने की आदत डाल चुके थे।
सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम
जिलाधिकारी की यह कठोर पहल केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। आम जनता की यह अपेक्षा है कि इसी प्रकार की गहन समीक्षा और औचक निरीक्षण का दौर जिला मुख्यालय से लेकर अनुमंडल, प्रखंड और पंचायत स्तर तक निरंतर जारी रहना चाहिए। जब तक प्रशासनिक तंत्र में उत्तरदायित्व और जवाबदेही की संस्कृति को पूर्णतः लागू नहीं किया जाएगा, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएगा।

