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बक्सर बाढ़ नियंत्रण टेंडर पर सीएम सचिवालय सख्त, जांच के निर्देश

Buxar flood control tender: बक्सर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की अल्पकालीन निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय के संज्ञान में आ गई है।

  • हाइलाइट: Buxar flood control tender
  • बाढ़ नियंत्रण टेंडर पर घिरी एजेंसी, सीएम सचिवालय ने मांगा जवाब
  • शाहपुर की पूर्व विधायक मुन्नी देवी की शिकायत पर जांच के निर्देश

आरा। बक्सर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री सचिवालय ने सख्त रुख अपनाते हुए जल संसाधन विभाग से जवाब और जांच की रिपोर्ट मांगी है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद न केवल संबंधित एजेंसी, बल्कि विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बक्सर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की अल्पकालीन निविदा सूचना संख्या-02/2025-26 (एजेंडा संख्या-244/30/2026) के तहत कराए जा रहे कार्यों में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। शाहपुर की पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने 8 जून 2026 को मुख्यमंत्री को एक लिखित आवेदन देकर दावा किया कि निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और एक चयनित एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई। पूर्व विधायक के इस आवेदन के आधार पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले को गंभीर मानते हुए जल संसाधन विभाग को पत्राचार के माध्यम से निर्देशित किया है कि वह पूरे प्रकरण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।

Buxar flood control tender : इन्द्रवीर कुमार के हस्ताक्षर से जांच आदेश जारी

मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से यह पत्र विशेष कार्य पदाधिकारी (ओएसडी) इन्द्रवीर कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिकायत को विभाग के पास भेजते हुए आवश्यक जांच कराकर तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, जांच के उपरांत जो भी कार्रवाई की जाए, उसकी जानकारी मुख्यमंत्री सचिवालय व पूर्व विधायक को अनिवार्य रूप से दी जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शिकायत की अनदेखी न हो और प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। सचिवालय के इस कदम को प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि बाढ़ नियंत्रण जैसे जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा।

अपने आवेदन में पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने आरोप लगाया है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा निविदा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि टेंडर निष्पादन के दौरान चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा। उन्होंने यह भी मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या निष्पक्ष स्तर पर कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि कहीं गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान तय हो सके।

पूर्व विधायक द्वारा सात बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है

पूर्व विधायक ने अपनी शिकायत को अधिक मजबूती देने के लिए सात बिंदुओं पर विस्तृत आपत्ति दर्ज कराई है। इन बिंदुओं में चयनित एजेंसी के अनुभव प्रमाणपत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) की सत्यता और उसकी वैधता, पहले कराए गए कार्यों की गुणवत्ता, तथा समय पर कार्य पूरा करने का रिकॉर्ड जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने एजेंसी के जीएसटी रिटर्न और वित्तीय दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए हैं, यह आशंका जताते हुए कि कहीं कागजी औपचारिकताओं के सहारे पात्रता दिखाकर अनुचित तरीके से चयन तो नहीं करा लिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि टेंडर के दौरान जरूरी दस्तावेजों की जांच-पड़ताल जितनी कठोर होनी चाहिए थी, उतनी नहीं की गई।

पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने प्राक्कलन (एस्टिमेट) से संबंधित कथित बदलावों पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि कार्यों के लागत अनुमान या तकनीकी विवरण में परिवर्तन किए गए, निविदा दस्तावेजों में विसंगतियों और तकनीकी मानकों के पालन न होने की बात भी उठाई गई है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी शर्तों, गुणवत्ता मानकों और निर्धारित प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर काम कराया जा रहा है तो इससे बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा और भविष्य में तटबंध, कटावरोधी कार्य या सुरक्षा उपाय अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे।

बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य अत्यंत संवेदनशील होते हैं: मुन्नी देवी

शिकायत में सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है। पूर्व विधायक के मुताबिक जब नियमों का पालन नहीं होता और प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रहती, तो यह संभावना बढ़ जाती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग सही तरीके से न होकर किसी खास पक्ष के हित में हो। उन्होंने यह भी कहा है कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य अत्यंत संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इसका संबंध सीधे जनता की सुरक्षा, खेतों की रक्षा, घरों और बुनियादी ढांचे को बचाने से है। ऐसे में काम की गुणवत्ता और सही एजेंसी का चयन केवल तकनीकी मसला नहीं, बल्कि जनहित का बड़ा विषय है।

मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश के बाद अब जल संसाधन विभाग के लिए आवश्यक हो गया है कि वह इस मामले की बिंदुवार जांच कर तथ्य सामने लाए। विभाग को यह देखना होगा कि निविदा प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं, दस्तावेजों की सत्यता और पात्रता शर्तों का आकलन ठीक से किया गया या नहीं, तथा चयनित एजेंसी को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

बक्सर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की निविदा प्रक्रिया सवालों के घेरे में

इस घटनाक्रम से बक्सर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की निविदा प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि बाढ़ नियंत्रण कार्यों में समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं, इसलिए इस बार सचिवालय स्तर से निगरानी बढ़ने के बाद कार्रवाई की उम्मीद भी बढ़ गई है। वहीं विभागीय अधिकारियों के बीच भी हलचल है, क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े निर्देशों को आम तौर पर प्राथमिकता के साथ पूरा करना पड़ता है। माना जा रहा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान निविदा से जुड़े रिकॉर्ड, तकनीकी फाइलें, नोटशीट, तुलना पत्र (कम्पैरिजन स्टेटमेंट) और पात्रता दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जाएगी।

निविदा प्रक्रिया की जांच अब उच्च स्तर पर

फिलहाल, मुख्यमंत्री सचिवालय के हस्तक्षेप के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बक्सर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की निविदा प्रक्रिया की जांच अब उच्च स्तर पर होने जा रही है। पूर्व विधायक मुन्नी देवी की शिकायत ने प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है और अब सभी की नजरें जल संसाधन विभाग की जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से होती है, तो इससे बाढ़ नियंत्रण जैसे जरूरी कामों में जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

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