Marchia Dera: भोजपुर जिले के दियारा क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। शाहपुर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जिससे हजारों एकड़ में लगी फसलें तबाह होने की आशंका है।
- हाइलाइट्स:
- प्रत्येक बाढ़ के मौसम में, गंगा का उफनता हुआ पानी इस अधूरे तटबंध के दरार से पूरे दियारा क्षेत्र में फैलता है
- किसानों की करोड़ों रुपये की फसलें नष्ट हो जाती हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों के लिए कभी यह मुद्दा नहीं रहा
बिहार (आरा)। गंगा नदी के किनारे बक्सर से कोईलवर तक बाढ़ से सुरक्षा को लेकर निर्मित तटबंध दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा है। प्रत्येक बाढ़ के मौसम में सैकड़ों विस्थापित परिवारों को यह आश्रय देता है। लेकिन, विडंबना है कि लगभग 40 वर्षों से भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड में मरचइया डेरा गांव के निकट एक अधूरा तटबंध न केवल स्थानीय निवासियों के लिए खतरा बना हुआ है, बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। प्रत्येक बाढ़ के मौसम में, गंगा का उफनता हुआ पानी इस दरार से होकर लगभग 22,000 एकड़ कृषि भूमि में फैल जाता है, जिससे करोड़ों रुपये की फसलें नष्ट हो जाती हैं।
Marchia Dera : स्लुइस गेट के नाम पर लगभग 40 वर्षों से अटका अधूरा तटबंध
लालू के डेरा पंचायत अंतर्गत मरचइया डेरा के समीप अधूरा तटबंध दियारा क्षेत्र के किसानों और निवासियों के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जो हर साल बाढ़ के डर में जीते हैं और अपनी आजीविका खो देते हैं। स्लुइस गेट के नाम पर लगभग 40 वर्षों से अटके इस अधूरे तटबंध ने स्थानीय समुदायों को असीम कष्ट दिए हैं। वर्ष, 2003, 2013, 2016, 2019,2021और 2024 में आई भीषण बाढ़ के बावजूद जनप्रतिनिधियों ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को नजर अंदाज किया है। जिससे मूलभूत समस्या अभी भी अनसुलझी है।
शिक्षाविद मुक्तेश्वर मिश्र ने कहा की इस दिशा में ठोस कदम उठाना न केवल किसानों और उनके परिवारों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। संबंधित अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से लें और स्लुइस गेट का निर्माण पूरा हो इसके लिए आवश्यक कदम उठाये, ताकि स्थानीय समुदायों को बाढ़ से सुरक्षा मिल सके।


