Homeबिहारबक्सरकिला मैदान, बक्सर की सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन है- सांसद

किला मैदान, बक्सर की सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन है- सांसद

Kila Maidan Buxar : बक्सर के किला मैदान की बदहाली पर सांसद सुधाकर सिंह ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए शासन-सता को आईना दिखाने का काम किया है।

jay kumar
  • हाइलाइट: Kila Maidan Buxar
  • बक्सर के किला मैदान की बदहाली और शासन की उदासीनता पर सांसद ने उठाय सवाल

24 मई, बक्सर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बक्सर आगमन हुआ। इस दौरे के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने बक्सर के सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल, किला मैदान की बदहाल स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए शासन-सता को आईना दिखाने का काम किया है।

सांसद सुधाकर सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर शहर के हृदयस्थल माने जाने वाले ऐतिहासिक किला मैदान में लैंड नहीं कर सका। इस असफलता का कारण कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि वर्षों से मैदान में जमी धूल, मिट्टी और बदहाल व्यवस्था है। यह स्थिति बक्सर की उस सच्चाई को उजागर करती है जिसे आम जनता तो वर्षों से झेल रही है, लेकिन शायद आज पहली बार सत्ता की नजर उस धूल पर पड़ी है जिसे बक्सर के नागरिक अपने फेफड़ों में भरने के लिए मजबूर हैं।

Kila Maidan Buxar: हर वर्ष ऐतिहासिक रामलीला का गवाह

किला मैदान केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह बक्सर की सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन है। यह वह स्थान है जहां प्रतिदिन हजारों बुजुर्ग अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए टहलते हैं, युवा अपनी फिटनेस के लिए दौड़ लगाते हैं, और महिलाएं व बच्चे व्यायाम के लिए पहुंचते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उन आम नागरिकों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वे वहां स्वास्थ्य सुधारने जाते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश वहां फैली धूल और प्रदूषण उन्हें स्वस्थ बनाने के बजाय बीमार बना रहे हैं। खिलाड़ी अपने सपनों को आकार देने के लिए इसी मैदान पर पसीना बहाते हैं, और दशहरा के समय यही मैदान ऐतिहासिक रामलीला का गवाह बनता है। इसके बावजूद, यह मैदान सरकार की प्राथमिकताओं से पूरी तरह बाहर रहा है।

बक्सर शहर की पहचान :

चुनाव के दौरान भी किला मैदान के सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। एक जन-प्रतिनिधि के नाते यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं जनता की उन सुविधाओं की मांग करूं जो उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकें। एक ऐसा मैदान, जहां एक आधुनिक रनिंग ट्रैक हो, खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं हों, चारों ओर हरियाली हो और बैठने के लिए उचित प्रबंध हो, बक्सर की आवश्यकता है। एक ऐसा स्थान जहां आम नागरिक सम्मानपूर्वक सुबह-शाम अपना समय बिता सकें, वह शहर की पहचान होता है।

जब हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया :

विडंबना यह है कि प्रशासन की संवेदनशीलता अक्सर तभी जागती है जब असुविधा सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंचती है। जब हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया, तो शासन को पहली बार उस कष्ट का अहसास हुआ होगा जिसे बक्सर की जनता वर्षों से झेल रही है। क्या यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है कि जो चिंता आज एक वीआईपी आगमन के बाधित होने पर जताई जा रही है, वह चिंता उन हजारों नागरिकों के लिए पहले नहीं दिखाई गई?

बक्सर की जनता का धैर्य उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि शहर के प्रति उनका प्रेम है। आशा है कि आज की यह घटना केवल एक प्रशासनिक असुविधा बनकर ही नहीं रह जाएगी। यह घटना बक्सर किला मैदान के पुनरुद्धार के लिए एक ठोस पहल का कारण बननी चाहिए। ताकि आने वाले समय में बक्सर अपनी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के तालमेल के साथ गर्व से खड़ा हो सके।

Bijay singh
RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।

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