Homeशाहपुरबिलौटीबिलौटी मामला: बाहुबली राजन तिवारी ने उठाए एसडीएम पर सवाल

बिलौटी मामला: बाहुबली राजन तिवारी ने उठाए एसडीएम पर सवाल

Rajan Tiwari Bilauti: बिहार के भोजपुर जिला, शाहपुर प्रखंड के बिलौटी निवासी भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात के बाद, बाहुबली राजन तिवारी ने इस घटना को एक सोची-समझी हत्या करार दिया है।

  • हाइलाइट: Rajan Tiwari Bilauti
  • एसडीएम ने पुलिस प्रशासन को पूरी तरह से गुमराह किया: राजन तिवारी

आरा। बिहार के भोजपुर में 18 जून 2026 को एक विवादास्पद एनकाउंटर ने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहपुर प्रखंड के बिलौटी निवासी भरत तिवारी के परिजनों से शनिवार को मुलाकात के बाद, बाहुबली राजन तिवारी ने इस घटना को एक सोची-समझी हत्या करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना प्रशासन की विफलता और विशेष रूप से जगदीशपुर एसडीएम की गलत मंशा का परिणाम है।

Rajan Tiwari Bilauti : एसडीएम ने डीएसपी और थाना अध्यक्ष गलत सूचनाएं दीं- राजन तिवारी

राजन तिवारी ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जगदीशपुर एसडीएम ने पुलिस प्रशासन को पूरी तरह से गुमराह किया। उनके अनुसार, एसडीएम ने डीएसपी और थाना अध्यक्ष के समक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और गलत सूचनाएं दीं। इसी भ्रामक जानकारी के आधार पर पुलिस ने उस युवक के साथ अन्याय किया और अंततः उसकी जान ले ली।

क्या थी भरत तिवारी की मांग?

लोगों के बीच यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि आखिर भरत तिवारी कौन थे और उनकी मांग क्या थी, जिसके कारण उन्हें इतनी अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा। राजन तिवारी के मुताबिक, भरत तिवारी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सर्व समाज के हक की लड़ाई लड़ रहे थे। जवईनिया गांव के निवासी, जो बाढ़ की विभीषिका में अपना सब कुछ खो चुके थे और विस्थापित होकर बिलौटी में रह रहे थे, उनके लिए मूलभूत सुविधाओं की मांग करना भरत तिवारी का उद्देश्य था।

भरत तिवारी चाहते थे कि प्रशासन बाढ़ से पूर्व वहां के विस्थापित लोगों के लिए मिट्टी की भराई, हैंडपंप और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करे। अपनी इसी जायज मांग को लेकर जब वे एसडीएम कार्यालय पहुंचे, तो कथित तौर पर उन्हें गलत शब्दों के साथ धक्के मारकर अपमानित किया गया।

आत्मसम्मान की लड़ाई और एनकाउंटर का सच

राजन तिवारी ने आगे कहा कि अपमानित होने के बाद भरत तिवारी का आत्मसम्मान जाग गया। उन्होंने जिस तरह से अवैध पिस्टल के साथ प्रशासन को ललकारा, वह स्वतंत्रता के वीर जवान सुखदेव, राजगुरु और भगत सिंह के उस तरीके की याद दिलाता है, जिसमें वे अपनी आवाज बुलंद करने के लिए असेंबली पहुंचे थे। हालांकि, वर्तमान में यह तरीका गलत था, लेकिन वीडियो में स्पष्ट है कि भरत तिवारी ने पिस्टल पुलिस के सामने सरेंडर कर दी थी। उसके बाद निहत्थे युवक की दिनदहाड़े हत्या करना किसी भी दृष्टि से कानून सम्मत नहीं है।

न्याय की मांग और सरकार से अपेक्षा

राजन तिवारी ने इस पूरे प्रकरण में सरकार मांग करते हुए कहा कि जो पुलिस अधिकारी इस एनकाउंटर में शामिल थे या जिन्होंने इसके आदेश दिए थे, उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई आम नागरिक किसी की हत्या करता है, तो उस पर धारा 302 के तहत मुकदमा चलता है, तो पुलिस प्रशासन द्वारा की गई हत्या में अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं?

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