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भरत तिवारी की माँ ने कहा: न्याय की उम्मीद ने उन्हें जीवित रखा था

Asha Devi Bilauti: भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि न्याय की इस लंबी और कठिन लड़ाई ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से जर्जर कर दिया है।

jay kumar
  • हाइलाइट: Asha Devi Bilauti
  • माँ ने कहा कि विधायक आनंद मिश्रा और राकेश ओझा ने उन्हें आश्वासन दिया था

आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर स्थित बिलौटी में हुई कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की मृत्यु के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में नामजद आरोपित रहे जगदीशपुर के पूर्व डीएसपी राजेश शर्मा की नई पोस्टिंग की खबर सामने आने के बाद पीड़ित परिवार का आक्रोश और निराशा खुलकर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा बुधवार को जारी किए गए प्रशासनिक फेरबदल की सूची में कई आईपीएस और डीएसपी स्तर के अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिसमें पूर्व डीएसपी राजेश शर्मा का नाम भी शामिल है।

Asha Devi Bilauti : डीएसपी की नई पोस्टिंग की सूचना ने पीड़ित परिवार के मनोबल को तोड़ा

इसके बाद इधर, मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आशा देवी ने अत्यंत दुख के साथ अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस पुत्र को उन्होंने खो दिया, उसकी क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन न्याय की उम्मीद ने उन्हें जीवित रखा था। अब डीएसपी की नई पोस्टिंग की सूचना ने उनके परिवार के मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है।

माँ ने जताई चिंता, कहा: उनके घावों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है सरकार

उन्होंने कहा कि विधायक आनंद मिश्रा और राकेश ओझा ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे पीड़ित परिवार की बात सरकार के समक्ष रखेंगे, परंतु सरकार द्वारा आरोपित डीएसपी को नई जिम्मेदारी सौंपना उनके घावों पर नमक छिड़कने के समान है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इस पूरे मामले में तथ्यों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है

भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि न्याय की इस लंबी और कठिन लड़ाई ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से जर्जर कर दिया है। भरत के भाई चंदन तिवारी का स्वास्थ्य भी निरंतर खराब चल रहा है, जिससे पूरा परिवार एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। इसके बावजूद, आशा देवी ने स्पष्ट किया है कि वे और उनका परिवार न्याय की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।

17 जून को बिलौटी में हुई भरत तिवारी कथित मुठभेड़

उल्लेखनीय है कि 17 जून को बिलौटी में हुई भरत तिवारी की कथित मुठभेड़ के बाद से ही तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा की भूमिका और कार्यशैली संदेह के घेरे में रही थी। विवाद बढ़ने के बाद पुलिस मुख्यालय ने उन्हें लाइन हाजिर करने का निर्णय लिया था। ज्ञात हो कि राजेश कुमार शर्मा पर भरत तिवारी की मृत्यु के बाद विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अब जब उनकी तैनाती मद्य निषेध विभाग में कर दी गई है, तो कानून के जानकार और पीड़ित परिवार इसे न्याय प्रक्रिया में एक बाधा के रूप में देख रहे हैं।

Bijay singh
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