Sahyog Shivir Bihiya: यद्यपि फिनंगी में 12 और घाघा पंचायत में 53 आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदन जमा करना ही सफलता का पैमाना नहीं हो सकता।
- हाइलाइट: Sahyog Shivir Bihiya
- बिहिया में सहयोग शिविर की हकीकत: अधिकारी कम, प्रतिनिधि ज्यादा; जनता की समस्याएं सुने कौन ?
आरा। जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और सुशासन की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत में सहयोग शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के इन निर्देशों के पीछे मुख्य मंशा यह है कि संबंधित विभागों के अधिकारी सीधे जनता के बीच पहुंचें और उनकी शिकायतों का निष्पादन करें। परंतु, भोजपुर जिले के बिहिया प्रखंड के फिनंगी और घाघा पंचायत में आयोजित शिविरों ने इस व्यवस्था की गंभीरता और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
मंगलवार को फिनंगी पंचायत के खरौनी पंचायत भवन में आयोजित शिविर की स्थिति अत्यंत निराशाजनक रही। जब लोग अपनी उम्मीदें लेकर वहां पहुंचे, तो उन्हें अधिकारियों की अनुपस्थिति का सामना करना पड़ा। अनेक विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के स्थान पर उनके द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि या ऑपरेटर कार्य करते दिखाई दिए। यक्ष प्रश्न यह है कि यदि निर्णय लेने वाले अधिकारी ही शिविर से नदारद रहेंगे, तो आम जनता की जटिल समस्याओं का समाधान धरातल पर कैसे संभव होगा?
शिविर में वरीय पदाधिकारी के रूप में जगदीशपुर डीसीएलआर अमरेंद्र कुमार ने निरीक्षण किया। शिक्षा विभाग की ओर से को ऑर्डिनेटर और पीएचईडी की ओर से ऑपरेटर मौजूद था। प्रखंड सांख्यिकी विभाग से कोई पदाधिकारी या कर्मचारी शिविर में नहीं पहुंचा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिहिया के प्रभारी अनिल कुमार मौजूद थे, लेकिन वरीय अधिकारी के निरीक्षण के बाद वे भी शिविर में नजर नहीं आए। वहां मौजूद दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने भारी आक्रोश व्यक्त किया। भींगी हुई दवाएं लेने से ग्रामीणों ने इनकार कर दिया।
पंचायत की मुखिया मुन्नी देवी के प्रतिनिधि अनिल सिंह ने कहा कि कई विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी शिविर में नहीं आए हैं। उनके स्थान पर प्रतिनिधियों को भेजे जाने की बात बताई गई है। यह प्रतिनियुक्ति लिखित आदेश पर हुई है या मौखिक रूप से, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की पहल पर जनता की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाया गया है। ऐसे में यदि संबंधित अधिकारी ही मौजूद नहीं रहेंगे तो ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से कौन सुनेगा? ग्रामीणों ने बताया कि सहयोग शिविर एक तरह से खानापूर्ति बन कर रह गया है। जिसे आमजन को कोई लाभ मिलने की उम्मीद नही दिख रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समस्याओं को सुनने वाला कोई सक्षम पदाधिकारी ही नहीं होगा, तो उनकी शिकायतों का निराकरण कैसे होगा?
Sahyog Shivir Bihiya – नल-जल योजना का भी बुरा हाल
शिविर में नल-जल योजना की विफलता भी खुलकर सामने आई। मुखिया प्रतिनिधि के अनुसार वार्ड संख्या 2, 4 और 6 सहित अधिकांश क्षेत्रों में जल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। कहीं तकनीकी खराबी तो कहीं बिजली के भुगतान का बहाना बनाकर योजना को बंद रखा गया है। विडंबना यह है कि जिस पानी का उपयोग आम नागरिकों की प्यास बुझाने के लिए होना था, उसका दुरुपयोग खेतों की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर घाघा पंचायत में भी शिविर लगा। वहां भी वही स्थिति दिखी। बीडीओ अर्चना वर्मा ने बताया कि इस दौरान विभिन्न समस्याओं को लेकर फिनगी पंचायत में बारह व घाघा पंचायत में तिरपन आवेदन प्राप्त हुए है।
यद्यपि फिनंगी में 12 और घाघा पंचायत में 53 आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदन जमा करना ही सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। जब तक अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति और समस्याओं के समाधान के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ये शिविर केवल कागजी खानापूर्ति ही साबित होंगे।







