Chirag Paswan vs. Jitan Ram Manjhi: भोजपुर के भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर ही दो अलग-अलग दृष्टिकोण उभरकर सामने आए हैं।
- हाइलाइट: Chirag Paswan vs. Jitan Ram Manjhi
- एक तरफ चिराग पासवान ने इस घटना को एक सोची-समझी हत्या करार दिया है
- तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का किया समर्थन
आरा/पटना। बिहार के भोजपुर में 17 जून को हुए कथित एनकाउंटर ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर ही दो अलग-अलग दृष्टिकोण उभरकर सामने आए हैं। राज्य के दो प्रमुख दलित नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बयानों ने इस पूरे घटनाक्रम को देखे तो, जहाँ एक ओर न्याय की मांग की जा रही है, तो दूसरी ओर समर्थन में तीखा विरोध की राजनीति।
Chirag Paswan vs. Jitan Ram Manjhi: जीतन राम मांझी का पुलिस कार्रवाई का समर्थन
केंद्रीय मंत्री और ‘हम’ पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने इस एनकाउंटर को लेकर पुलिस का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि हर मामले में गठबंधन के सभी नेताओं की राय एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। मांझी ने मृतक भरत तिवारी के बैकग्राउंड पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वह एक सामान्य व्यक्ति थे, तो उन पर अनुसूचित जाति और जनजाति (एससी/एसटी) एक्ट के तहत मुकदमे क्यों दर्ज थे?
जीतन राम मांझी ने पुलिस की कार्यप्रणाली का समर्थन करते हुए तर्क दिया कि अधिकारियों का उद्देश्य जान लेना नहीं, बल्कि आत्मरक्षा था। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को मारना ही होता, तो गोली छाती पर मारी जाती, जबकि इस मामले में कमर के नीचे गोली चलाई गई थी। अधिकारियों को मिली पदोन्नति का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच लंबित होने तक अधिकारियों को निलंबित रखना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि अभी तक कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था को स्थिर रखने और सम्राट चौधरी के नेतृत्व को मजबूती देने की बात कही।
चिराग पासवान का विरोध और परिवार को न्याय का आश्वासन
दूसरी ओर, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस घटना को एक सोची-समझी हत्या करार दिया है। भरत तिवारी के पीड़ित परिवार से मिलने बिलौटी गांव पहुंचे चिराग पासवान ने परिजनों के आंसू पोंछते हुए उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। परिवार की पीड़ा साझा करते हुए चिराग ने कहा कि कानून के रक्षकों को कानून हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है।
चिराग पासवान ने इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बात करने की बात कही है। पीड़ित परिवार, जिनका प्रशासन से भरोसा उठ चुका है, अब पूरी तरह से चिराग पासवान की ओर देख रहा है। चिराग ने परिवार को आश्वस्त किया है कि इस बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
पुलिस ने मारी तीन गोली, कब और कैसे पांच हो गई?
विदित रहे की भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में स्थानीय निवासी भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामला काफी सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पुलिस के मनोबल और राज्य की कानून-व्यवस्था का तर्क देते हुए सरकारी कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं। लेकिन मांझी जी यह नहीं बता रहे की सरेंडर के बाद पुलिस द्वारा भरत तिवारी को जब कमर के नीचे तीन गोली मारी गई, तो फिर वो पांच गोली में कैसे बदल गई। किन परिस्थितियों में, कब और कहां दो गोली मारी गई। फिलहाल राज्य की नजरें अब न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि सच्चाई क्या है।

