Wednesday, March 3, 2021
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भोजपुर में पीरो नगर परिषद और गड़हनी होगा नया नगर पंचायत

Bihar city – पांच नगर परिषद को नगर निगम में किया गया परिणत

Bihar city बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हफ्ते दूसरी दफे शनिवार को बिहार कैबिनेट की बैठक बुलाई थी। 22 दिसंबर की कैबिनेट मीटिंग के बाद शनिवार को एक बार फिर से बिहार मंत्रिमंडल की बैठक हुई। सीएम नीतीश की अध्यक्षता में संवाद में कैबिनेट की मीटिंग आयोजित की गई। बिहार मंत्रिमंडल की बैठक में महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगी। बिहार कैबिनेट ने बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 3-1 का संशोधन किया है। बिहार कैबिनेट ने पुनपुन, पालीगंज, हरनौत, सरमेरा, परवलपुर, गिरियक, अस्थामा, एकंगरसराय, चंडी, पीरो तथा गडहनी समेत 103 नगर पंचायत Bihar city की मंजूरी दी है। नीतीश कैबिनेट ने 103 नया नगर पंचायत, 8 नए नगर परिषद, वहीं 32 नगर पंचायत को नगर परिषद में अपग्रेड किया गया है। वहीं 12 नगर निकाय को अपग्रेड किया गया है। पांच नगर परिषद को नगर निगम में परिणत किया गया है।

बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 3 (1) के द्वितीय परन्तुक में नगरपालिकाओं के गठन के लिए यह शर्त निर्धारित थी कि सभी दशाओं में गैर कृषि जनसंख्या पचहत्तर प्रतिशत या उससे अधिक होना आवश्यक है, परन्तु भारत की जनसंख्या के प्रकाशित आँकड़ों में गैर कृषि जनसंख्या का अलग से कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं होने के परिणामस्वरूप नगरपालिकाओं के गठन में कठिनाई उत्पन्न हो रही थी तथा इसी आधार पर माननीय न्यायालयों द्वारा भी कई नगर निकायों के गठन की अधिसूचना को या तो निरस्त कर दिया गया था या उसको स्थगित कर दिया गया था।

  1. बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 में नगर निकायों के गठन हेतु गैर कृषि क्षेत्र की जनसंख्या 75 प्रतिशत होने के कारण कई ऐसे छोटे शहर/बाजार, जिनमें शहरीकरण के लिए प्रगतिशील स्थिति रहने तथा उनमें शहरीकरण का पूर्ण प्रभाव रहने के वावजूद भी उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के अन्तर्गत ही रखने की बाध्यता थी।
  1. राज्य के संदर्भ में यह भी स्पष्ट है कि वर्तमान में कई अनुमंडल मुख्यालय अभी भी ग्राम पंचायत के अंतर्गत है। इसके अतिरिक्त कई पुराने सी0डी0 ब्लॉक मुख्यालय, जिनकी जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 12000 से अधिक थी तथा जहाँ शहरीकरण के विभिन्न अवयव एवं मानक मौजूद हैं, को भी नगर निकायों का दर्जा नहीं मिल सका था तथा वर्तमान में वह ग्रामीण क्षेत्र के ही अन्तर्गत है तथा ग्राम पंचायत के रूप में ही गठित है। राज्य में नगर पंचायत तथा नगर परिषद् के रूप में गठित कई नगर निकायों के आसपास के क्षेत्रों में शहरीकरण की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है तथा इन क्षेत्रों में शहरों के मानकों के तहत नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाना आवश्यक है।
  2. इसी प्रकार Bihar city राज्य के कई छोटे शहरों को नगर पंचायत के रूप में सम्मिलित किये जाने की आवश्यकता है। इन छोटे शहरों में व्यवसायिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी है तथा लगातार इसमें अभिवृद्धि हो रही है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों एवं शहरीकरण के विस्तार के फलस्वरूप अनियोजित विकास को रोकने के लिए भी यह आवश्यक है कि इसे नगर निकायों के रूप में सम्मिलित कर व्यवस्थित रूप से विकास (Planned Development) किया जाय तथा नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाय।
  3. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार वर्तमान में देश में शहरी जनसंख्या का औसत लगभग 31.16 प्रतिशत है, जबकि बिहार राज्य की शहरी जनसंख्या लगभग 11.27 प्रतिशत ही है । राज्य में नगर निकायों के गठन के फलस्वरूप राज्य की शहरी जनसंख्या में न सिर्फ वृद्धि होगी, बल्कि इन शहरी क्षेत्रों में विभिन्न नागरिक सुविधाएँ यथा स्ट्रीट लाईट, ड्रेनेज सिस्टम, मशीनों के माध्यम से शहरों की साफ -सफाई, पार्क, सामुदायिक सुविधाएँ इत्यादि दी जा सकेंगी, जिससे इन क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी को इन शहरी सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के छोटे प्रगतिशील शहरों को नगर निकाय के रूप में सम्मिलित किये जाने से राज्य के शहरी जनसंख्या में वृद्धि होगी तथा इससे केन्द्रीय संसाधनों में राज्य की हिस्सेदारी में भी वृद्धि होगी ।
  4. राज्य के ऐसे Bihar city शहरी स्वरूप वाले कई क्षेत्र, जो वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र है तथा जो ग्राम पंचायत के रूप में ही अधिसूचित हैं, को नगर निकाय के रूप में गठित किये जाने हेतु आम नागरिकों एवं निर्वाचित माननीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी मांग की जाती रही है तथा राज्य विधान मंडल में इससे संबंधित मामले उठाये जाते रहे हैं ।
  5. उपर्युक्त वर्णित स्थिति के आलोक में बिहार नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2020 (बिहार अधिनियम 13, 2020) द्वारा बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 3 की उपधारा (1 ) के द्वितीय परन्तुक को संशोधित किया गया है (संलग्न)।
  6. उक्त संशोधन के फलस्वरूप बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 3 (1) का प्रावधान निम्नवत् हो गया है :-

“3. नगरपालिका क्षेत्र गठित करने के आशय की घोषणा- ( 1 ) यथोचित जाँच करने के पश्चात् तथा किसी शहरी क्षेत्र की जनसंख्या, उसमें जनसंख्या की सघनता, ऐसे क्षेत्र के स्थानीय प्रशासन के निमित्त उत्पादित राज्स्व, ऐसे क्षेत्र में गैर कृषि-कार्यो में नियोजन का प्रतिशत, ऐसे क्षेत्र के आर्थिक महत्व और यथा विहित अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को वृहत्तर शहरी क्षेत्र या मध्यम शहरी क्षेत्र या मध्यम शहरी क्षेत्र या अन्तवर्ती क्षेत्र के रूप में विनिर्दिष्ट किये जाने के आशय की घोषणा कर सकेंगे;

परन्तु यह कि ऐसी कोई घोषणा तबतक नहीं की जाएगी जबतक कि जनसंख्या –

(क) वृहत्तर शहरी क्षेत्र की दशा में दो लाख या उससे अधिक,

(ख) मध्यम शहरी क्षेत्र की दशा में चालीस हजार या उससे अधिक किन्तु दो लाख से अनधिक, और

(ग) अन्तवर्ती क्षेत्र, अर्थात् छोटे शहर, की दशा में बारह हजार और उससे अधिक किन्तु चालीस हजार से अनधिक हो; परन्तु यह और कि सभी दशाओं में दीर्घकालिक व अल्पकालिक काश्तकार कर्मियों (कृषि कर्मियों) की कुल जनसंख्या उस क्षेत्र की कुल कर्मियों की जनसंख्या का पचास प्रतिशत से कम होगी।”

  1. बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 में उक्त संशोधन के फलस्वरूप विभाग द्वारा विभिन्न पत्रों द्वारा राज्य के सभी जिला पदाधिकारी से अपने-अपने जिलान्तर्गत विस्तृत समीक्षा करते हुए नये नगर निकायों के गठन एवं वर्तमान में बड़े नगर पंचायत एवं नगर परिषद् को नगर परिषद् एवं नगर निगम में उत्क्रमण अथवा क्षेत्र विस्तार का प्रस्ताव विहित प्रपत्र में नक्शा एवं अनुशंसा सहित उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया ।
  2. इस संदर्भ में विभिन्न जिलों से नये नगर पंचायत क्षेत्र का गठन, नये नगर परिषद् क्षेत्र का गठन, वर्तमान नगर पंचायत का नगर परिषद् में उत्क्रमण, वर्तमान नगर परिषद् से नगर निगम में उत्क्रमण तथा वर्तमान नगर निकाय का क्षेत्र विस्तारण हेतु प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं ।
  1. इस प्रकार उक्त तथ्यों के आलोक में विभिन्न जिलों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के उपरांत विभिन्न जिलों के अन्तर्गत नगर पंचायत क्षेत्रों के गठन, नये नगर परिषद् क्षेत्रों के गठन, वर्तमान नगर पंचायतों का नगर परिषदों में उत्क्रमण, वर्तमान नगर परिषदों से नगर निगमों में उत्क्रमण तथा वर्तमान नगर निकायों के क्षेत्र विस्तारण हेतु निम्नवत् प्रस्ताव हैं

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