Holding tax pending: वर्ष 2023 के चुनाव के दौरान मात्र 20 पैसे प्रति वर्ग फीट की दर से होल्डिंग टैक्स लेकर एनओसी जारी किया गया, जो कि बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2013 के आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन है।
- हाइलाइट:
- वर्तमान में नगर की जनता से 4 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से होल्डिंग वसूली
- वही कमर्शियल होल्डिंग टैक्स 32 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से हो रही वसूली
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 51.50 लाख होल्डिंग टैक्स वसूला गया
- कुल होल्डिंग करीब 3612 में से करीब 1500 घरों से वित्तीय वर्ष 2025-26 में वसूली
आरा,भोजपुर। जिले के शाहपुर नगर पंचायत में होल्डिंग टैक्स का मुद्दा इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब नगर पंचायत के निर्वाचित पार्षदों द्वारा प्राप्त किए गए बकाया रहित प्रमाणपत्र (एनओसी) पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह विवाद मुख्य रूप से टैक्स की गणना में अपनाए गए दोहरे मापदंडों और नियम विरुद्ध तरीके से एनओसी जारी किए जाने को लेकर है।
नगर पंचायत के एक अनुभवी कर संग्राहक से प्राप्त तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2023 में संपन्न निकाय चुनाव के दौरान निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को जो बकाया रहित एनओसी जारी किए गए थे, उनमें भवन कर की गणना मात्र 20 पैसे प्रति वर्ग फीट की दर से की गई थी। एनओसी दिए जाने की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि इनमें संबंधित पार्षदों की खाली जमीन के रकबे को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया था, जो कि बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2013 के आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्राप्त विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में नगर पंचायत द्वारा आम नागरिकों से बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, वर्ष 2013 से प्रभावी दर के अनुरूप आवासीय भवन कर 4 रुपये प्रति वर्ग फीट और कमर्शियल होल्डिंग टैक्स 32 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से वसूला जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार खाली जमीन के कुल क्षेत्रफल को भी कर दायरे में शामिल किया गया है। जिससे नगर के करीब 3612 घरों में से 1500 का होल्डिंग टैक्स, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 51.50 लाख वसूला गया।
Holding tax pending: आम जनता पर सख्ती, पार्षदों को राहत
अब विरोधाभास यह है कि जो नियम आम जनता पर सख्ती से लागू हुये हैं, उनसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को न केवल राहत दी गई, बल्कि चुनाव के समय अत्यंत कम दरों पर एनओसी निर्गत कर दी गई। इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि चुनाव के समय किसी भी निर्वाचित पार्षद ने अपनी खाली जमीन का कर भुगतान (जमा) नहीं किया, जबकि बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2013 के नियमों के तहत नगर पंचायत क्षेत्र में खाली जमीन पर कर भुगतान अनिवार्य है। नगर की जनता और जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो जनप्रतिनिधियों को कर भुगतान में इतनी बड़ी छूट कैसे प्राप्त हुई? यह मामला अब शाहपुर नगर पंचायत में चर्चा का विषय बन चुका है।
पंचायती व नगरपालिका कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला आने वाले समय में गंभीर रूप ले सकता है। पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह का मानना है कि यदि इस प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो यह निर्वाचित पार्षदों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। नगरपालिका के सभी करों के भुगतान किये बिना एनओसी प्राप्त कर चुनाव जीते जनप्रतिनिधियों पर बिहार नगपालिक अधिनियम की धरा -18 (1) के तहत उनके अयोग्यता का मामला बनता है। राज्य निर्वाचन आयोग,पटना (SEC Court) में कुल पाँच मामले शाहपुर नगर पंचायत के चल रहे है, जो टैक्स बकाया से संबंधित है।


