Land mutation: बिहार में जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के लिए आम लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी।
- हाइलाइट:
- ‘सक्षम न्यायालय’ और ‘लंबित’ जैसे शब्दों की व्याख्या हुई स्पष्ट
Land mutation: बिहार में जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के लिए अब आम लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ‘सक्षम न्यायालय’ और ‘लंबित’ जैसे तकनीकी शब्दों की व्याख्या को स्पष्ट किया है। उपमुख्यमंत्री और मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि अब आवेदन देने या कागजात दिखाने पर कोई कार्यवाही नहीं रोकी जाएगी। यदि कोर्ट का स्पष्ट स्टे (Stay) नहीं है, तो अधिकारियों को दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी।
अंचल अधिकारियों की मनमानी पर लगाम: भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी को लेकर आम जनता की चिंता को समझते हुए यह निर्णय लिया गया है। पहले, अंचल अधिकारी अक्सर ‘मामला कोर्ट में लंबित है’ या ‘सक्षम न्यायालय में वाद है’ जैसे बहाने बनाकर दाखिल-खारिज के मामलों को महीनों तक लटकाए रखते थे। विभागीय समीक्षा में यह देखने को मिला कि ये तकनीकी शब्द अक्सर भ्रष्टाचार का साधन बन गए थे। अब प्रधान सचिव सी. के. अनिल द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों ने इस भ्रम को समाप्त करने का काम किया है।
‘सक्षम न्यायालय’ की नई परिभाषा: इस दिशा-निर्देश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल दीवानी न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ही सक्षम न्यायालय नहीं हैं। अब भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR), अपर समाहर्ता, समाहर्ता, आयुक्त न्यायालय और बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BLT) को भी सक्षम न्यायालय की श्रेणी में रखा गया है। इससे अधिकारियों को यह जानने में मदद मिलेगी कि वे किस स्तर के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य हैं और यह प्रक्रिया और अधिक सुसंगत होगी।
Land mutation : ‘लंबित’ शब्द का सही अर्थ
पुनरावलोकन में सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण ‘लंबित’ शब्द को लेकर है। किसी न्यायालय में केवल आवेदन या आपत्ति देने से मामला अब ‘लंबित’ नहीं माना जाएगा। मामला तभी लंबित माना जाएगा जब कोर्ट ने उसे ‘एडमिट’ कर नोटिस जारी कर दिया हो या प्रभावी स्थगनादेश (Stay Order) या स्टेटस-को (Status Quo) का आदेश मौजूद हो। इसके बिना, राजस्व अधिकारी अपनी कार्यवाही जारी रखेंगे, जो अनावश्यक देरी को खत्म करने में सहायक होगा।
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में कदम: मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजस्व प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनता को पारदर्शी और न्यायसंगत सेवाएं प्रदान करना है। इस निर्देश से अंचल स्तर पर निर्णय लेने में होने वाले भ्रम को दूर किया जाएगा। इससे वास्तविक खरीदारों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक शोषण से मुक्ति मिलेगी और भूमि विवादों में कमी आएगी।
अधिकारियों को समयसीमा का निर्देश: प्रधान सचिव ने सभी अंचल अधिकारियों को सख्ती से निर्देश दिया है कि वे इन दिशा-निर्देशों का तत्काल पालन करें। अब दाखिल-खारिज केवल वाद की प्रति दिखा देने के आधार पर नहीं रुकेगा। अधिकारियों को विधिसम्मत और समयबद्ध निष्पादन करना होगा। इस सख्ती से उन लोगों को सबसे अधिक लाभ होगा जो अपनी जमीन का मालिकाना हक हासिल करने के लिए सिस्टम की बेरुखी झेल रहे थे। लोगों को अब उस अनावश्यक मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी, जो लंबे समय से इस प्रक्रिया के कारण सहन करना पड़ रहा था।


