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मुहर्रम 17 को, शाहपुर में ताजिया के इस्तकबाल की तैयारी

Tazia : शाहपुर में ताजिया जुलूस शाह लक्कड़ बाबा मज़ार होते हुए पुराना बाजार के रास्ते छोटी मठिया चौफाल पहुंचेगा। इसके बाद ताजिया टेड़ी गली मोड़ होते हुए थाना परिसर एवं इसके बाद कर्बला पहुंचेगा।

Tazia : शाहपुर में ताजिया जुलूस शाह लक्कड़ बाबा मज़ार होते हुए पुराना बाजार के रास्ते छोटी मठिया चौफाल पहुंचेगा। इसके बाद ताजिया टेड़ी गली मोड़ होते हुए थाना परिसर एवं इसके बाद कर्बला पहुंचेगा।

  • हाइलाइट : Tazia
    • नगर पंचायत शाहपुर के वार्ड-02 स्थित तकिया मुहल्ले में हुई ताजिया जुलूस की तैयारी बैठक

Tazia आरा/शाहपुर: नगर पंचायत शाहपुर के वार्ड संख्या-02 में ताजिया जुलूस को लेकर एक बैठक की गई। बैठक में ताजिया जुलूस रूट की चर्चा की गई। खलीफा मो. आलमगीर शाह ने कहा पुराने रूट की सदियों से चली आ रही परंपरा का पालन करते हुए सामाजिक एकता और सौहार्द के तहत ताजिया जुलूस निकाली जाएंगी।

कमेटी के सदस्य मो. नसीम शाह ने बताया कि वार्ड संख्या-02 स्थित ताजिया चौक से जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें सुसज्जित ताजिया भी शामिल होगा। ताजिया जुलूस शाह लक्कड़ बाबा मज़ार होते हुए पुराना बाजार के रास्ते छोटी मठिया चौफाल पहुंचेगा। इसके बाद ताजिया टेड़ी गली मोड़ होते हुए थाना परिसर एवं इसके बाद कर्बला पहुंचेगा। बैठक में पूर्व उपमुख्य पार्षद मो. मोख्तार शाह, मो. मुमताज शाह, मो. जाहिद शाह, मो. जिलनी शाह, रेयाज अंसारी, वाकर हुसैन सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

मुहर्रम इस्लाम धर्म का पहला महीना

बता दें कि इस्लाम धर्म के लोगों के लिए मुहर्रम का दिन बेहद खास होता है। इसे नए साल के रूप में मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है। इसे बकरीद के 20 दिनों के बाद मनाया जाता है। भारत में मुहर्रम मनाने की तारीख चांद निकलने पर तय की जाती है। ऐसे में हर साल इसकी तारीख बदलती है।

इस्लामी कैलेंडर में 12 महीने होते हैं, जिसमें से 4 सबसे पवित्र माने जाते हैं, इनमें जुल- का’दा, जुल-हिज्जा और मुहर्रम और चौथा रजब का नाम शामिल है। इन माह को अल्लाह की दया और कृपा पाने के लिए सबसे उचित माना जाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार मुहर्रम में सदका करना बेहद शुभ होता है। इससे अल्लाह का आशीर्वाद पूरे साल बना रहता है।

कब है मुहर्रम 2024?
इस्लामिक कैलेंडर अनुसार इस साल 7 जुलाई 2024 से शुरू मुहर्रम में आशूरा मनाने की तारीख 17 जुलाई है।

मुहर्रम का महत्व
एक तरफ जहां मुहर्रम को नए साल के रूप में मनाया जाता है, वहीं इसे मातम का दिन भी माना जाता है। बता दें मुहर्रम की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा के नाम से जाना जाता है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इस दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। हजरत इमाम हुसैन को इस्लाम धर्म का संस्थापक माना जाता है। वह हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। ऐसे में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम के 10वें दिन को लोग मातम के रूप में मनाते हैं, जिसे आशूरा कहा जाता है। वहीं कुछ लोग इस दिन इमाम हुसैन की शहादत की याद में जुलूस भी निकालते हैं।

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