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बिहिया के मुख्य पार्षद पर कार्रवाई हो सकती है, तो उप-मुख्य पार्षद पर क्यों नहीं?

Political Turmoil in Bihiya NP: बिहिया के उप-मुख्य पार्षद पर मुख्य पार्षद को हटाने की जुगत बिठाने और स्वयं की कुर्सी को सुरक्षित करने का आरोप लग रहा है।

  • हाइलाइट: Political Turmoil in Bihiya NP
  • वाद संख्या-33/2023 प्रफुल्ल रंजन बनाम शारदा देवी मामला
  • सिवान के महाराजगंज नगर पंचायत के मामले में आयोग का फैसला
  • राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व के फैसलों पर दृष्टि डालें तो
  • मुख्य पार्षद और उप-मुख्य पार्षद दोनों ही दोषी व पदमुक्त
  • तो क्या केवल बिहिया मुख्य पार्षद को पदमुक्त करना ही पर्याप्त है?
  • बिहिया के उप-मुख्य पार्षद भी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल

आरा, भोजपुर। जिले के बिहिया नगर पंचायत के मुख्य पार्षद सचिन कुमार गुप्ता को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में पदमुक्त करने का निर्णय निश्चित रूप से नगर प्रशासन के लिए एक बड़ा बदलाव है, लेकिन इस पूरे प्रकरण की परतें खोलने पर जो तथ्य सामने आते हैं, वे नगर के राजनीतिक उठापटक और सत्ता के गलियारों में चल रहे पावर गेम की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं।

Political Turmoil in Bihiya NP: उप-मुख्य पार्षद, मुख्य पार्षद को हटाने की जुगत में लगे रहें

मामले की गहराई से समीक्षा करने पर यह प्रतीत होता है कि मुख्य पार्षद का पद जाना केवल सचिन कुमार गुप्ता की ही विफलता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा भी है, जिसमें उप-मुख्य पार्षद बिजय कुमार गुप्ता की भूमिका संदेह के घेरे में नहीं,बल्कि स्पष्ट होती है। जनहित और नगर के विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के बजाय, उप-मुख्य पार्षद पर मुख्य पार्षद को हटाने की जुगत बिठाने और स्वयं की कुर्सी को सुरक्षित करने का आरोप लग रहा है। उन्होंने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने के स्थान पर राज्य निर्वाचन आयोग (SEC Bihar) में वाद संख्या-52/2025 दायर कर मुख्य पार्षद को हटाने का कार्य किया।

उप-मुख्य पार्षद का भी यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वे आगे बढ़कर बैठकें बुलाएं

विदित रहें की बिहिया चेयरमैन सचिन गुप्ता को किसी केस की वजह से नहीं बल्कि बैठक नहीं बुलाने यानि अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहने पर पदमुक्त किया गया है। बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 इस संबंध में अत्यंत स्पष्ट है। कानून का मूल मंतव्य यह है कि यदि मुख्य पार्षद किसी कारणवश बैठकें आहूत करने में असमर्थ रहते हैं, तो उप-मुख्य पार्षद का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वे आगे बढ़कर बैठकें बुलाएं ताकि नगर का विकास कार्य बाधित न हो। परंतु, बिहिया के उप-मुख्य पार्षद द्वारा जानबूझकर बैठकें न बुलाना और सीधे आयोग का दरवाजा खटखटाना, उनके इरादों पर सवालिया निशान खड़ा करता है। यह स्पष्ट रूप से अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता और सोची-समझी साजिश की श्रेणी में आता है।

सिवान के महाराजगंज नगर पंचायत के मामले में आयोग का स्पष्ट मत

राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व के फैसलों पर दृष्टि डालें तो यह स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। वाद संख्या-33/2023, प्रफुल्ल रंजन बनाम शारदा देवी व अन्य मामले में आयोग का निर्णय एक मिसाल है। सिवान के महाराजगंज नगर पंचायत के मामले में आयोग ने स्पष्ट किया था कि जब मुख्य पार्षद और उप-मुख्य पार्षद दोनों ही अपने दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहते हैं, तो वे अपने पद पर बने रहने का नैतिक और कानूनी अधिकार खो देते हैं। उस मामले में भी दोनों को पदमुक्त किया गया था। यह नजीर बिहिया के संदर्भ में भी पूरी तरह लागू होती है।

बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-26 और धारा-27 (अ)(3) का संयुक्त पठन यह बताता है कि सशक्त स्थायी समिति की बैठक बुलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी मुख्य पार्षद की है। लेकिन यदि मुख्य पार्षद विफल होते हैं, तो धारा-27 (अ)(3) के तहत उप-मुख्य पार्षद या मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी को बैठक बुलाना अनिवार्य है। बिहिया के प्रकरण में यह साक्ष्यों से प्रमाणित है कि मुख्य पार्षद ने बैठकें नहीं बुलाईं, लेकिन उससे भी बड़ा तथ्य यह है कि उप-मुख्य पार्षद ने भी अपने उत्तरदायित्वों की घोर उपेक्षा की।

बिहिया के नागरिकों की निगाहें अब सचिन गुप्ता के अगले कदम पर टिकी हैं

अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल बिहिया मुख्य पार्षद को पदमुक्त करना ही पर्याप्त है? कानूनी विशेषज्ञों और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, उप-मुख्य पार्षद की भूमिका भी समान रूप से कर्तव्यहीनता की श्रेणी में आती है। यदि मुख्य पार्षद पर कार्रवाई हो सकती है, तो उप-मुख्य पार्षद को उनके द्वारा किए गए सुनियोजित षड्यंत्र और जानबूझकर कर्तव्यों की अवहेलना करने के लिए जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए?

बिहिया की जनता अब इस पूरे मामले में स्पष्टता चाहती है। क्या सिर्फ मुख्य पार्षद पर गाज गिरकर यह प्रकरण समाप्त हो जाएगा, या फिर उनपर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए संवैधानिक नियमों का मखौल उड़ाया है। बिहिया के नागरिकों की निगाहें अब पदमुक्त चेयरमैन सचिन गुप्ता के अगले कदम पर टिकी हैं।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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