R K Singh New party: गृह सचिव के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति का दामन थामा और बतौर भाजपा प्रत्याशी आरा से दो बार सांसद चुने गए।
- हाइलाइट: R K Singh New party
- वर्ष 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को रोका, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
- तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अतिरिक्त डीएम बनाकर समस्तीपुर भेजा था
RK Singh New Party: पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता आरके सिंह की बिहार की राजनीति में एक नई पारी शुरू करने की योजना चर्चा का विषय बनी हुई है। एक नौकरशाह से राजनेता और अब वकील के रूप में अपनी पहचान बना चुके आरके सिंह ने हाल ही में घोषणा की है कि वह एक नया राजनीतिक दल गठित करने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी से अलग होने के पांच महीने बाद आया यह निर्णय बिहार के राजनीतिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना पैदा करता है।
R K Singh New party : पार्टी का नाम जल्द ही…
अपने नए राजनीतिक दल के विजन पर बात करते हुए आरके सिंह ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी पूरी तरह से बिहार की उन्नति पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसे लोगों को साथ जोड़ना है जो ईमानदार, शिक्षित और जातिवाद की संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर कार्य करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का नाम जल्द ही तय कर लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री की प्रशंसा, सम्राट चौधरी के चरित्र पर तीखे सवाल
अपने पूर्व राजनीतिक सफर पर प्रकाश डालते हुए आरके सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बेबाक तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें सात साल तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में ऊर्जा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी, जो उनके लिए एक सम्मानजनक अनुभव रहा।
हालांकि, बिहार की वर्तमान राजनीति को लेकर उनका रुख काफी सख्त रहा। उन्होंने राज्य के नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता और चरित्र पर तीखे सवाल उठाए। आरके सिंह का मानना है कि राज्य के विकास के लिए नेतृत्व का शिक्षित और ईमानदार होना अनिवार्य है।
नीतीश सरकार में 99 प्रतिशत मंत्री भ्रष्टाचार में थे लिप्त
इसी क्रम में उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के पहले कार्यकाल में राज्य ने अच्छा काम देखा था, लेकिन दूसरे कार्यकाल के दौरान व्याप्त भ्रष्टाचार ने शासन की छवि को धूमिल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार में 99 प्रतिशत मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त थे। नीतीश भले ही खुद भ्रष्टाचार में शामिल नहीं थे, लेकिन उनके आसपास के लोग भ्रष्ट हों, तो यह शर्म की बात है।
आडवाणी की रथ यात्रा को रोकने पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
आरके सिंह का जीवन अनुभव और शिक्षा उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग खड़ा करते हैं। सुपौल में जन्मे और आर्ट्स, एलएलबी एवं मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त कर चुके आरके सिंह ने एक आईएएस अधिकारी के रूप में लंबा प्रशासनिक अनुभव अर्जित किया है। वर्ष 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को रोकने के उनके ऐतिहासिक फैसले ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था। उस समय लालू प्रसाद यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने आरके सिंह को अतिरिक्त डीएम बनाकर समस्तीपुर भेजा था।
गृह सचिव के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति का दामन थामा और बतौर भाजपा प्रत्याशी आरा से दो बार सांसद चुने गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद आरके सिंह ने अपनी ही पार्टी के भीतर कुछ नेताओं पर साजिश के तहत चुनाव हरवाने का आरोप लगाया था। इस विवाद के चलते भाजपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस, अब बार काउंसिल के सदस्य
वर्तमान में 73 वर्षीय आरके सिंह ने अपनी नई पारी के रूप में वकालत का मार्ग चुना है। वे अब सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं और बार काउंसिल के सदस्य भी हैं। एक लंबा प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव रखने वाले आरके सिंह का नया दल बिहार के चुनावी परिदृश्य में क्या स्थान बनाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन इतना तय है कि वे एक बार फिर अपनी बेबाक शैली से राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार हैं।


