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भवन नक्शा विवाद मामले में शाहपुर नपं के कार्यपालक पदाधिकारी निलंबित

निलंबन अवधि के दौरान मो. नेशात आलम का मुख्यालय पूर्णिया नगर निगम के नगर आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है।

Executive Officer Suspended: निलंबन की अवधि के दौरान मो. नेशात आलम का मुख्यालय पूर्णिया नगर निगम के नगर आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है।

jay kumar
  • हाइलाइट: Executive Officer Suspended
  • भोजपुर जिला पदाधिकारी द्वारा विभाग को सौंपी गई थी विस्तृत जांच रिपोर्ट
  • आरोपों की पुष्टि होने के बाद विभाग ने निलंबन की अधिसूचना जारी की

पटना: नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सह उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर शाहपुर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी मो. नेशात आलम को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई विभागीय कार्यों में बरती गई घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोपों के आधार पर की गई है।

भोजपुर जिला पदाधिकारी द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट ने इस निलंबन का आधार तैयार किया। रिपोर्ट के अनुसार, एक अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण हेतु भवन नक्शा स्वीकृति के आवेदन का समय पर निष्पादन नहीं किया गया। कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा प्रक्रिया में की गई इस देरी के परिणामस्वरूप जब परिवादी ने निर्माण कार्य प्रारंभ किया, तो पेनाल्टी निर्धारण की प्रक्रिया में भी भारी विसंगतियां पाई गईं।

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पेनाल्टी की गणना नियमों के विरुद्ध और त्रुटिपूर्ण तरीके से की गई थी। जहां वास्तविक पेनाल्टी राशि 12,72,860 रुपये होनी चाहिए थी, वहीं इसे अनुचित रूप से बढ़ाकर 19,09,290 रुपये निर्धारित कर दिया गया। यह मामला न केवल प्रशासनिक अदूरदर्शिता को दर्शाता है, बल्कि प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितता का स्पष्ट संकेत भी देता है। इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद विभाग ने त्वरित निर्णय लेते हुए निलंबन की अधिसूचना जारी की।

Executive Officer Suspended: मो. नेशात आलम को भेजा गया पूर्णिया नगर निगम

निलंबन की अवधि के दौरान मो. नेशात आलम का मुख्यालय पूर्णिया नगर निगम के नगर आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है। इस कार्रवाई के माध्यम से विभाग ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सर्वोपरि है। विभाग ने कड़ी चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर कर्तव्य के प्रति लापरवाही या अधिकारियों की मनमानी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी दोषियों के विरुद्ध ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

शाहपुर नगर पंचायत का यह मामला केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत लापरवाही तक सीमित नहीं जान पड़ता, बल्कि यह विभागीय कार्यप्रणाली की गहरी खामियों को भी उजागर करता है। भवन नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया लंबे समय से अपनी जटिलता और धीमी गति के लिए चर्चा में रही है। कई मामलों में आवेदनों का महीनों तक लंबित रहना आवेदकों को बिना औपचारिक स्वीकृति के निर्माण कार्य शुरू करने के लिए विवश करता है, जिससे बाद में पेनाल्टी और भ्रष्टाचार की स्थिति उत्पन्न होती है। शाहपुर प्रकरण इसी प्रशासनिक शिथिलता का एक जीवंत उदाहरण है।

Bijay singh
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