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पिछली विफलता के बाद भी शाहपुर नपं को एनजीओ पर भरोषा

आर्थिक औचित्य: जब 3 से 4 लाख रुपये के खर्च में सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी, तो अचानक 17 लाख रुपये से अधिक का खर्च किस आधार पर तर्कसंगत है?

Shahpur NP trusts NGO: शाहपुर नगर पंचायत में स्वच्छता प्रबंधन की नई पहल और वित्तीय विसंगतियों पर एक गहन विश्लेषण

  • हाइलाइट: Shahpur NP trusts NGO
  • पूर्व में सफाई व्यवस्था के लिए एनजीओ को प्रति माह 11 लाख 87 हजार का भुगतान
  • विभाग द्वारा स्वयं सफाई करने पर मासिक खर्च 3 से 4 लाख रुपये के बीच रहा
  • अब नये एनजीओ का मासिक अनुबंध मूल्य 17 लाख रुपये से भी अधिक बताई जा रही है

आरा। शाहपुर नगर पंचायत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत ने एक बार फिर शहर की साफ-सफाई का जिम्मा किसी निजी एनजीओ को सौंपने का निर्णय लिया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पूर्व में इसी व्यवस्था के विफल होने के कड़वे अनुभव हमारे सामने हैं।

Shahpur NP trusts NGO: पूर्व अनुभवों की पड़ताल

यह सर्वविदित है कि अतीत में भी शाहपुर नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था के लिए एक एनजीओ (प्रताप सेवा संकल्प,गोविंद फुलकन,मुजफ्फरपुर) को अनुबंधित किया गया था। उस समय नगर पंचायत द्वारा इस कार्य के लिए प्रति माह 11 लाख 87 हजार रुपये की बड़ी राशि का भुगतान किया जा रहा था। जनता और प्रशासन को यह उम्मीद थी कि इतनी बड़ी धनराशि के बदले शहर को आदर्श स्वच्छता मिलेगी। हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके विपरीत रही। लगातार शिकायतों और खराब प्रदर्शन के बाद, उस एनजीओ को अंततः ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था।

नगर पंचायत द्वारा स्वयं की गई व्यवस्था के परिणाम

पिछली विफलता के बाद, नगर पंचायत ने लगभग 10 माह तक सफाई व्यवस्था का संचालन स्वयं अपने स्तर पर किया। यह समय-अवधि आंकड़ों के लिहाज से बेहद दिलचस्प है। इस दौरान सफाई कार्य पर होने वाला मासिक खर्च 3 से 4 लाख रुपये के बीच रहा। यह तुलनात्मक आंकड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संसाधनों का सही प्रबंधन किया जाए, तो वही कार्य काफी कम लागत में और अधिक जवाबदेही के साथ किया जा सकता है। स्वयं के प्रयासों से हुए इस सफल संचालन ने नगर प्रशासन की दक्षता को भी सिद्ध किया था।

वर्तमान निर्णय और वित्तीय बोझ की चिंता

अब, एक बार फिर नगर पंचायत ने अपने पुराने अनुभवों को दरकिनार करते हुए सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स करने का निर्णय लिया है। स्थानीय नगरकर्मी से मिली जानकारी के अनुसार चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार जिस एनजीओ को हायर किया गया है, उसका मासिक अनुबंध मूल्य 17 लाख रुपये से भी अधिक है।

यह निर्णय कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है:
  1. आर्थिक औचित्य: जब 3 से 4 लाख रुपये के खर्च में सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी, तो अचानक 17 लाख रुपये से अधिक का खर्च किस आधार पर तर्कसंगत है? करदाताओं की गाढ़ी कमाई का यह अतिरिक्त बोझ जनता के लिए चिंता का विषय है।
  2. जवाबदेही का प्रश्न: पूर्व में जब एनजीओ के माध्यम से कार्य कराया गया था, तब कार्य की गुणवत्ता खराब होने के कारण उसे ब्लैकलिस्ट करना पड़ा था। क्या प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि नई व्यवस्था में वही पुरानी गलतियां नहीं दोहराई जाएंगी?
  3. पारदर्शिता: जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि 11 लाख 87 हजार से बढ़कर 17 लाख के बजट तक पहुंचने की प्रक्रिया में कौन से अतिरिक्त मापदंड शामिल किए गए हैं और इसके पीछे का तार्किक आधार क्या है।

इधर, पूर्व उपाध्यक्ष गुप्तेश्वर साह ने कहा कि शाहपुर नगर पंचायत का यह निर्णय न केवल वित्तीय प्रबंधन के दृष्टिकोण से संदेहास्पद प्रतीत होता है, बल्कि यह उन सुधारों की दिशा में भी एक कदम पीछे हटना लगता है जो पिछले 10 महीनों में विभाग ने स्वयं प्राप्त किए थे। नगर प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनहित में संसाधनों का इष्टतम उपयोग करना होता है।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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