Homeआरा भोजपुरशाहपुरआखिर नगर प्रशासन जनता को सच बताने से क्यों डर रहा है?

आखिर नगर प्रशासन जनता को सच बताने से क्यों डर रहा है?

Shahpur RTI News: शाहपुर नगर पंचायत 30 दिन के भीतर आरटीआई का जवाब देना अपनी शान के खिलाफ समझता है।

Bijay singh
  • हाइलाइट: Shahpur RTI News
  • क्यों बच रहा शाहपुर नगर पंचायत प्रशासन सूचना देने में…
  • आम आदमी का हक छिन रहा, इसका जिम्मेदार कौन?

आरा। लोकतंत्र की खूबसूरती उसकी पारदर्शिता में निहित होती है। जनता द्वारा चुनी गई सरकारें और उनके अधीन काम करने वाला प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होता है। इसी मूल भावना को साकार करने के लिए देश में सूचना का अधिकार अधिनियम यानी आरटीआई कानून लागू किया गया है।

इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही तय करना था। ताकि देश का आम नागरिक यह जान सके कि उसके पसीने की कमाई से चलने वाला तंत्र किस प्रकार काम कर रहा है।

Shahpur RTI News: कानून की धज्जियां उड़ाने में शाहपुर नगर पंचायत प्रथम

लेकिन विडंबना यह है कि आज भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर नगर पंचायत के अधिकारियों ने इस क्रांतिकारी कानून का मखौल बनाकर रख दिया है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे नगर पंचायत के अधिकारियों ने यह कसम खा रखी हो कि चाहे कुछ भी हो जाए, आरटीआई के तहत किसी भी नागरिक को कोई सटीक सूचना नहीं दी जाएगी। कानून के रखवाले ही जब कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो आम आदमी खुद को ठगा सा महसूस करता है।

नगर पंचायत शाहपुर के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से त्रस्त होकर कई नगरवासियों ने तो अब आरटीआई के तहत आवेदन करना ही पूरी तरह बंद कर दिया है। क्षेत्र के लोग लगातार मीडिया और जिम्मेदार मंचों पर यह शिकायत कर रहे थे कि नगर पंचायत आरटीआई के तहत मांगी जाने वाली सूचनाओं को देने से लगातार कतरा रहा है।

नगर पंचायत की आरटीआई विंग का सच

जब खबरे आपकी टीम द्वारा इस गंभीर शिकायत की तह तक जाने का प्रयास किया गया, तो जो सच्चाई सामने आई वह बेहद चौंकाने वाली थी। पता चला कि नगर पंचायत की आरटीआई विंग में औपचारिकता के लिए रजिस्टर तो मेंटेन किया जा रहा है, लेकिन जनता द्वारा दिए गए आवेदन या तो प्राप्त होते ही फाइलों के अंबार में दफन कर दिए जाते हैं या फिर कूड़ेदान की शोभा बढ़ाते हैं।

संबंधित विभाग के भीतर से ही यह बात छनकर बाहर आई कि कुछ गिने-चुने और खास मामलों को यदि छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर आवेदन बड़ा बाबू की टेबल से आगे बढ़ते ही नहीं हैं।

नगर पंचायत की कार्यशैली पर बड़े सवाल:

आज वर्तमान स्थिति यह है कि नगर में साफ-सफाई की व्यवस्था, सड़कों के निर्माण में हुआ भ्रष्टाचार, भवनों के नक्शा पास करने में बरती गई अनियमितताएं और अन्य विकास कार्यों को लेकर नगर वासियों ने अलग-अलग आरटीआई आवेदन के माध्यम से जानकारियां मांग रखी हैं। संबंधित पक्षकारों ने कई बार लिखित और मौखिक रूप से अधिकारियों को रिमाइंडर भी दिए, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती।

इधर, पूर्व चेयरमैन विजय कुमार सिंह ने कहा कि जनता के बीच अब यह स्पष्ट चर्चा है कि अपनी कारगुजारियों, प्रशासनिक गड़बड़ियों और सरकारी धन के कथित रूप से हुए भारी दुरुपयोग को छिपाने के लिए ही नगर अधिकारी जान-बूझकर जानकारियों को दबाने और छिपाने में लगे हुए हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि यदि फाइलें खुलीं, तो उनकी कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो जाएंगे।

वही, नगर के समाजसेवी रंजीत कुमार गुप्ता उर्फ आजाद गुप्ता ने कहा कि शाहपुर नगर पंचायत 30 दिन के भीतर आरटीआई का जवाब देना अपनी शान के खिलाफ समझता है। आखिर नगर प्रशासन जनता को सच बताने से क्यों डर रहा है?

आरटीआई कानून के जानकार अधिवक्ता संत कुमार के अनुसार आरटीआई अधिनियम के तहत आवेदन करने वाले किसी भी व्यक्ति को तीस दिन की अनिवार्य अवधि के भीतर वांछित सूचना उपलब्ध कराना जरूरी होता है। यदि किन्हीं कारणों से इस अवधि में सूचना नहीं दी जा सकती, तो आवेदक को इस बात की सूचना देनी पड़ती है। इसके बाद आवेदक प्रथम अपील कर सकता है।

शाहपुर नगर पंचायत के अपने ही निराले नियम:

लेकिन इधर, शाहपुर नगर पंचायत के अपने ही निराले नियम हैं। यहां यदि आपको तीस दिन के भीतर सूचना नहीं मिलती है, तो भी आप सीधे द्वितीय अपील में नहीं जा सकते, बल्कि फिर आपको अपनी प्रथम अपील नगर कार्यालय में करनी होती है, जहां से आपको जवाब नहीं मिला है।

यानी आपका आवेदन सोची-समझी रणनीति के तहत साठ दिन तक नगर पंचायत में ही रोके रखा जाता है। यह लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया जानबूझकर बनाई गई प्रतीत होती है ताकि आम आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत ही न जुटा पाए।

क्या हैं कानूनी नियम:

आरटीआई एक्ट 2005 के मुताबिक भारत के प्रत्येक नागरिक को यह मौलिक अधिकार प्राप्त है कि वह देश के किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी विभाग से सूचना मांग सकता है। इसके लिए नागरिक को संबंधित विभाग में एक निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होता है। विभाग की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह उसे तीस दिन के भीतर स्पष्ट जवाब दे।

यदि इस निर्धारित तीस दिन की अवधि के भीतर विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं आता है, या फिर आवेदक प्राप्त सूचना से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह सीधे प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत कर सकता है। इसके बाद भी यदि प्रथम अपील अधिकारी तीस दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देता या आवेदक पुनः असंतुष्ट रहता है, तो वह संबंधित विभाग के राज्य सूचना आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष अपनी बात रखकर न्याय की गुहार लगा सकता है।

ranjna
RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।

Most Popular