Ara City News: जब रामकुमार सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी चंदन सिंह और उसके अन्य सहयोगियों को हथकड़ियों में जकड़कर अदालत और जेल तक पैदल परेड कराया गया, तो शहर की हवा का रुख बदल गया।
- हाइलाइट: Ara City News
- मुख्य आरोपित चंदन सहित तीन अभियुक्तों का हुआ गुंडा परेड
- आरोपियो को गुंडा परेड कराते हुए न्यायालय ले गई पुलिस
- सड़क के दोनों ओर अभियुक्तों को देखने के लिए उमड़ी रही भीड़
- लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की
- कहा: पुलिस के इस कार्रवाई से अपराधियों का गिरेगा मनोबल
- कोलकाता से गिरफ्तार चंदन और अभिषेक को ट्रांजिट रिमांड पर लाया गया आरा
- चंदन और अभिषेक की निशानदेही पर आरा नगर थाना क्षेत्र से पकड़ा गया था टीपू
आरा। पूर्व कस्टम अधिकारी क्षत्रिय कल्याण संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंह की हत्या में मुख्य आरोपित चंदन सिंह सहित तीन अभियुक्तों का पुलिस ने गुंडा परेड कराया। नवादा थाना की पुलिस ने हत्याकांड के मुख्य आरोपी नगर थाना क्षेत्र के बड़की सिंगही गांव निवासी चंदन सिंह, बिंद टोली निवासी अभिषेक यादव और नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा हाउसिंग कॉलोनी निवासी टीपू कुमार को न्यायालय में भेजने से पहले गुंडा परेड कराया।
इस दौरान पुलिस टीम नवादा थाना से तीनों अभियुक्तों को लेकर पैदल करमन टोला, मठिया मोड़, महावीर टोला, रमना रोड होते हुए न्यायालय पहुंची। गुंडा परेड को देखने के लिए सड़क के दोनों और लोगों की भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहे। लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की काफी सराहना की है, कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों का मनोबल गिरेगा। है।
बता दें कि 15 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे कनकपुरी मोहल्ले में मॉर्निंग वॉक पर जाने के लिए घर से निकल रहे क्षत्रिय कल्याण संघ के अध्यक्ष सह पूर्व कस्टम अधिकारी रामकुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। कार निकालने के बाद गैराज में ताला बंद करने के दौरान घात लगाए बाइक सवार बदमाशों की ओर से उन्हें सात से आठ गोलियां मारी गयी थी।
इस मामले में पूर्व अधिकारी के बेटे अमित कुमार उर्फ गोल्डी के बयान पर मुकदमा दर्ज किया गया है। उसमें चंदन सिंह, मुफस्सिल के तत्कालीन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राम कल्याण यादव और राजस्व कर्मचारी विष्णु देव सिंह सहित 14 लोगों को नामजद किया गया है। चंदन सिंह सहित अन्य लोगों पर गोली मारने, जबकि इंस्पेक्टर राम कल्याण एवं राजस्व कर्मचारी विष्णु देव सिंह सहित अन्य लोगों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने घटना के दिन ही एक आरोपित मनोज सिंह उर्फ लकी को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि चंदन और अभिषेक की गिरफ्तारी कोलकाता से हुई। वहीं टीपू को आरा से गिरफ्तार किया गया।
Ara City News : आरा शहर की हवा का रुख बदल गया
आरा नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत जब रामकुमार सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी चंदन सिंह और उसके अन्य सहयोगियों को हथकड़ियों में जकड़कर अदालत और जेल तक पैदल परेड कराया गया, तो शहर की हवा का रुख बदल गया। पिछले डेढ़-दो दशकों से इस प्रकार की सार्वजनिक परेड का चलन लगभग समाप्त हो गया था। परंतु, जब अपराध अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाए और अपराधियों के दिलों से कानून का डर पूरी तरह से गायब हो जाए, तब इस प्रकार के कड़े और असाधारण कदमों की आवश्यकता महसूस होती है।
इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि पर यदि नजर डाली जाए, तो यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि लालच, वर्चस्व और गहरी साजिश का एक खौफनाक जाल था। रामकुमार सिंह, जो समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व और क्षत्रिय कल्याण संगठन के अध्यक्ष के रूप में जाने जाते थे, को मौत के घाट उतार दिया गया। इस निर्मम हत्या के पीछे पांच करोड़ रुपये का जमीन विवाद मुख्य कारण था।
हत्या की इस घटना को अंजाम देने के बाद चंदन सिंह ने कानून की नजरों से बचने के लिए हरसंभव हथकंडा अपनाया। वह अपनी पहचान छुपाने के लिए बार-बार ठिकाने बदल रहा था और अपनी लोकेशन को छिपाने के वास्ते लगातार मोबाइल सिम कार्ड बदल रहा था। लेकिन कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। भोजपुर पुलिस की तकनीकी टीम और खुफिया तंत्र ने दिन-रात एक करते हुए इस शातिर अपराधी की हर गतिविधि पर नजर रखी।
अंततः, अथक प्रयासों के बाद उसे कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट से धर दबोचा गया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने इस हत्याकांड से जुड़े अन्य मोर्चों पर भी सफलता हासिल की। अब तक इस मामले में कुल चार आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा चुका है, जिनमें मुख्य आरोपी चंदन सिंह के अलावा अभिषेक और भूमि के क्रय-विक्रय से जुड़ा अमीन राकेश भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, मनोज उर्फ लक्की नाम के आरोपी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
इस पूरी कार्रवाई का सबसे प्रभावशाली और चर्चित हिस्सा सार्वजनिक गुंडा परेड रही, पुलिस ने इस दौरान मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स का भी सकारात्मक उपयोग किया ताकि यह संदेश दूर-दूर तक पहुंच सके। जब आरोपियों को हाथों में हथकड़ी पहनाकर और चेहरे पर शिकन लिए हुए शहर के मुख्य मार्गों से पैदल गुजारा गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की निगाहें इस दृश्य पर टिक गईं। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह अपराधियों के अहंकार को कुचलने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका था। समाज में यह संदेश स्पष्ट रूप से चला गया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जो लोग बंदूक की नोक पर अपनी धौंस जमाना चाहते हैं, उनका अंत आखिरकार इसी प्रकार की जिल्द और कानूनी शिकंजे में होना तय है।
स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों ने भोजपुर पुलिस की इस साहसिक पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। दशकों बाद देखने को मिले इस दृश्य ने आम जनता में एक नया विश्वास जगाया है। लोगों का मानना है कि इस प्रकार की सख्त और दृश्यमान कार्रवाई से अपराधियों के मन में खाकी का खौफ फिर से पैदा होगा। जब अपराधी यह देखेंगे कि कानून के शिकंजे से बचना नामुमकिन है और सार्वजनिक रूप से इस तरह की फजीहत उठानी पड़ सकती है, तो वे अपराध करने से पहले सौ बार सोचेंगे।









