Santosh Pagal: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के गौरा बहोरनपुर निवासी संतोष पागल की वायरल कहानी। जानिए कैसे एक ब्लॉगर ने मंत्री लखेंद्र पासवान के सामने अपनी बेबसी और पुलिस-प्रशासन के रवैये का पर्दाफाश किया।
- हाइलाइट: Santosh Pagal
- बिहार की माटी में संघर्ष, व्यवस्था और उम्मीद की दास्तान
- भोजपुर के संतोष पागल रोए, संपत्ति हड़पी गई, गार्ड ने पीटा
- मंत्री का आश्वासन, 90 का दौर नहीं, उनकी पैरवी कर दी है
आरा। भोजपुर की भूमि अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ अपने जुझारू लोगों के लिए पूरे देश में जानी जाती है। इसी पावन धरती के शाहपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गौरा बहोरनपुर गांव के रहने वाले संतोष कुमार, जिन्हें लोग आत्मीयता और कभी-कभी उपहास में ‘संतोष पागल’ के नाम से पुकारते हैं, इन दिनों सुर्खियों में हैं। संतोष पेशे से एक ब्लॉगर हैं जो अपने अनोखे अंदाज से लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि जो शख्स दूसरों को हंसाने का हुनर रखता है, आज उसकी अपनी जिंदगी आंसुओं और संघर्षों के भंवर में उलझी हुई है।
संतोष पागल की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना है जहाँ आम आदमी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होता है। अब संतोष का एक वीडियो और उनकी मंत्रियों से गुहार का प्रसंग काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी बेबसी की ऐसी दास्तान सुनाई जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए।
Santosh Pagal: विरासत की लड़ाई और अपनों की बेरुखी
संतोष की यह कहानी केवल प्रशासनिक उदासीनता की नहीं है, बल्कि पारिवारिक उपेक्षा की भी एक दर्दनाक गाथा है। पारिवारिक कलह और संपत्ति के विवाद ने संतोष की जिंदगी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। संतोष के अनुसार, उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी, जिससे उन्हें तीन बच्चे और हुए। इसी पारिवारिक फेरबदल का फायदा उठाते हुए उनकी सारी पैतृक संपत्ति को हड़प लिया गया।
एक युवा जो डिजिटल माध्यमों से अपनी आजीविका चलाने की कोशिश कर रहा है और लोगों को हंसाता है, वह आज अपनी ही पुश्तैनी जमीन और हक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। अपनों के द्वारा दिए गए धोखे और संपत्ति से बेदखल किए जाने के बाद संतोष ने जब कानून और प्रशासन की शरण लेनी चाही, तो उन्हें वहां से सिर्फ निराशा और अपमान ही हाथ लगा।
प्रशासनिक दरवाजे के बाहर तैनात गार्डों की बेरुखी
न्याय पाने की उम्मीद में जब संतोष जिलाधिकारी यानी डीएम कार्यालय पहुंचे, तो वहां का अनुभव उनके लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था। उनके नाम के साथ जुड़े ‘पागल’ संबोधन ने उनके लिए प्रशासनिक दफ्तरों के दरवाजे बंद कर दिए। संतोष का दर्द तब छलक उठा जब उन्होंने बताया कि कार्यालय के बाहर तैनात गार्ड उन्हें केवल इसलिए अंदर नहीं जाने देते क्योंकि वे उन्हें सचमुच का मानसिक रूप से विक्षिप्त या ‘पागल’ समझ बैठे हैं।
संतोष का यह आरोप बेहद गंभीर है कि एक नागरिक होने के नाते जब वे अपनी फरियाद लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचते हैं, तो उन्हें गार्डों द्वारा भगा दिया जाता है, पीटा जाता है और यहाँ तक कि उनके फोन नंबर को भी ब्लॉक कर दिया गया है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में यदि किसी नागरिक की सुध लेने वाला कोई न हो और उसके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार हो, तो यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
मंत्री लखेंद्र पासवान के दरबार में न्याय की गुहार
इस पूरी व्यवस्था के बीच संतोष की उम्मीद की एक किरण तब जगी जब उनका सामना बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान से हुआ। मंत्री के सामने पहुंचते ही संतोष अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और फफक-फफक कर रो पड़े। उन्होंने मंत्री से बेहद दर्द भरे शब्दों में कहा कि मंत्री जी, मेरे पीछे इस दुनिया में कोई नहीं है, कृपया मेरी मजबूरी को समझिए। मुझे सचमुच का पागल घोषित कर दिया गया है।
संतोष ने मंत्री को अपनी आपबीती सुनाई कि कैसे उन्हें हर जगह से दुत्कार मिल रही है और कोई भी अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। इस दौरान मंत्री लखेंद्र पासवान ने संवेदनशीलता दिखाते हुए संतोष की बात को ध्यान से सुना। मंत्री ने उन्हें आश्वस्त करते हुए बताया कि उन्होंने संतोष का आवेदन पहले ही पढ़ लिया है, जिसमें उनके पिता की दूसरी शादी और संपत्ति हड़पे जाने का पूरा विवरण दर्ज है।
90 का दौर नहीं, मंत्री का आश्वासन
संतोष की पीड़ा सुनने के बाद मंत्री लखेंद्र पासवान ने उन्हें ढांढस बंधाया और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए भरोसा दिलाया कि अब पुरानी व्यवस्था खत्म हो चुकी है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब 90 के दशक वाली बात नहीं है कि कोई आम आदमी की फरियाद न सुने। उन्होंने मौके पर ही संबंधित एसपी को फोन कर निर्देश देने की बात कही और संतोष को आश्वस्त किया कि दो मिनट पहले ही उन्होंने उनकी पैरवी कर दी है।
मंत्री ने संतोष से कहा कि वे जाकर संबंधित अधिकारियों से मिल लें, इस सरकार में सबकी बात सुनी जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, संतोष का डर और उनका जख्म इतना गहरा था कि उन्होंने मंत्री के सामने ही अपने कपड़े हटाकर अपनी पीठ के जख्म दिखाए और कहा कि अपने तो कह दिया है सर, लेकिन वहां मुझे किस तरह पीटा गया है, इसे भी देखिए।
संतोष की इस जिद और उनके शरीर पर मौजूद पिटाई के निशान को देखकर मंत्री ने उन्हें शांत कराया और कहा कि वे जाकर मिलें, यदि इसके बाद भी कोई उनकी बात नहीं सुनता है, तो वे अगले समय आकर फिर से उन्हें बताएं। मंत्री ने विश्वास दिलाया कि इस सरकार में न्याय मिलेगा और सबको प्रशासन की बात सुननी ही होगी।


