Homeअन्यट्रेंडिंग न्यूजभरत तिवारी कथित एनकाउंटर के तीन महीने पूरे: परिजनों को न्याय की...

भरत तिवारी कथित एनकाउंटर के तीन महीने पूरे: परिजनों को न्याय की आस

Bharat Tiwari: विस्थापितों की आवाज उठाने वाले भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को हुई कथित मुठभेड़ में मौत के बाद न्यायिक जांच आयोग का गठन तो हुआ, लेकिन पीड़ित परिवार अब भी कार्रवाई और न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

  • हाइलाइट: Bharat Tiwari
  • जवइनियां के विस्थापितों की बदहाल जिंदगी

शाहपुर/आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के जवइनियां गांव के विस्थापितों के संघर्ष और भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को आज तीन महीने पूरे हो गए हैं। 17 जून 2026 को बिलौटी गांव में हुई उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। उस समय उम्मीद की जा रही थी कि भरत तिवारी का बलिदान प्रशासन की नींद खोलेगा और जवइनियां के विस्थापितों के जीवन में सुधार आएगा। लेकिन आज तीन महीने बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।

Bharat Tiwari: परिजनों को न्याय का इंतजार

भरत भूषण तिवारी उन विस्थापितों के लिए एक मजबूत आवाज थे, उनके हक की लड़ाई लड़ रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद मचे बवाल के मद्देनजर न्यायिक जांच आयोग का गठन तो किया गया, लेकिन आज पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीण न्याय की बाट जोह रहे हैं। परिजनों को अब भी उस दिन का इंतजार है जब उन्हें न्याय मिलेगा।

जवइनियां के विस्थापितों का दर्द आज भी गहरा है

गंगा कटाव के बाद जवइनियां से विस्थापित कर बिलौटी गांव के जलजमाव वाले क्षेत्र में बसाए गए करीब 70 परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। बिलौटी गांव के दक्षिणी हिस्से में कच्ची झोपड़ियों में रह रहे लोग एक अमानवीय जीवन जीने को मजबूर हैं। विस्थापितों का कहना है कि न तो उनके पास खाने-पीने का उचित प्रबंध है और न ही उनकी कोई सुध लेने वाला है। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से समय-समय पर किए गए आश्वासन अब तक धरातल पर दिखाई नहीं दिए हैं।

प्रशासनिक दावों और धरातल की हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ समय पूर्व अधिकारियों द्वारा मिट्टी भराई का वादा किया गया था। लेकिन विस्थापितों का कहना है कि ये दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। धरातल पर न तो विकास की कोई योजना पहुंची है और न ही प्रशासन ने उनकी मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान दिया है।

जवइनियां के इन विस्थापितों की स्थिति दयनीय है। वे आज भी मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं और उनका जीवन पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रहा है। भरत तिवारी के जाने के बाद मानो उनकी आवाज को कुचल दिया गया है। उन 70 परिवारों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए, जिनके लिए भरत तिवारी ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

Khabre Apki
Khabre Apki
Khabre Apki covers all Breaking News in Hindi

Most Popular