Cyclone Arnab impacts: भोजपुर के बिहिया और शाहपुर सहित अन्य क्षेत्रों में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से तीन दिनों से बारिश हो रही है। जलजमाव और तेज हवा से धान व सब्जियों की फसल पर नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
- हाइलाइट:Cyclone Arnab impacts
- बिहिया प्रखंड में करीब 6,375 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है।
- लगातार बारिश और तेज हवा से तैयार धान की फसल गिरने लगी।
- कटेया गांव में पालक और अन्य सब्जियों के खेतों में पानी जमा।
बिहिया/आरा। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से भोजपुर जिले के बिहिया, शाहपुर समेत कई प्रखंडों में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। कभी मूसलाधार तो कभी रुक-रुककर हो रही बारिश के साथ चल रही ठंडी हवाओं ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
बारिश के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की कई सड़कें कीचड़मय हो गई हैं। खेतों में पानी जमा होना शुरू हो गया है। सामान्य दिनों की तुलना में बाजारों और सड़कों पर लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
Cyclone Arnab impacts: बाजार और आवागमन प्रभावित
लगातार बारिश के चलते बिहिया बाजार की चहल-पहल पर भी असर पड़ा है। सड़कों पर छाता लेकर लोग आते-जाते नजर आ रहे हैं। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण लोग घरों में ही रहना पसंद कर रहे हैं।
बिहिया रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की संख्या में कमी देखने को मिल रही है। बाजारों में दुकानदार ग्राहकों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार आने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है।
धान की तैयार फसल को नुकसान का खतरा
बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में तैयार धान की फसल गिरने लगी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। बिहिया प्रखंड में करीब 6,375 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। ऐसे में लगातार बारिश जारी रहने पर किसानों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
कई इलाकों में खेतों में जलजमाव की स्थिति बन गई है। पानी जमा होने और तेज हवा चलने से तैयार फसल के गिरने की आशंका बढ़ गई है। यदि बारिश का दौर जारी रहा तो धान की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
पिछले साल भी हुआ था नुकसान
किसानों का कहना है कि पिछले साल भी धान कटाई के समय हुई बारिश से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस वर्ष भी कटाई से पहले बारिश शुरू हो जाने के कारण किसानों के सामने एक बार फिर वैसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई है।
किसानों को डर है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो खेतों में गिरी फसल को काटने और सुरक्षित रखने में परेशानी होगी। खेतों में पानी जमा रहने से फसल के सड़ने का खतरा भी बना हुआ है।
सब्जियों की खेती पर भी संकट
चक्रवाती तूफान के असर से सब्जी उत्पादक किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। कटेया गांव में पालक की खेती वाले खेतों में पानी जमा होने से फसल खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।
वहीं, ओसाईं और गंज क्षेत्र में धान की तैयार फसल पर भी बारिश का प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके अलावा लौकी की खेती में जलजमाव के कारण पौधों की जड़ें सड़ने की आशंका है। अधिक नमी के कारण लौकी के फूल झड़ने से उत्पादन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
रबी फसलों की तैयारी भी प्रभावित
लगातार बारिश का असर केवल खरीफ फसलों तक सीमित नहीं है। अक्टूबर-नवंबर में होने वाली आलू, चना, मटर और सरसों की बुवाई की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
किसानों के अनुसार, खेतों में अधिक नमी और जलजमाव रहने से रबी फसलों की बुवाई समय पर करना मुश्किल होगा। यदि खेतों से पानी जल्द नहीं निकला तो बुवाई में देरी हो सकती है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
मौसम साफ होने का इंतजार
फिलहाल किसानों की नजर मौसम के मिजाज पर टिकी हुई है। किसान बारिश थमने और धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में जमा पानी निकल सके और तैयार फसल की कटाई शुरू की जा सके।
किसानों की मांग पर पूर्व विधायक भाई दिनेश ने प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन कराने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।










