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फर्जी आधार बनाने वाले गिरोह का बिहार पुलिस ने किया खुलासा

Fake Aadhaar Cards: फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो शातिर गिरफ्तार और भारी मात्रा में उपकरण बरामद

  • हाइलाइट: Fake Aadhaar Cards
  • लैपटॉप-03 ,आईरीस मशीन-01, Cloned Fingerprint -03, Biometric Fingerprint Machine-01बरामद

आरा। भोजपुर साइबर थाना पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा किया है, जो आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया को हैक कर अवैध रूप से फर्जी आधार कार्ड बनाने और उनमें संशोधन करने का काम कर रहा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं।

Fake Aadhaar Cards: भोजपुर साइबर थाना में वादी ने दर्ज कराई शिकायत

मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को हुई, जब भोजपुर साइबर थाना में एक पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई। पीड़ित ने बताया कि उनकी आधार ऑपरेटर आईडी और फिंगरप्रिंट को हैक कर लिया गया है और उनकी आईडी का उपयोग करके पूरे बिहार में अवैध रूप से आधार कार्ड बनाने का काम किया जा रहा है। इस गंभीर शिकायत को संज्ञान में लेते हुए भोजपुर साइबर पुलिस ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और जांच शुरू की।

डीएसपी स्नेह सेतु ने इस गिरोह का किया खुलासा

भोजपुर साइबर थाना के डीएसपी स्नेह सेतु ने इस गिरोह के कार्य करने के तरीके (मॉडस ऑपरेंडी) का खुलासा करते हुए बताया कि ये अपराधी एमकेएस कंपनी के पंजीकृत आधार ऑपरेटरों को निशाना बनाते थे। गिरोह ने ऑपरेटरों के यूजरनेम, पासवर्ड और फिंगरप्रिंट को क्लोन कर लिया था, जिससे वे अनधिकृत स्थानों से भी आधार पोर्टल में लॉगिन करने में सक्षम थे। इन क्लोन फिंगरप्रिंट्स और आईडी के जरिए न केवल फर्जी आधार बनाए जा रहे थे, बल्कि आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) का दुरुपयोग करके लोगों के बैंक खातों से अवैध निकासी भी की जा रही थी।

भोजपुर, दरभंगा और मधुबनी जिलों में एक साथ छापेमारी

पुलिस की विशेष टीम ने भोजपुर, दरभंगा और मधुबनी जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान मोहम्मद फुलहसन (निवासी- गयारी, बिरौल, दरभंगा) और संजय कुमार सिंह उर्फ रिंटू सिंह (निवासी- रजेया, पीरो, भोजपुर) के रूप में हुई है।

बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड बनाने के मिले प्रमाण

पुलिस ने छापेमारी के दौरान व्यापक तकनीकी साक्ष्य और उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें तीन लैपटॉप, एक आईरिस मशीन (आंखों की पुतली स्कैन करने वाली), तीन क्लोन फिंगरप्रिंट और एक बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन शामिल है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपियों के लैपटॉप में यूआईडीएआई की वेबसाइट के सोर्स कोड में संदिग्ध छेड़छाड़ की गई थी। संदेह है कि इस कोडिंग का उपयोग करके वे बिना किसी वास्तविक बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट या रेटिना) के आधार पोर्टल में लॉगिन करने और फर्जी प्रविष्टियां करने में सफल हो रहे थे।

पुलिस द्वारा पकड़े गए लैपटॉप में बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड बनाने के प्रमाण मिले हैं। वर्तमान में पुलिस इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और इस अवैध गतिविधियों से जुड़े व्यापक नेटवर्क की तलाश में जुटी है। पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी बायोमेट्रिक जानकारी और आधार संबंधित दस्तावेजों को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा न करें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत स्थानीय साइबर थाना को दें।

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