HomeNewsबिहारअब पकड़ा जाएगा फर्जी केवला और नकली वंशावली, नहीं चलेगा तिकड़म

अब पकड़ा जाएगा फर्जी केवला और नकली वंशावली, नहीं चलेगा तिकड़म

fake Kevala and genealogy: राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि उन्हें बार-बार निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए, क्योंकि मैं बोलूंगा तो उसके बाद फिर कहर ढहेगा।

  • हाइलाइट: fake Kevala and genealogy
  • रजिस्टर-2 के पन्ने फाड़ने या सरकारी रिकॉर्ड गायब करनेवाले जमीन माफियाओं पर नकेल
  • जमीन के मूल रिकॉर्ड का सुरक्षित डिजिटल बैकअप विभाग के पास मौजूद, नहीं होगी हेराफेरी

पटना। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जमीन के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने वाले और फर्जी वंशावली के आधार पर सरकारी तंत्र को गुमराह करने वाले तत्वों की खैर नहीं है। मंत्री का सख्त रुख और विभाग द्वारा अपनाई जा रही तकनीकी प्रणाली से न केवल वर्षों से लंबित पड़े जमीन विवादों का निपटारा होगा, बल्कि माफिया राज का भी खात्मा होगा।

fake Kevala and genealogy: जमीनी हकीकत और मंत्री का विजन

राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने अपने पूर्व के कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने पहली बार विभाग संभाला था, तब राज्य में 100 वर्षों के बाद, सीएस सर्वे और रिवीजनल सर्वे के बाद के सर्वे के लिए उस समय 11 हजार से अधिक अमीनों की बहाली कर करीब डेढ़ करोड़ से अधिक परिवारों का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। उस दौरान यह डर फैलाया गया था कि यदि समय रहते सर्वे नहीं हुआ तो जमीन पर हक खत्म हो जाएगा, लेकिन विभाग ने उस स्थिति को संवेदनशीलता और कुशलता के साथ संभाला।

मंत्री ने स्वीकार किया कि बिहार में जमीन विवाद एक बड़ी चुनौती है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल भूमि का मात्र 15 से 16 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तविक विवादों के दायरे में आता है। शेष भूमि परिवारों के बीच आपसी समझ और सहमति का विषय है। इन विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने अब पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है।

डिजिटलीकरण से माफियाओं पर नकेल

जमीन माफियाओं द्वारा अक्सर रजिस्टर-2 के पन्ने फाड़ने या सरकारी रिकॉर्ड गायब करने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस कुचक्र को तोड़ने के लिए करोड़ों पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड्स की स्कैनिंग करवाई गई है, जो अब सुरक्षित रूप से पटना स्थित मुख्यालय में डिजिटल रूप में मौजूद हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि आज कोई माफिया किसी रजिस्टर के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी करता है, तो भी उसे कोई लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि मूल रिकॉर्ड का सुरक्षित डिजिटल बैकअप विभाग के पास मौजूद है। जो जमीन के रिकॉर्ड के साथ होने वाली हेराफेरी पर पूर्णविराम लगाने के लिए पर्याप्त है।

भ्रष्टाचार और मिलीभगत के प्रति जीरो टॉलरेंस

पूर्व में अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि विभाग के भीतर के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर किया जाता था। मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस पर कड़ा प्रहार करते हुए विभागीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें बार-बार निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए, क्योंकि मैं बोलूंगा तो उसके बाद फिर कहर ढहेगा।

फर्जी वंशावली और तिकड़मों का अंत

फर्जी कागजात बनाकर जमीन हड़पने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं बचेगी। कंप्यूटरीकरण के माध्यम से अब हर रिकॉर्ड को एक ऐसे सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, जहाँ बिना पुख्ता सबूत और डिजिटल सत्यापन के कोई भी फेरबदल संभव नहीं होगा।

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