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धर्मपत्नी की तीसरी पुण्यतिथि पर पूर्व मंत्री को हुई आत्मग्लानि

Vimla Ji – Shivanand : धर्मपत्नी की तीसरी पुण्यतिथि पर वरीय नेता शिवानंद तिवारी को हुई आत्मग्लानि, भावनाओं को साझा किया।

jay kumar
  • हाइलाइट: Vimla Ji – Shivanand
  • स्मृतियों के गलियारे में अपने जीवनसाथी विमला जी को भावभीनी श्रद्धांजलि: शिवानंद

पटना। जीवन की आपाधापी में कई बार हम उन तिथियों को विस्मृत कर देते हैं जो हमारे व्यक्तिगत इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ी होती हैं। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय विमला जी की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर कुछ इसी प्रकार की आत्मग्लानि और गहन आत्ममंथन भरी भावनाओं को साझा किया। उनका यह संस्मरण न केवल एक जीवनसाथी के प्रति समर्पित है, बल्कि यह उस अटूट बंधन की गाथा है।

Vimla Ji – Shivanand: एक मानवीय भूल और स्मृति का अंतहीन प्रवाह

शिवानंद तिवारी ने स्वीकार किया कि व्यस्तताओं के बीच पुण्यतिथि का ध्यान न रह पाना उनके लिए एक भारी अहसास की तरह था। लेकिन जैसे ही फेसबुक के माध्यम से उन्हें यह स्मरण हुआ कि विमला जी को गए तीन वर्ष बीत चुके हैं, उनके मन के भीतर भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तिथियों का विस्मृत होना किसी भी प्रकार से विमला जी की स्मृति के धुंधलाने का संकेत नहीं है। जो जीवनसंगिनी दशकों तक संघर्ष के हर उतार-चढ़ाव में परछाईं बनकर साथ रही हो, उसे याद करने के लिए किसी पंचांग की आवश्यकता नहीं होती। वे उनके जीवन के उस हर पन्ने पर अंकित हैं, जहाँ जीत और हार का लेखा-जोखा मौजूद है।

विवाह का वह दौर और अनिश्चितताओं की ईमानदारी

अपनी शादी की यादों को साझा करते हुए तिवारी जी ने उस समय की सामाजिक व्यवस्था और पारिवारिक दबावों का जिक्र किया। आज की पीढ़ी के लिए यह सोचना कठिन हो सकता है कि कभी विवाह का निर्णय पूरी तरह से अभिभावकों के हाथों में होता था। अपने बाबूजी के उपवास और भारी दबाव के कारण जब वे विवाह के लिए राजी हुए, तो उनका मन फिर भी स्वीकार नहीं कर पा रहा था। यहाँ तक कि उन्होंने ससुराल पक्ष को एक पत्र लिखकर अपनी अनिश्चितताओं और संघर्षपूर्ण जीवन के प्रति सचेत किया था।

यह विमला जी के परिवार की दूरदर्शिता और उनकी समझदारी ही थी कि उन्होंने तिवारी जी की इस स्पष्टवादिता को उनकी ईमानदारी का प्रतीक माना। आज पीछे मुड़कर देखने पर यह स्पष्ट होता है कि विमला जी का उनके जीवन में प्रवेश वास्तव में उनके व्यक्तित्व के एक सकारात्मक रूपांतरण की शुरुआत थी।

सब केहु से रउआ हमेशा लड़ते रहे के बा

शिवानंद तिवारी का जीवन राजनीतिक और वैचारिक संघर्षों की एक लंबी यात्रा रहा है। वे अपनी विचारधारा से समझौता करने के विरुद्ध रहे हैं, जिसके कारण उन्हें अक्सर कठिन दौर से गुजरना पड़ा। विमला जी के साथ उनका रिश्ता महज एक सामाजिक अनुबंध नहीं था, बल्कि एक ऐसा संबल था जिसने उनके अशांत मन को स्थिरता प्रदान की। विमला जी का वह कथन, सब केहु से रउआ हमेशा लड़ते रहे के बा, उनकी चिंता और प्रेम का ही एक रूप था।

भले ही उन्हें तिवारी जी के निरंतर संघर्षों से शिकायत रही हो, लेकिन उन्होंने कभी उस संघर्ष को अपना बोझ नहीं बनने दिया। वे चट्टान की तरह खड़ी रहीं, जिससे तिवारी जी को विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की ताकत मिली। एक पत्नी, एक समर्थक और एक धैर्यवान साथी के रूप में विमला जी ने उनके जीवन के रिक्त स्थानों को अपनी शालीनता से भरा।

अधूरापन और प्रेरणा का अहसास

विमला जी की बीमारी के अंतिम क्षणों में पूछे गए उस प्रश्न ने कि मेरे बिना आप कैसे रहेंगे, आज भी तिवारी जी के अंतर्मन को झकझोर देता है। यह प्रश्न केवल एक जिज्ञासा नहीं थी, बल्कि एक जीवनसाथी की अपने साथी के प्रति गहरी चिंता थी। तीन वर्ष बीतने के बाद आज तिवारी जी यह महसूस करते हैं कि समय का पहिया चाहे कितनी भी गति से चले, किसी की कमी की टीस कभी कम नहीं होती।

Bijay singh
RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।

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