Thursday, April 3, 2025
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आरा: बम ब्लास्ट कांड में लंबू शर्मा की फांसी की सजा बरकरार

Ara Bomb Blast case: अररिया जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरा कोर्ट लाया गया था लंबू शर्मा

  • 23 जनवरी, 2015 को कोर्ट हाजत के समीप हुआ था बम विस्फोट
  • लंबू शर्मा को 2019 में आरा कोर्ट से फांसी की सजा हुई थी

Bihar/Ara: बहुचर्चित आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट कांड के मुख्य अभियुक्त कुख्यात लंबू शर्मा की फांसी की सजा बरकरार रही। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दुबारा सुनवाई में आरा की अदालत ने उसकी सजा बहाल रखी है। एडीजे-8 वीरेंद्र चौबे की अदालत की ओर से बुधवार को सजा का एलान किया गया।

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बम कांड(Ara Bomb Blast case) में लंबू शर्मा को 2019 में आरा के कोर्ट से फांसी की सजा हुई थी। इसके खिलाफ लंबू शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व की सजा पर अलग से चार्ज करने का आदेश निचली अदालत को दिया गया था।

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उस आदेश के आलोक में आरा के अष्टम अपर जिला व सत्र न्यायालय की ओर से पिछले साल दो नवंबर को उसके खिलाफ नये सिरे से आरोप गठित किया गया था। उस मामले में बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट की ओर से लंबू शर्मा को पूर्व में दी गयी फांसी की सजा बहाल रखी गयी। सुनवाई के दौरान पीपी नागेश्वर दूबे, एपीपी प्रशांत रंजन और नागेंद्र सिंह की ओर से बहस की गयी। उस दौरान लंबू शर्मा भी कोर्ट में मौजूद था। उसके लिए उसे अररिया जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरा कोर्ट लाया गया था।

आठ साल पहले 23 जनवरी, 2015 को आरा सिविल कोर्ट परिसर स्थित हाजत के समीप बम विस्फोट हुआ था। उसमें भोजपुर पुलिस के जवान अमित कुमार शहीद हो गये थे। वहीं बम लेकर पहुंची यूपी की महिला नगीना देवी की भी मौत हो गयी थी। उसके चिथड़े उड़ गये थे। विस्फोट में 15 लोग घायल हो गये थे। बम विस्फोट के बाद जेल से पेशी के लिए लाए गए कुख्यात अपराधी लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय फरार हो गये थे। उस मामले में पीरो के गांधी चौक निवासी लंबू शर्मा और नोनार के अखिलेश उपाध्याय सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

जांच में रिकू यादव, चांद मियां, नईम मियां, अंशु कुमार, प्रमोद सिंह व श्याम विनय शर्मा सहित अन्य लोगों का नाम आया था। सुनवाई के बाद 20 अगस्त, 2019 को लंबू शर्मा को फांसी, जबकि रिकू यादव, चांद मियां, नईम मियां, अंशु कुमार, प्रमोद सिंह व श्याम विनय शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इनमें प्रमोद सिंह की मौत हो चुकी है।

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