Sunday, July 14, 2024
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आरा लोकसभा: यदुवंशी, कुशवंशी और नये परिसीमन के बाद रघुवंशी समाज का कब्जा

Ara Lok Sabha MP: – पहले आमचुनाव से ले 2004 के चुनाव तक केवल एक बार छोड़ यहां या तो यदुवंशी का कब्जा रहा या फिर कुशवंशी का। नये परिसीमन के बाद हुए पिछले दोनों चुनावों में यहां रघुवंशी समाज के प्रतिनिधि की जीत हुई है

  • आरा लोकसभा- हाइलाइट
    • यदुवंशी का कब्जा रहा या फिर कुशवंशी का
    • नये परिसीमन के बाद रघुवंशी समाज का कब्जा
    • एक बार अतिपिछड़ा वर्ग से जीते रामनरेश प्रसाद

Ara Lok Sabha MP आरा: देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम (1857 की क्रांति) के अमर योद्धा बाबू वीर कुंवर सिंह की ऐतिहासिक धरती राजनीतिक रूप से काफी उर्वर रही है। देश के पहले दलित डिप्टी पीएम जगजीवन बाबू व पहली महिला लोकसभा स्पीकर के रूप में उनकी बिटिया मीरा कुमार और लोस में पहले प्रतिपक्ष के नेता रामसुभग सिंह इसी माटी की उपज रहे हैं तो यहां के पहले सांसद बलिराम भगत लोस स्पीकर भी बने। 1952 के पहले आम चुनाव से ले 1971 तक पांच चुनावों में यहां कांग्रेस का कब्जा रहा तो भगत ही लगातार सांसद चुने जाते रहे। 1977 में कांग्रेस का खूंटा यहां से पहली बार उखड़ा। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर में कांग्रेस यहां आखिरी बार जीती। 1989 में वीपी सिंह की लहर के बावजूद बहुकोणीय मुकाबले में पहली बार आईपीएफ (भाकपा माले) ने यहां जीत दर्ज की।

इसके बाद से 2009 तक जनता दल या इसमें टूट के बाद बने राजनीतिक दलों राजद, समता पार्टी या जदयू ने ही बारी-बारी से परचम लहराया। आजादी के बाद 2014 के चुनाव में पहली बार यहां कमल खिला। 2014 में आरा लोकसभा सीट से बीजेपी के राजकुमार सिंह (आरके सिंह) ने आरजेडी के दिग्गज भगवान सिंह कुशवाहा को चुनावी मैदान में मात दी थी। 2019 में एक बार फिर इस सीट पर फिर बीजेपी का कमल खिला और आरके सिंह ने भाकपा माले उम्मीदवार राजू यादव को हराया। अब देखना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में क्या बीजेपी इस सीट से जीत की हैट्रिक लगा पाती है या नहीं।

Ara Lok Sabha MP- 1980 तक यहां केवल दो सांसद चुने गये और अस्सी के बाद से हर बार बदलते रहे सांसद

यह अजीब संयोग है कि 1980 तक यहां केवल दो सांसद चुने गये और अस्सी के बाद से हर बार सांसद बदलते रहे हैं। 1952 से 1971 तक कांग्रेस के बलिराम भगत लगातार पांच बार व 1977 व 80 में क्रमश: भारतीय लोक दल व जनता पार्टी सोशलिस्ट से चंद्रदेव वर्मा लगातार दो बार चुनाव जीते। इसके बाद से ही यहां कोई भी सांसद लगातार दो बार चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा है। यहां तक कि 1996 से 99 तक तीन सालों में तीन चुनाव हुए और तीनों ही बार सांसद बदल गये। बदलाव यह मिथक कब टूटता है, इसका इंतजार है।

जातीय समीकरण यहां हमेशा से हावी रहे हैं। विभिन्न जातियों में रस्साकशी देखने को मिलती रही है। पहले आमचुनाव से ले 2004 के चुनाव तक केवल एक बार छोड़ यहां या तो यदुवंशी का कब्जा रहा या फिर कुशवंशी का। सिर्फ 1989 के बहुकोणीय मुकाबले में यहां अतिपिछड़ा वर्ग से आईपीएफ उम्मीदवार रामनरेश प्रसाद की जीत हुई थी। नये परिसीमन के बाद हुए पिछले दोनों चुनावों में यहां रघुवंशी समाज के प्रतिनिधि की जीत हुई है। हालांकि पहले भी जीत-हार में अन्य जातियां भूमिका निभाती रही थीं।

2008 में न्या परिसीमन – सात विधानसभा को समेटे हुए है आरा लोकसभा

2008 में नये परिसीमन के बाद से आरा संसदीय क्षेत्र भोजपुर जिले के सभी सात विधानसभा क्षेत्रों को समेटे हुए है। 2020 विधानसभा चुनाव में दो सीटों को छोड़कर सभी पर महागठबंधन ने जीत हासिल की थी। अगिगांव और तरारी से सीपीआई (एमएल) (एल), संदेश, जगदीशपुर और शाहपुर से आरजेडी जबिक आरा और बड़हरा विधानसभा सीट बीजेपी के खाते में गई थी।

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