- हाइलाइट: Bhaie Dinesh – Jawania
- जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने कहा
- केवल अस्थाई व्यवस्था जैसे टेंट लगाना या खाना खिलाना पर्याप्त नहीं
- पीड़ितों को ₹1,20,000 की राशि पर्याप्त नहीं है, यह केवल एक ‘झुनझुना’ है
बिहार,आरा। जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने कहा कि शाहपुर अंचल के जवैनिया गांव में कई लोगों से उनकी बातचीत हुई और यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि इतनी भीषण आपदा के बावजूद सरकार की ओर से कहीं भी कोई चिंता नहीं दिखाई दे रही है। सैकड़ों घर गंगा में विलीन हो गए हैं, लेकिन सरकार का कोई भी मंत्री पीड़ित परिवारों से मिलने तक नहीं आया। सरकार का दायित्व और कर्तव्य बनता है कि वह कटाव पीड़ित जवैनिया गांव के लोगों को अस्थाई टेंट जैसे व्यवस्था से पूरी तरह से सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करे।
भाई दिनेश ने यह भी कहा कि सरकार को इस स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए। अभी तक कई घर विलीन हो चुके हैं। सरकार को एक बड़ा और ठोस प्लान बनाना चाहिए। सरकार द्वारा कटाव पीड़ितों को केवल एक लाख, बीस हजार रुपये देकर नहीं छोड़ना चाहिए। यह एक गंभीर मुद्दा है। एक लाख बीस हजार रुपये में कोई घर नहीं बना सकता।
भाई दिनेश ने कहा की उन्होंने देखा कि कई अच्छे मकान गिर गए हैं। इसलिए, सरकार ने जिस प्रकार एमपी और एमएलए को पटना में घर बनाने का काम किया गया है। उसी प्रकार जवैनिया गांव के कटाव पीड़ितों को मकान बनाकर दें । यह देश के नागरिक है, और इन लोगों के टैक्स से ही सरकार चलती है। इस आपदा की स्थिति में सरकार का यह धर्म और कर्तव्य बनता है। चाहे वह भारत सरकार हो या बिहार सरकार।
Bhaie Dinesh – Jawania – PM-CM से जवैनिया गांव का दौरा करने की अपील
उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को कहा वे बिहार के अन्य क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, लेकिन जवैनिया गांव का दौरा नहीं किया। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील की कि उन्हे एक बार जवैनिया गांव का दौरा करना चाहिए। कटाव पीड़ित लोगों का दुख और दर्द समझना चाहिए। जिन लोगों के घर विलीन हुए हैं, या इस पूरे गांव के लोगों को सुरक्षित जगह पर नए गांव की तरह बसाना चाहिए, ताकि लोग सुरक्षित और सुविधाजनक जीवन जी सकें।
भाई दिनेश ने कहा कि शाहपुर नगर पंचायत में या किसी अच्छे स्थान पर इनको बसा कर सड़क, बिजली, पानी, और बच्चों के पढ़ाई के लिए स्कूल की व्यवस्था करनी चाहिए, तभी जनतंत्र मजबूत होगा जब आम आदमी की जान की कीमत समझी जाएगी। सरकार जिस तरह से एमएलए और एमपी को घर बनाकर देती है, उसी तरह से जवैनिया गांव के हर परिवार को भी घर बनाकर दे।
भाई दिनेश ने कहा की नए गांव का नाम जवैनिया ही रखा जाए। जिस गांव में लोग पैदा हुए, जिस नाम से उनकी यदें हैं, उसी नाम से उन्हे जाने जाएं। भले ही उनकी धरती छीन ली गई हो, लेकिन उनका नाम और पहचान नहीं छिननी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अस्थाई व्यवस्था जैसे टेंट लगाना या खाना खिलाना पर्याप्त नहीं है। तुरंत एक दीर्घकालिक योजना होनी चाहिए। भविष्य की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। यह समय है कि सरकार अपने कर्तव्यों को समझे और लोगों की मदद के लिए आगे आए।


