Tuesday, January 20, 2026
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भोजपुर बक्सर एमएलसी चुनाव: उम्मीदवारों ने झोंकी ताक़त

Bhojpur Buxar MLC election:क्या है भोजपुर बक्सर एमएलसी चुनाव में पर्दे के पीछे का सच


खबरे आपकी बिहार पटना बिहार विधान परिषद चुनाव में निकायों से चुने जाने वाले उम्मीदवार विधान पार्षद यानी MLC बनेंगे। इस चुनाव में किसी तरह की पोस्टरबाजी, जुलूस, रैली आदि का आयोजन नहीं होता हैं। इसलिए आयोग भी मानता है कि इसमें किसी तरह का खर्च नहीं होता। इसलिए विधान सभा चुनाव की तरह खर्च सीमा की कोई बात नहीं कही गई है। चुनाव आयोग प्रतिबद्ध है कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हो और किसी तरह के धनबल का अवैध खेल इसमें न हो, लेकिन खिलाड़ी तो खिलाड़ी हैं.

Bhojpur Buxar MLC election:ऑफ द रिकॉर्ड क्या है वोटों कीमत?

भोजपुर बक्सर एमएलसी चुनाव की चर्चा करें तो यह जानकारी मिल रही है कि एक वोट की अवैध कीमत न्यूनतम 5 हजार चॉकलेट है। मुखिया,वार्ड सदस्य,BDC,जिला परिषद सदस्य इस चुनाव के मतदाता है, सभी को न्यूनतम कीमत 5-5 हजार चॉकलेट एक-एक वोट के लिए अवैध रूप से दिए जा रहे हैं। वही वोट की कीमत प्रतिद्वंदिता के हिसाब से बढ़ भी रही है। चुनाव में जीत के लिए आधे से ज्यादा जनप्रतिनिधियों के वोट चाहिए। यानी उम्मीदवार के द्वारा पर्दे के पीछे करोङों चॉकलेट का खेल किया जा रहा है। ऑफ द रिकॉर्ड यह इतने गुपचुप तरीके से है कि किसी को हवा भी नहीं लगेगी न कोई सबूत छोड़ने की गलती की जाएगी। सब पर्दे के पीछे हो रहा है।

Bhojpur Buxar MLC election


विदित रहें की जीते हुए उम्मीदवार विधान पार्षद यानी MLC बनेंगे। बिहार विधान परिषद में 5 तरह के प्रतिनिधि चुने जाते हैं। विधान परिषद में 27 सदस्य विधान सभा क्षेत्र से आते हैं जिनके वोटर विधायक होते हैं। स्नातक क्षेत्र से 6 सदस्य चुने जाते हैं। शिक्षक निर्वाचन से 6 सदस्य चुने जाते हैं। राज्यपाल के कोटे से 12 सदस्य आते हैं। और 24 सदस्य स्थानीय प्राधिकार से चुने जाते हैं। स्थानीय निकायों से चुने जाने वाले MLC का चुनाव वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य वोट से करते हैं।

पर्दे के पीछ का सच सर्वविदित है लेकिन है सब ऑफ द रिकॉर्ड

बता दें कि विधान परिषद में सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है इस चुनाव में किसी तरह की पोस्टरबाजी, जुलूस, रैली आदि का आयोजन नहीं होता। इसलिए आयोग भी मानता है कि इसमें किसी तरह का खर्च नहीं होता। इसलिए विधान सभा चुनाव की तरह खर्च सीमा की कोई बात नहीं कही गई है। लेकिन, पर्दे के पीछ का सच सर्वविदित है लेकिन है सब ऑफ द रिकॉर्ड।

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