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डेंजर जोन चेतावनी नदारद: कुंभकर्णीय नींद सो रहा शाहपुर नगर प्रशासन

Danger Zone Shahpur: बाढ़ के इस संकट काल में असमय मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। आज रविवार की सुबह शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड-03 निवासी रामाकांत शर्मा के 28 वर्षीय पुत्र मिथुन शर्मा की बाढ़ के पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।

  • हाइलाइट: Danger Zone Shahpur
  • यह पहली घटना नहीं है; इससे पूर्व वार्ड-01 सोभी टोला के सचिन रवानी और संदीप रवानी की छेर नदी में डूबने से मृत्यु हो चुकी है।

आरा। शाहपुर नगर पंचायत में बढ़ते बाढ़ के खतरे के बीच प्रशासनिक उदासीनता एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। वर्तमान समय में जब शाहपुर का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में है, तो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नगर प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन दुखद यह है कि जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में अभी तक सुरक्षा के नाम पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

Danger Zone Shahpur : पुल और पुलिया वाले क्षेत्रों में कड़ी निगरानी की जरूरत

विशेष रूप से वार्ड संख्या 08 से वार्ड 07 गोपालपुर को जोड़ने वाली सड़क वर्तमान में बेहद खतरनाक स्थिति में है। यह पूरा मार्ग पानी में डूबा हुआ है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों का स्पष्ट रूप से मानना है कि नगर प्रशासन इस गंभीर स्थिति के प्रति संवेदनहीन बना हुआ है। लोगों की प्रमुख मांग है कि नगर के सभी पुल और पुलिया वाले क्षेत्रों में कड़ी निगरानी की जाए और विशेष रूप से बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने या नहाने से सख्ती से रोका जाए।

नगर प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक जलभराव वाले खतरनाक स्थानों पर बांस के बल्ले गाड़कर लाल झंडी लगाने की सामान्य प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई है। लाल झंडी खतरे का एक स्पष्ट मानक प्रतीक है, जो पैदल चलने वालों, नाव चलाने वालों और वाहन चालकों को यह चेतावनी देता है कि आगे का रास्ता जानलेवा हो सकता है। गहरे पानी और छिपे हुए गड्ढों की पहचान के लिए यह सुरक्षा उपाय अत्यंत आवश्यक है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि नगर प्रशासन कुंभकर्णीय नींद सो रहा है।

बाढ़ के इस संकट काल में असमय मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। आज रविवार की सुबह शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड-03 निवासी रामाकांत शर्मा के 28 वर्षीय पुत्र मिथुन शर्मा की बाढ़ के पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। मिथुन ने निस्वार्थ भाव से दूसरों की जान बचाने का साहसी प्रयास किया, लेकिन दुर्भाग्यवश वे गहरे पानी की चपेट में आ गए। यह पहली घटना नहीं है; इससे पूर्व वार्ड-01 सोभी टोला के सचिन रवानी और संदीप रवानी की छेर नदी में डूबने से मृत्यु हो चुकी है। तब पूर्व विधायक राहुल तिवारी द्वारा सड़क जाम किए जाने पर उस समय प्रशासन ने बाकायदा डेंजर जोन के बैनर और बांस-बल्ले लगाकर घेराबंदी की।

आखिर नगर प्रशासन के इस सुस्ती का क्या कारण है?

क्या नगर प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? बाढ़ का पानी निरंतर बढ़ रहा है और लापरवाही की कीमत नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। नगर प्रशासन को अविलंब सक्रिय होकर सभी खतरनाक स्थानों को चिन्हित करना चाहिए और जन-सुरक्षा के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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