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गाड़ी अपनी और भाड़ा सरकारी खजाने से, ईओयू ने की बड़ी कार्रवाई

Economic Offences Unit – भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई: ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता के सात ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी, करोड़ों की अकूत संपत्ति का खुलासा

  • हाइलाइट:Economic Offences Unit
  • जांच के घेरे में ऊर्जा विभाग के जयनगर (मधुबनी) में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता
  • ईओयू द्वारा मनोज कुमार रजक के सात अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बार जांच के घेरे में ऊर्जा विभाग के जयनगर (मधुबनी) में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक आए हैं। मनोज कुमार रजक पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से लगभग 63 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप है, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की गई है।

Economic Offences Unit: सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने 17 मार्च को एक सुयोजित रणनीति के तहत मनोज कुमार रजक के सात अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इन ठिकानों में उनके दरभंगा, जयनगर, निर्मली और सुपौल के करजाइन स्थित आवासीय, कार्यालय और व्यावसायिक परिसर शामिल हैं। इस मामले में न केवल कार्यपालक अभियंता, बल्कि उनके भाई संजय रजक को भी सह-अभियुक्त बनाया गया है।

करोड़ों की अचल संपत्ति और जमीन के दस्तावेज

तलाशी के दौरान जांच टीम को भ्रष्टाचार के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। छापेमारी में जमीन के कुल 17 दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो दरभंगा, अररिया और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जैसे शहरों से संबंधित हैं। हालांकि इन दस्तावेजों का सरकारी मूल्य लगभग एक करोड़ रुपया दर्शाया गया है, लेकिन बाजार मूल्य के अनुसार इनकी कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इसके अतिरिक्त, अभियंता के पैतृक गांव में तीन भवन और गोदाम, निर्मली में एक गोदाम और दरभंगा शहर में एक आलीशान आवासीय मकान के साक्ष्य मिले हैं, जिनके मूल्यांकन की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।

गैस एजेंसी के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि मनोज कुमार रजक ने अपने भाई संजय रजक के नाम पर ‘इंजीनियर एचपी गैस ग्रामीण वितरक’ नामक एजेंसी संचालित की थी। इसके लिए पहले संजय रजक के नाम पर जमीन खरीदी गई और बाद में उसे मनोज कुमार रजक के नाम पर हस्तांतरित कर एजेंसी खोली गई। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा यह है कि इस गैस एजेंसी के नाम पर खरीदी गई स्कॉर्पियो गाड़ी को अभियंता द्वारा अपने ही कार्यालय में सरकारी कार्य हेतु किराए पर लगाया गया था, जिसका मासिक किराया सीधे तौर पर सरकारी खजाने से वसूला जा रहा था।

नेपाल में निर्माण और अन्य निवेश

आर्थिक अपराध इकाई को जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय संबंधों और निवेश के भी प्रमाण मिले हैं। साक्ष्यों के अनुसार, मनोज कुमार रजक नेपाल के हरिपुरा (जिला सुनसरी) में एक घर का निर्माण करा रहे हैं। इसके लिए वे अपने पैतृक गांव से ही मजदूरों को नेपाल भेजते थे। इसके अतिरिक्त, उनकी पत्नी वीणा श्री भारती के नाम पर भी निवेश के प्रमाण मिले हैं। दरभंगा के बिरौल पथ पर एक पेट्रोल पंप खोलने की योजना के तहत जमीन लीज पर लिए जाने के कागजात भी बरामद हुए हैं।

नकद और वाहनों की बरामदगी

तलाशी के दौरान अभियंता के पास से दो चार पहिया वाहन (स्कॉर्पियो और स्विफ्ट डिजायर) मिले हैं। साथ ही, 1,05,000 रुपये नकद और विभिन्न बैंक खातों में जमा 4,25,000 रुपये की जानकारी भी प्राप्त हुई है।

आर्थिक अपराध इकाई की इस विस्तृत छापेमारी ने सरकारी सेवा में व्याप्त भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की एक गंभीर तस्वीर पेश की है। फिलहाल, बरामद दस्तावेजों और साक्ष्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे आगामी दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है। विभाग की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

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