HomeNewsबिहारशाहपुर नगर पंचायत: नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती योजनाएं

शाहपुर नगर पंचायत: नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती योजनाएं

Shahpur Nagar – Corruption: शाहपुर नगर पंचायत के भ्रष्टाचार का यह खेल केवल कागजी हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भाई-भतीजावाद और गुणवत्ता के साथ समझौते के भी गंभीर आरोप हैं।

  • हाइलाइट: Shahpur Nagar – Corruption
  • NH-922 हाइवे से दक्षिण स्थित पुराना सरकारी बोरिंग के पक्की नाली को ध्वस्त कर बनाई गई नई सड़क
  • जबकि यह निर्धारित नगर सीमा क्षेत्र बाहर होने और परिसीमन प्रस्ताव पारित नही होने की कही जा रही बात

आरा। शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या-10 में विकास कार्यों के नाम पर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, NH-922 हाइवे से दक्षिण स्थित पुराना सरकारी बोरिंग से खेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई ईंटों की पक्की नाली (पक्का पइन) के एक बड़े हिस्से को ध्वस्त कर वहां एक नई पीसीसी सड़क का निर्माण किया गया है। जबकि यह निर्धारित नगर सीमा क्षेत्र बाहर होने और परिसीमन प्रस्ताव पारित नही होने की बात कही जा रही है।

नगर विकास एवं आवास बिभाग के आदेश दिनांक 25 फरवरी 2026 से पूर्व नियमों के अनुसार, 15 लाख रुपये से अधिक की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए सार्वजनिक निविदा (टेंडर) आमंत्रित करना अनिवार्य था। हालांकि, निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता से बचने और चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए सशक्त स्थायी समिति ने इस नई सड़क के पूरी योजना को दो से तीन भागों में इस प्रकार विभाजित कर दिया कि, प्रत्येक भाग की लागत निविदा की अनिवार्य सीमा से कम रहे। इस तकनीकी चालाकी के माध्यम से बिना किसी खुली निविदा के पूरी योजना को विभागीय स्तर पर ही स्वीकृत कर दिया गया, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

भ्रष्टाचार का यह खेल केवल कागजी हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भाई-भतीजावाद और गुणवत्ता के साथ समझौते के भी गंभीर आरोप हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि इस निर्माण कार्य का क्रियान्वयन एक रसूखदार स्थानीय जनप्रतिनिधि के परिवार के सदस्य द्वारा ही किया गया है। निर्माण की गुणवत्ता का आलम यह है कि तकनीकी मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। सामान्यतः पीसीसी सड़क के लिए निर्धारित मानकों के विपरीत, यहाँ मात्र डेढ़ इंच की पतली परत बिछाकर कार्य को पूरा कर दिया गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी कम मोटाई की सड़क वाहनों का दबाव झेलने में असमर्थ होती है और बहुत जल्द टूटकर बिखर जाती है।

विडंबना यह है कि शाहपुर नगर पंचायत के अन्य वार्डों में भी पूर्व में इस तरह की अनियमितताएं देखी गई हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा उनसे कोई सबक नहीं लिया गया और न ही दोषियों पर कोई प्रभावी अंकुश लगाया गया। इस घटिया निर्माण और सार्वजनिक धन की बंदरबांट को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष व्याप्त है। नगर क्षेत्र के इन कार्यों के लेकर स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत भी की है।

शाहपुर नगर पंचायत के स्थानीय लोगों का मानना है कि रसूखदार व्यक्तियों के प्रभाव के कारण ही दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है। सरकारी धन का इस प्रकार दुरुपयोग और कृषि सिंचाई व्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर बनाई गई यह सड़क भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण बन गई है।

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