Lucky Bisht ने कहा: एसपी साहब आम जनता का कानून और खाकी पर भरोसा बना रहे। न्याय केवल मिलना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए।
- हाइलाइट: Lucky Bisht
- कैमरे के सामने दिखने वाली औपचारिकता के पीछे का सच बिल्कुल अलग
- कहा: यह सब कुछ अब बंद कर दो, भाई को अपराधी बताकर एसपी ने धमकाया
आरा। न्याय व्यवस्था किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है। जब कानून के रक्षक ही शोषक की भूमिका में नजर आने लगें, तो व्यवस्था पर विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में भरत तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर का मामला देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। मानवीय संवेदनाओं से जुड़े इस मामले में प्रशासनिक दृष्टिकोण बेहद चिंताजनक हैं। पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने इस प्रकरण में भोजपुर के एसपी श्री राज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Lucky Bisht : लकी बिष्ट द्वारा किए गए खुलासे से मची हलचल
पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने इस प्रकरण में कहा कि सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। इसमें भोजपुर के एसपी राज, दिवंगत भरत तिवारी के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात करते हुए दिखाई दिए। मीडिया के सामने उन्होंने यह आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की जाएगी और किसी भी पहलू को अनसुना नहीं किया जाएगा। उस समय इस कदम की सराहना भी हुई, क्योंकि जनता को लगा कि प्रशासन संवेदनशील है। लेकिन, लकी बिष्ट द्वारा किए गए खुलासे ने इस पूरी घटना के पीछे छिपी एक कड़वी सच्चाई को सामने लाकर रख दिया है।
पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट बोले : भोजपुर एसपी ने दी भरत तिवारी के भाई को धमकी
लकी बिष्ट के अनुसार, कैमरे के सामने दिखने वाली औपचारिकता के पीछे का सच बिल्कुल अलग है। यह आरोप लगाया गया है कि एसपी साहब ने भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन, जो महज 16-17 वर्ष का छात्र है, उसे एकांत में ले जाकर कहा यह सब कुछ अब बंद कर दो, भाई को अपराधी बताकर धमकाया। एक नाबालिग छात्र से यह कहना न केवल पद की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि कानून के शासन का मजाक भी है। जब वह बच्चा यह पूछता है कि उसे क्यों धमकाया जा रहा है, तो जवाब में उसे उसके भाई के अतीत और कथित अपराधों का हवाला दिया जाता है।
आईपीएस न्याय का आधार होता है: लकी बिष्ट
पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने कहा कि एक आईपीएस (IPS) अधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह न्याय का आधार बने। यदि किसी के मन में अपने भाई की मृत्यु के बाद न्याय की उम्मीद है, तो उसे डराना या धमकाना सीधे तौर पर जांच की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है। लकी बिष्ट ने कहा है कि जिस अधिकारी ने एक नाबालिग बच्चे को घर में जाकर धमकाया हो, क्या उस अधिकारी के रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव है?
क्या प्रशासन की मंशा सच में भरत तिवारी के पीड़ित परिजनों के साथ न्याय करने की है? भोजपुर के एसपी साहब से ये उम्मीद नहीं थी, सबसे पहले ऐसे अधिकारियों को उस जांच से दूर करना होगा जिनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। लकी बिष्ट ने चुनौती दी है कि यदि एसपी साहब को साक्ष्य (एविडेंस) चाहिए, तो वे उसे प्रदान करने के लिए तैयार हैं।
हमे लगता था की दुश्मन सीमा पार है: पूर्व रॉ एजेंट
पूर्व रॉ एजेंट ने कहा कि यह प्रकरण हमें एक बहुत बड़े आत्ममंथन की ओर ले जाता है। अक्सर हम अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार के दुश्मनों, जैसे आईएसआई या अन्य बाहरी ताकतों को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन जब सिस्टम के भीतर बैठे लोग ही अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए आम नागरिक को आतंकित करने लगें, तो वह हमारे देश के लिए किसी बड़े दुर्भाग्य से कम नहीं है। एसपी साहब आम जनता का कानून और खाकी पर भरोसा बना रहे। न्याय केवल मिलना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए।




